अब अंतरिक्ष व साइबर स्पेस के लिए भी तैयार है हिंद की सेना

दुनिया में बदलते युद्ध के पारंपरिक तौर-तरीके और 'मॉडर्न वार' को देखते हुए चीन एवं अमेरिका की तर्ज पर भारत में भी तीनों सेनाओं को एक करने का फैसला लिया गया है। इसी के तहत देश में कुल पांच कमांड बननी हैं। इनमें तीन कमांड्स की अंतरिक्ष से लेकर साइबर स्पेस और जमीनी युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। चीन और पाकिस्तान से निपटने के लिए अलग से एक-एक कमांड बनेगी। तैयार किए गए 'रोडमैप' को 2022 तक लागू किए जाने पर भारत ऐसा करने वाला तीसरा देश हो जाएगा।

दरअसल, भारत का एयर डिफेंस और मैरीटाइम कमांड के साथ लंबे समय से प्रतीक्षित थिएटराइजेशन प्लान तैयार हो चुका है। भारत की पहली वायु सुरक्षा और समुद्री कमांड मई तक शुरू होगी। मौजूदा समय में थल, नौसेना और वायुसेना के अपने-अपने कमांड्स हैं, लेकिन पुनर्गठन होने पर हर थिएटर कमांड में भारत की तीनों सेनाओं नौसेना, वायुसेना और थल सेना की टुकड़ियां शामिल होंगी। सुरक्षा चुनौती की स्थिति में तीनों सेनाएं साथ मिलकर लड़ेंगी। थिएटर कमांड का नेतृत्व केवल ऑपरेशनल कमांडर के हाथ में होगा। चीन और अमेरिका की तर्ज पर भारत की तीनों सेनाओं को भी अत्याधुनिक बनाकर जमीनी युद्ध के साथ-साथ अंतरिक्ष, इंटरनेट और सीक्रेट वॉरफेयर के लायक सक्षम बनाने की जरूरत समझी गई है। इसी के तहत बनाए गए 'रोडमैप' में तीनों सेनाओं को मिलाकर तीन स्पेशल कमांड गठित करने का फैसला लिया गया है, जो दुश्मन को किसी भी परिस्थिति में मुंहतोड़ जवाब दे सकें।

केंद्र सरकार ने भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत को सेनाओं की तीन नई कमांड बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। तीनों सेनाओं से मिलाकर खास तौर पर एक 'सेंट्रल पूल' बनाया जाएगा। इसे गैर-पारंपरिक युद्धों की तकनीकों से लैस करके हर तरह की आधुनिक विशेषज्ञता मुहैया कराई जाएगी। यानी, सबसे पहले डिफेंस साइबर एजेंसी (डीसीए) बनेगी और इसके बाद डिफेंस स्पेस एजेंसी (डीएसए) एवं स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन (एसओडी) तैयार की जाएंगी। इन तीनों कमांड का नेतृत्व सीडीएस के हाथों में होगा। इसके अलावा सीडीएस के पास सशस्त्र बल स्पेशल ऑपरेशन डिवीजन, साइबर कमांड और उसके तहत रक्षा खुफिया एजेंसी होगी, जिसमें तीनों सेनाओं के अधिकारी शामिल होंगे।

सेनाओं का नया ढांचा बनने के बाद थल सेनाध्यक्ष, वायु सेना प्रमुख और नौसेना अध्यक्ष के पास ऑपरेशनल जिम्मेदारी नहीं होगी लेकिन अमेरिकी सेना की तर्ज पर थिएटर कमांडरों के लिए संसाधन जुटाना इन्हीं के जिम्मे रहेगा। एकीकृत कमांड के तहत सेना, वायु सेना और नौसेना की इकाइयां रहेंगीं, जिसके परिचालन के लिए तीनों सेनाओं में से एक-एक अधिकारी को शामिल किया जायेगा। पांचों कमांड्स का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल या समकक्ष रैंक के कमांडरों के हाथों में होगा जो मौजूदा कमांड प्रमुखों के रैंक के बराबर होंगे। मई तक गठित की जाने वाली दो कमांड की कवायद अंतिम दौर में है। इन कमांड्स के प्राधिकार, कमान और नियंत्रण संरचनाओं और बजट के निष्पादन से संबंधित पहलुओं को देखा जा रहा है।

प्रयागराज में पहली वायु रक्षा कमांड अप्रैल में स्थापित की जाएगी। यह तीनों सेनाओं के वायु रक्षा संसाधनों को नियंत्रित करने के साथ ही हवाई दुश्मनों से सैन्य संपत्ति की रक्षा करने का काम करेगा। इसके कमांडर-इन-चीफ शीर्ष तीन सितारा भारतीय वायु सेना अधिकारी होंगे। एयर डिफेन्स कमांड देश की वायु सीमाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित होगी, जिसकी जिम्मेदारी दुश्मनों पर नजर रखने और हवाई हमले करने की होगी। यह कमांड सभी लड़ाकू विमान, मिसाइलें, मल्टी रोल एयर क्राफ्ट पर अपना नियंत्रण रखेगी और भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा करने के लिए भी जिम्मेदार होगी। मौजूदा समय में भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना अलग-अलग तरह से बिना किसी तालमेल के भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा करती हैं।

इसी तरह गठित की जाने वाली दूसरी मैरीटाइम थिएटर कमांड का मुख्यालय पश्चिमी तट पर कारवार में होगा। इस कमांड की जिम्मेदारी भारत को समुद्री खतरों से सुरक्षित करने की होगी। इसमें भी सेना और वायु सेना के अधिकारी शामिल होंगे लेकिन इसके कमांडर-इन-चीफ शीर्ष तीन सितारा भारतीय नौसेना अधिकारी होंगे। समुद्री कमांड का काम हिन्द महासागर और भारत के द्वीप क्षेत्रों की रक्षा करना होगा और साथ ही समुद्री गलियारों को किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त और खुला रखना होगा। शुरुआत में भारतीय नौसेना की समुद्री संपत्ति पूर्वी सीबोर्ड पर पश्चिमी समुद्र तट, विशाखापट्टनम पर करवार में और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में रखी जाएगी। चीन से जुड़ी समुद्री सीमा पर 2001 में बनाई गई नौसेना की अंडमान-निकोबार द्वीप कमांड (एएनसी) को इसी कमांड के साथ मिला दिया जाएगा।


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