मदिरालयों के बाद अब देवालयों को खोलने की मांग

देशबंदी के तीसरे चरण के तीसरे दिन की शुरुआत मदिरालयों के आगे लंबी-लंबी लाइनों के साथ हुई। इसे देखते हुए अब देवालयों को भी खोले जाने के सुर सुनाई देने लगे हैं।

तीर्थ पुरोहितों के संगठन इस मांग को लेकर आगे आए हैं। इससे पहले तीर्थ, पुरोहित, पंडा व पुजारियों को आर्थिक मदद दिए जाने का मुद्दा भी उठता रहा है।

अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारें अगर मदिरा की दुकानों की जगह मंदिर और सभी धर्मस्थलों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए खोल दें तो लोगों को संबल मिलेगा। उन्होंने शराब की दुकानों को खोलना जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया।

उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के नगर प्रभारी जितेंद्र प्रजापति ने सवाल उठाया कि जहां संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी से बचने के लिए जुगत लगाने में जुटा हुआ है, वहीं हमारी सरकार शराब, गुटखा और पान मसाले की बिक्री को शुरू करने में लगी हुई है।

समाजसेवी पवन चतुर्वेदी ने शराब की दुकानों को खोले जाने के फैसले को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास अपनी आमदनी बढ़ाने का यदि यही आखिरी विकल्प बचा है तो यह दुखद है।


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