‘महाप्राण’ निराला ने किया था नई कविता का सूत्रपात

हिंदी साहित्य में छायावाद के आधार स्तम्भों में से एक, प्रयोगवादी और प्रगतिशील चेतना के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने हिंदी काव्य जगत में नई कविता का सूत्रपात किया।

निराला का जन्म 21 फरवरी 1897 को बंगाल के तत्कालीन महिषादल राज्य में हुआ था। उनका परिवार मूलतः उत्तर प्रदेश का था। उनके पिता बंगाल में नौकरी करते थे। बचपन में ही उनकी मां का देहांत हो गया था। उनकी प्राथमिक शिक्षा बांग्ला भाषा में हुई थी, लेकिन उन्होंने अंग्रेजी और संस्कृत भाषा भी सीखी। बहुत छोटी आयु में उनका विवाह कर दिया गया था, लेकिन जब निराला 20 वर्ष के थे, तभी उनकी पत्नी का देहांत हो गया। बाद में उनकी बेटी की भी मृत्यु हो गई। अपनी बेटी की याद में उन्होंने ‘सरोज-स्मृति’ नामक ग्रन्थ की रचना भी की। जीवन के प्रारंभिक दौर में दुःख झेलने वाले महाप्राण की रचनाओं में भी वेदना और व्यथा के स्वर सुनाई देते हैं।

निराला की पहली कविता 'जूही की कली है', जिसे उन्होंने वर्ष 1916 में लिखा गया था। उनकी कविताओं का प्रथम संग्रह ‘अनामिका’ है। निजी जीवन में विपत्तियों के बावजूद उन्होंने साहित्य की रचना करना जारी रखा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन से निकलने वाले समन्वय पत्र को आगे बढ़ाने में बहुत सहयोग दिया। अनामिका, परिमल, गीतिका, बेला, आराधना, गीत-गूंज इत्यादि उनकी पद्य रचनाएं हैं। निराला की गद्य रचनाओं में लिली, निरुपमा, चयन, चतुरी चमार व प्रबंध-प्रतिमा सम्मिलित हैं।

स्त्री के भावों, उसके अंदर की वेदना को समझ पाना रचनाकारों के लिए बहुत कठिन काम रहा है, लेकिन निराला ने अपनी कविताओं में स्त्री मन को छूने का प्रयास किया है। जब छायावादी कविताओं में रोमांस और रहस्य अधिक लिखा जा रहा था, तब निराला ने किसानों के शोषण पर कविताएं लिखीं। छायावाद में स्त्री को प्रेयसी के रूप में देखा गया है, लेकिन निराला ने स्त्री को श्रमिक के रूप में भी देखा। निराला ने श्रमिक स्त्री पर भी लिखा है। उनकी कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ श्रमिक स्त्री के सौंदर्य का वर्णन है। निराला ने आगे के कवियों के लिए कई आदर्श स्थापित किए हैं।

परम्परागत काव्य दृष्टि से इतर उन्होंने छंद मुक्त रचनाएं की। भाषा-शैली में अनेकानेक प्रयोग किए। निराला ने निजी जीवन की विपत्तियों को झेलते हुए स्वयं को साहित्य की साधना में पूरी तरह समर्पित कर दिया और यही कारण है कि वह ‘महाप्राण’ कहलाए। वर्तमान में उन्हें हिंदी साहित्य के आकाश में झिलमिलाते सितारों में से एक माना जाता है।


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