युवाओं के लिए स्वामी विवेकानन्द की प्रासंगिकता

स्वामी विवेकानन्द संभवतः भारत के एकमात्र ऐसे संत हैं, जो अध्यात्म, दर्शन और देशभक्ति जैसे गंभीर गुणों के साथ-साथ युवा शक्ति के भी प्रतीक हैं। उनकी छवि भले ही एक धर्मपुरुष और कर्मयोगी की है किन्तु उनका वास्तविक उद्देश्य अपने देश के युवाओं को रचनात्मक कर्म का मार्ग दिखाकर विश्व में भारत के नाम का डंका बजाना था। उन्हें केवल चार दशक का जीवन मिला और इसी अल्प अवधि में उन्होंने न केवल अपने समय की युवा पीढ़ी में अपनी वाणी, कर्म एवं विचारों से नई ऊर्जा का संचार किया बल्कि बाद की पीढ़ियों के लिए भी वह आदर्श बने हुए हैं। वह युवाओं के प्रिय इसलिए हैं कि बचपन से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक उनमें प्रश्न और जिज्ञासा का भाव जीवित रहा। 

Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login


Related Items

  1. प्रासंगिकता खो बैठे हैं एक्जिट पोल, ज्योतिषियों की भविष्यवाणी है ज्यादा सही

  1. जब एक बंदर ने स्वामी विवेकानंद को दिया जिंदगी का सबक

  1. जब स्वामी विवेकानंद ने पहन रखे थे विदेशी जूते

loading...