कोरोना विभीषिका से जूझ रहे विश्व को ठेंगा दिखाने में जुटा चीन

पूरी दुनिया आज करोना की मार झेल रही है। एक ओर तमाम देश जहां एकदूसरे का सहयोग कर रहे हैं, वहीं इन हालातों के बीच चीन का रवैया हैरान करने वाला है।

एक तरफ जहां भारत ने संयुक्त नौसेना अभ्यास को टाल दिया तो दूसरी ओर चीन ने कंबोडिया के साथ चीन-कंबोडिया गोल्डन ड्रैगन मिलिट्री एक्सरसाइज को पूरा कर लिया। कंबोडिया की तरफ से कहा गया है कि इस अभ्यास में करीब 3000 सैनिकों ने भाग लिया, वहीं चीन की तरफ से यह आंकड़ा महज 800 का बताया गया। इससे साफ हो जाता है कि दाल में कुछ काला जरूर है।

अमेरिका की तरफ से भी चीन पर अनावश्यक परमाणु परीक्षण करने के आरोप लगे हैं। कई वैश्विक सामरिक रिपोर्टों में भी चीन द्वारा अपने गेमयांगयांग क्षेत्र में किए गए इन परीक्षणों के बारे में उल्लेख किया गया है। इन रिपोर्टों में परीक्षणों से संबंधित तस्वीरें भी प्रकाशित की गई हैं।

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बीते जनवरी माह में भी चीन ने तिब्बत में अपने सैन्य अभ्यास को अंजाम दिया था। उस समय चीन खुद कोरोना की विभीषिका से जूझ रहा था लेकिन इसके बावजूद उसकी सामरिक गतिविधियों में कोई कमी नहीं दिखाई दी।

कमाल की बात यह है चीन इन सभी आरोपों का या तो साफ तौर पर खंडन कर रहा है या इन्हें कम करके बता रहा है।

इन दिनों जिस तरह से दक्षिण चीन सागर में चीन अपना दबदबा कायम करना चाह रहा है, उससे एक बात साफ हो जाती है कि चीन कोरोना महामारी की इस विभीषिका में भी कोई मौका चूकना नहीं चाहता है। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि यह जरूर कहा है कि चीन को इस तरह का आक्रामक व्यवहार तुरंत रोकना चाहिए, लेकिन बदली परिस्थितियों में चीन पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी।

उल्टे, चीन लगातार अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ से अपनी सेना को ‘तैयार’ रहने के लिए कहा गया। ये ‘तैयारी’ किस संदर्भ में की जा रही है यह निकट भविष्य में जरूर दिखने लगेगा।

चीन की इन हरकतों को देखते हुए दुनियाभर में यह माना जा रहा है कि चीन की ओर से कोरोना की साजिश को बखूबी अंजाम दिया गया है। जब दुनिया इस महामारी से जूझ रही है, तब वह अपने सभी वैश्विक हितों को साध लेना चाहता है।

तुर्की में अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रो. मैसत हक्की कैसीन के मुताबिक वुहान से कोरोना वायरस पूरे विश्व में फैलने के बाद चीन को लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इससे मुकाबला करने के लिए चीन लगातार युद्ध की तैयारियों में जुटा हुआ है। आने वाले वक्त में कोरोना से जुड़े मामलों को लेकर चीन को अंतरराष्ट्रीय अदालत का भी सामना करना पड़ सकता है।

इन सब घटनाओं के मद्देनजर दुनियाभर के कूटनीति विशेषज्ञ मानने लगे हैं कि चीन अब अपनी आक्रामक विदेश नीति को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। अब बाकी विश्व को भी इससे मुकाबले की रणनीति बनानी होगी। आज के विश्व और शक्ति संतुलन को देखते हुए शेष दुनिया यदि चीन पर आक्रामक कूटनीतिक, सामाजिक व आर्थिक प्रतिबंधों के बारे में यदि सोचना शुरू कर दे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।


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