कन्नड़ भाषा के महान साहित्यकार मास्ति वेंकटेश अय्यंगर कन्नड़ कहानी के प्रवर्तक माने जाते हैं। उनकी रचना चिक्क वीरराजेंद्र के लिए उन्हें वर्ष 1983 में, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मास्ति अय्यंगर ने 137 से भी अधिक रचनाएं की, जिनमें से लगभग 119 कन्नड़ भाषा में और शेष अंग्रेजी भाषा में लिखी गई हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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साहित्य सृजन एक साधना है। व्यक्ति जीवन की आंच पर तपता है और उन अनुभूतियों को शब्दों के सांचे में ढालकर पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करता है। लेखक अपने अनुभवों को, ठीक-ठीक पाठकों तक पहुंचा दे तो सृजन का एक उद्देश्य सफल होता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी 'सब्सक्राइब करें' महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...  

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कबीर ने भारत के सामाजिक और साहित्यिक क्षेत्र को अत्याधिक प्रभावित किया। वह महज विचारक, कवि या समाज सुधारक ही नहीं, वरन अपने आप में एक संस्था माने जाते हैं। वह आजीवन समाज जीवन में व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात करते रहे। लोक कल्याण के लिए ही उनका समस्त जीवन था। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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स्वतंत्रता आंदोलन के दौराम वंदेमातरम् गीत ने जनमानस में राष्ट्रीयता की अलख जगाई थी। आज भी राष्ट्रीय गीत सुनकर, प्रत्येक भारतीय गर्वित अनुभव करता है। अपने गीत से उन्होंने शस्यश्यामला भारत भूमि की अर्चना की। बंकिमचंद्र चटर्जी को प्रख्यात उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार के रूप में जाना जाता है। वह बांग्ला के अतिरिक्त, दूसरी भाषाओं पर भी समान अधिकार रखते थे। उन्हें लोग बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के नाम से भी जानते हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें" महज एक रुपये में...

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शब्दों की कुशल चितेरी और भावों को भाषा की सहेली बनाने वाली एक मात्र सर्वश्रेष्ठ सूत्रधार महादेवी वर्मा साहित्य की वह उपलब्धि हैं, जो युगों-युगों में केवल एक ही होती हैं। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें महज एक रुपये में अगले 24 घंटों के लिए...

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हिंदी साहित्य में छायावाद के आधार स्तम्भों में से एक, प्रयोगवादी और प्रगतिशील चेतना के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ ने हिंदी काव्य जगत में नई कविता का सूत्रपात किया।

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