संसदीय गरिमा पर भाषण देना हमारे जनप्रतिनिधियों का पसंदीदा शगल बन चुका है, लेकिन उसी गरिमा को रोज़मर्रा की राजनीति में रौंद देना उससे भी ज़्यादा सहज हो चुका है। संसद, विधानसभाओं, स्थानीय निकायों, पंचायतों तक, में मर्यादा की दुहाई जितनी ऊंची आवाज़ में दी जाती है, व्यवहार में उसकी अनदेखी उतनी ही बेशर्मी से हो रही है...
Read More




