कोयला क्षेत्र में रोजगार और उत्पादन के नए आयाम गढ़ रहा है देश

भारत का कोयला क्षेत्र देश की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में न केवल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, साथ ही रोजगार वृद्धि को भी बनाए हुए है। इस साल मार्च के महीने में देश का कोयला उत्पादन 900 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। चालू वित्तीय वर्ष में इसका अब एक बिलियन टन से अधिक होने का अनुमान है।

भारत सरकार के कोयला उत्पादक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, विशेष रूप से कोल इंडिया लिमिटेड और एनएलसी इंडिया लिमिटेड ने सामूहिक रूप से 128,236 संविदा श्रमिकों सहित 369,053 व्यक्तियों के कार्यबल को रोजगार प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त, यह क्षेत्र लगभग 3.1 लाख पेंशनभोगियों की मदद करता है।

Read in English: Coal sector created substantial employment growth in last decade

हाल के वर्षों में कोल इंडिया लिमिटेड और इसकी सहायक कंपनियों ने 2014 से फरवरी 2024 तक व्यापक भर्ती मुहिम चलाकर अपने कार्यबल में 59,681 नए कर्मियों को जोड़ा। इसी प्रकार, एनएलसी इंडिया लिमिटेड ने इसी अवधि के दौरान 4,265 व्यक्तियों की भर्ती की है।

कोल इंडिया लिमिटेड और इसकी सहायक कंपनियों द्वारा 5,711 व्यक्तियों को भर्ती करने के साथ चालू वित्तीय वर्ष में भर्ती प्रयासों में और तेजी देखने को मिली है। इसी तरह, एनएलसी इंडिया लिमिटेड ने इसी अवधि के दौरान 661 कर्मियों की भर्ती की है।

बढ़ती मांग से प्रेरित कोयला खनन गतिविधियों में वृद्धि से आने वाले वर्षों में रोजगार वृद्धि को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रदान करने के अलावा, खनन गतिविधियां महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करती हैं, जो पूरे देश में सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देती हैं। जैसा कि कोयला क्षेत्र का विस्तार जारी है, यह समावेशी विकास को बढ़ावा देने और स्थायी आजीविका के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन को बदलने के लिए प्रतिबद्ध नजर आता है।

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