देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे मनाया जाता है रंगों का त्योहार...

होली आई खुशियां लाई..., जी हां, होली जब भी आती है, पूरे देश में एक अलग सी खुमारी छा जाती है। हर कोई एक अलग अंदाज में होली की मस्ती में सराबोर नजर आता है। कोई फूलों से होली खेलता है, तो कोई ढोल नगाड़ों की धुन पर नाच-गाकर रंगों के त्योहार में खो जाता है। कोई भांग की मस्ती में झूमकर, तो कोई रंग-बिरंगे लाल-गुलाबी रंगों से इस पावन त्योहार को मनाता है। सभी के तौर तरीके भले ही अलग हो, लेकिन मकसद सिर्फ एक ही होता है, कि कैसे होली के बहाने अपनों को और करीब लाया जाए और सबके जीवन को खुशियों से हरा-भरा बनाया जाए..., तो चलिए जानते हैं देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसे मनाया जाता रंगों का यह त्योहार...

मथुरा की होली

होली का जिक्र किया जाए और बरसाने की लठमार होली का जिक्र न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। राधा रानी की नगरी बरसाने में लठमार होली विश्व प्रसिद्ध है। इसके लिए लोग विदेशों से भी बरसाने पहुंचते हैं। होली से एक हफ्ते पहले यहां त्योहार की मस्ती शुरू हो जाती है। कहा जाता है कि कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा और उनकी सखियों से होली खेलने बरसाना पहुंच जाते थे। राधा और उनकी सखियां ग्वाल-बालों पर डंडे बरसाया करती थीं। मार से बचने के लिए ग्वाल भी लाठी या ढालों का प्रयोग करते थे, जो बाद में होली की परंपरा बन गई। बरसाने के साथ-साथ मथुरा और वृंदावन में भी कई तरीकों से होली मनाई जाती है। यहां 40 दिन पहले से ही होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।

शांति निकेतन की होली

पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में होली का त्योहार बसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की थी। इस उत्सव में युवा पारंपरिक परिधानों में सज-संवरकर, रविन्द्र संगीत गाकर बसंत का स्वागत करते हैं और रंगों के साथ-साथ फूलों से होली खेलते हैं।

पुरुलिया की होली

पश्चिम बंगाल के ही पुरुलिया में भी होली को बसंत उत्सव के तौर पर तीन दिन तक मनाया जाता है। इसमें स्थानीय लोग लोक संगीत और नृत्य के साथ होली का उत्सव मानते हैं।

होला मोहल्ला की होली

पंजाब के आनंदपुर साहिब की होला मोहल्ला की होली भी काफी लोकप्रिय है। इसकी शुरुआत सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह ने की थी। इस मौके पर यहां मार्शल आर्ट, मॉक स्वार्ड फाइट, एक्रोबेटिक मिलिट्री एक्सरसाइज व टर्बन ट्राइंग का प्रदर्शन किया जाता है।

राजस्थान की रॉयल होली

होली की पूर्व संध्या पर उदयपुर में राजघराने की ओर से जलसे का आयोजन किया जाता है। राजमहल से मानेक चौक तक उत्सव-यात्रा निकाली जाती है और पारम्परिक तरीके से होलिका दहन किया जाता है।

जयपुर में हाथियों संग होली

राजस्थान के जयपुर शहर में भी होली का अलग रंग देखने को मिलता है। यहां हाथियों संग होली खेली जाती है। होली के मौके पर यहां रामबाग पोलो ग्राउंड में हाथियों की सौंदर्य और रस्साकशी प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। साथ ही, उनसे नृत्य भी कराया जाता है। इसे देखने के लिए विदेशों से भी पर्यटक यहां आते हैं।

दिल्ली की बिंदास होली

राजधानी दिल्ली में बिंदास तरीके से रंगों के त्योहार को मनाया जाता है। यहां रंगों के साथ-साथ, भांग भी होली की मस्ती को दोगुना कर देती है। जगह-जगह लोग डांस और पार्टी का आयोजन करते हैं।

हम्पी में विदेशियों संग होली

कर्नाटक में सामान्य़त: होली का उत्सव नहीं मनाया जाता है, लेकिन हम्पी की बात ही कुछ और है। वहां पूरा शहर होली के दिन उत्सव में शामिल हो जाता है। यह उत्सव विजयनगर राज्य के पुराने साम्राज्य की झलक दिखाता है। इसमें पूरा शहर ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न में शामिल होता है और रंगों का त्योहार मनाता है।

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