समीक्षा भारती न्यूज सर्विस

समीक्षा भारती न्यूज सर्विस, मीडियाभारती वेब सॉल्यूशंस का सिंडिकेशन विभाग है, जो भारत का प्रमुख ऑनलाइन मीडिया हाउस है और साल 2002 से मीडियाभारती.नेट और कई अन्य अग्रणी समाचार पोर्टल प्रकाशित कर रहा है।

हम सब झांसी की रानी को जानते हैं। अपने पाठ्यपुस्तकों में उनकी वीरता की गाथा पढ़ी है। तभी तो, अगर आज भी कहीं “खूब लड़ी मर्दानी”, यह पंक्ति सुनते हैं, तो आगे की कविता अपने आप याद आ जाती है। यह रानी लक्ष्मी बाई के अभूतपूर्व शौर्य का ही परिणाम है कि आज भारत के बच्चे-बच्चे की वाणी पर उनका नाम है। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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वह दौर गुलामी का था। उस समय जंगल के भीतर बिरसा मुंडा, ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध प्रतिरोध का सबसे सशक्त स्वर बनकर उभरे थे। उन्होंने आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए ही कदम नहीं उठाया, बल्कि उन्हें आर्थिक,सामाजिक और शैक्षिक रूप से सबल बनाने के लिए भी हरसंभव प्रयास किया। पूरा आलेख पढ़ने के अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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'शून्य' की खोज हो या 'ज्यामिति' की या 'पेड़ों में जीवन' का पता लगाना हो, अथक मेहनत और शोध के दम पर ऐसी उपलब्धियां भारतीय हमेशा हासिल करते रहे हैं, लेकिन श्रेय हमेशा कोई दूसरा ले जाता रहा है। इसी कड़ी में, अब एक और शोध व खोज जुड़ने वाली है, पादपों की खोज। जी हां, नई जानकारियों से पता चला है की भारतीय ''ऋषि पराशर'' ने ''थिओफ्रैस्टस'' से वर्षों पहले 'वनस्पति विज्ञान' पर प्रामाणिक ग्रंथ लिखे हैं। ग्रीस के प्रसिद्ध दार्शनिक एवं प्रकृतिवादी, थिओफ्रैस्टस को विश्वभर में वनस्पति विज्ञान के जनक के रूप में सम्मान के साथ याद किया जाता है, लेकिन इसके लिए ''पराशर ऋषि'' ने प्रमाणिक ग्रंथ लिखा है, जिनमें तमाम पादपों की पहचान, जड़, तने को लेकर बहुत ही सूक्ष्म तरीके से की गई है। इस नए शोध के आधार पर कहना होगा कि भारत ही वह पहला देश है, जिसे 'वनस्पति शास्त्र' का पितामह देश और पराशर ऋषि को ऐसे वैज्ञानिक के रूप में गिना जाएगा, जिन्होंने सबसे पहले ''वनस्पति विज्ञान'' को लिपिबद्ध करने का काम किया है। इसलिए सही मायने में ‘फादर ऑफ बॉटनी’ पराशर ऋषि ही हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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अक्सर सड़कों पर दौड़ते ट्रक, टेपों या ऑटो इत्यादि अपने पीछे चलने वालों के दिमाग में कई तरह के संदेश छोड़ जाया करते हैं। दरअसल, बात इन वाहनों के पीछे अंकित और आमजन से निकली शायरी की हो रही है। जी हां, आमतौर पर लोग ऐसे शेर वाले संदेशों को वाहन-मालिक और उनके चालकों के आत्मसंतोष के रूप में ही देखा करते हैं। ऐसे में सवाल है कि कितनों ने महसूस किया कि ये शेर कई बार हमारी उदास यात्रा को भी हसीन बना देते हैं। आज दुनिया जब एक महामारी का दंश झेल रही है, देश में यह वाहन-शायरी हमें एक बड़ी सीख देती हुई भी नजर आ रही हैं...

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वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि बीन परिवार के एक पौधे की पत्तियों से निकाली गई प्राकृतिक नीली डाई इंसानी आंखों को हानिकारक लेजर विकिरण से बचाने में सक्षम है। इसका उपयोग संभावित हानिकारक विकिरण को कमजोर करने और आंखों या अन्य संवेदनशील ऑप्टिकल उपकरणों को ऐसे वातावरण में आकस्मिक क्षति से बचाने के लिए उपयोगी है, जहां संभावित हानिकारक विकिरण उपयोग में हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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संपूर्ण विश्व को शांति का संदेश देने वाले महात्मा बुद्ध के कैवल्य ज्ञान प्राप्ति के बाद पूरे देश में तेजी से उनके अनुयायी बढ़ गए थे। भारत के विभिन्न शक्तिशाली राजाओं ने महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को अपने साम्राज्य में प्रचारित किया। ...तो क्या महात्मा बुद्ध के चरण बुंदेलखण्ड भूमि पर भी पड़े होंगे? इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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