ताजा खबर : वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारत के इस्पात क्षेत्र में नियमित रूप से वृद्धि जारी रही * मुंबई का जवाहर द्वीप भारत का पहला प्लास्टिक-मुक्त ऑयल टर्मिनल बना * भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू और कश्मीर में खुफिया जानकारी आधारित ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर कमांडर मूसा को मार गिराया

जब वोटर भाव नहीं देते, तो कुछ नेता सड़क पर उतर आते हैं। जब दलीलें खत्म होती हैं, तो गाली गलौज शुरू हो जाती है। और, जब जनता साथ नहीं देती, तो क्रांति का ढोल पीट दिया जाता है...

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कुछ गीत ऐसे होते हैं, जो प्रेम की कहानी को उसके सुखद पलों से नहीं, बल्कि बिछड़ने के बाद बची यादों से व्यक्त करते हैं। ऐसे गीतों में प्रेमी की मौजूदगी से अधिक उसकी अनुपस्थिति बोलती है। साल 1961 में रिलीज हुई फिल्म ‘हमारी याद आएगी’ का गीत ‘कभी तन्हाइयों में...’ इसी भाव का एक यादगार उदाहरण है...

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दैनिक भोजन के माध्यम से आवश्यक विटामिन और खनिजों की खपत बढ़ाने के लिए जैव-संवर्धित फसलों को विकसित किया जा रहा है। इस संदर्भ में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन आलू की किस्में विकसित की हैं, जिनमें कुफरी नीलकंठ, कुफरी माणिक और कुफरी जामुनिया शामिल हैं। इन किस्मों में एंथोसायनिन, आयरन और जिंक जैसे महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट और सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद हैं। इनमें कुफरी जामुनिया विटामिन सी, एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड के उच्च स्तर के कारण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्शाती है। इसका बेहतर पोषण प्रोफाइल, आकर्षक बैंगनी गूदा और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत आकर्षण इसे छिपी भूख से निपटने और पोषण सुरक्षा में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण किस्म बनाते हैं।

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पेरिस की कक्षाओं से स्पेन की सड़कों तक, युवा बेहतर भविष्य मांग रहे हैं। भारत में कुछ युवा इस्तीफों, हंगामे और सियासी नौटंकी में क्यों उलझे हैं?

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एक जमाना था सुबह का अखबार पढ़े बिना लोगों को चैन नहीं आता था। शाम को, ‘हम लोग’, या रविवार की सुबह ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ सीरियल देखे बगैर सो नहीं पाते थे। घंटों तक बच्चे टीवी से चिपके रहते थे। क्रिकेट मैच मोहल्लों को जोड़ देते थे। धारावाहिक घर-घर की बातचीत बन जाते थे। समाचार चैनल देश की राजनीतिक धड़कन तय करते थे। मीडिया सिर्फ सूचना का माध्यम नहीं था, वह सामाजिक संस्कृति का हिस्सा था। और अब...

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साल 1987 में रिलीज और राज एन सिप्पी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ का गीत ‘दिल में हो तुम...’ को बप्पी लाहिरी के संगीत, फारूक कैसर के बोल और अलग-अलग गायकों की आवाजों ने एक खास पहचान दी।

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जम्मू-कश्मीर का दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र धीरे-धीरे कनेक्टिविटी के एक नए युग की ओर अग्रसर हो रहा है। उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक ने घाटी को भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ दिया है। इस परियोजना का प्रमुख आकर्षण चिनाब पुल है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल है।

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बेटे ने अपनी ही मां को गोली मार दी। भाई खेत के टुकड़े के लिए एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। बुजुर्ग मां फ्लैट के एक कोने में पड़ी रही, जैसे घर का कोई बेकार सामान। एक युवा प्रोफेशनल अकेलेपन से टूटकर आत्महत्या की कोशिश कर बैठा। यह किसी अपराध फिल्म की पटकथा नहीं है बल्कि यह बदलते भारत की भयावह सामाजिक तस्वीर है। वही भारत, जिसने कभी पूरे उत्साह से ‘हम दो, हमारे दो’ का नारा अपनाया था...

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साल 1994 में रिलीज हुई फिल्म ‘इम्तहान’ का गीत ‘इस तरह आशिकी का...’ की खासियत केवल इसका रोमांटिक अंदाज नहीं है, बल्कि इसके दो अलग-अलग संस्करण भी हैं। एक संस्करण अमित कुमार ने गाया, जबकि दूसरे को कुमार सानू ने अपनी आवाज दी। दोनों संस्करणों का इस्तेमाल फिल्म में अलग-अलग किरदारों पर किया गया...

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यूरोप की चमचमाती सड़कें, साफ-सुथरी नदियां, शानदार इमारतें और समय पर दौड़ती ट्रेनें देखकर मन खुश हो जाता है। लगता है, बस यहीं बस जाएं! लेकिन, जैसे ही जेब से पैसे निकलने शुरू होते हैं, सपनों की दुनिया में महंगाई का भूत नाचने लगता है। खूबसूरती अपनी जगह है, मगर जिंदगी चलाने का खर्चा देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। आखिर यह कैसी तरक्की है, जहां कमाई लाखों में और बचत कौड़ियों में रह जाती है?

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