देश बदलने का दावा था। लेकिन, सड़कों पर अब भी वही पुराना दृश्य है। आगे लाल बत्ती जैसी अकड़। पीछे सायरनों की चीख। आम आदमी ट्रैफिक में पसीना बहाता खड़ा है और नेताओं के काफिले हवा चीरते निकल जाते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पुराने राजा हाथी पर चलते थे, नए शासक एसयूवी के झुंड में चलते हैं...
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