ताजा खबर : ‘अग्नि-4’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण * यूपीआई से जून 2026 तक लगभग 55.49 करोड़ उपयोगकर्ता जुड़े * प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया सोमनाथ मंदिर में कुंभ अभिषेक

साल 1455 में जब योहानेस गुटेनबर्ग ने चल अक्षरों वाली मुद्रण मशीन का आविष्कार किया, तब शायद उन्हें भी अंदाज़ा नहीं था कि एक दिन किताबें छापना इतना आसान हो जाएगा कि हर लेखक स्वयं का प्रकाशक बन सकेगा। गुटेनबर्ग के छापाखाने ने ज्ञान को राजमहलों और मठों की दीवारों से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाया। अब, लगभग साढ़े पांच सौ वर्ष बाद, स्व-प्रकाशन उसी क्रांति को एक नए मुकाम पर ले गया है।

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क्या सिर्फ़ चमचमाती सड़कें, ऊंची इमारतें और डिजिटल ऐप्स ही किसी देश की तरक्की का पैमाना हैं? अगर चुनाव पैसे के दम पर लड़े जाएं, अदालतों में इंसाफ़ वर्षों तक अटका रहे, सरकारी स्कूल कमज़ोर होते जाएं, पुलिस पर भरोसा घटता जाए और इलाज जेब खाली कर दे, तो क्या सचमुच हम ‘नए भारत’ की मंज़िल पर पहुंच गए हैं...

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हाल ही में गुजरात में वंदे भारत एक्सप्रेस ने ग्रीन कॉरिडोर की मदद से जीवित हृदय समय पर पहुंचाकर इतिहास रचा। एक परिवार अपने प्रियजन को हमेशा के लिए विदा कर रहा था। उसी समय, किसी दूसरे अस्पताल में एक मरीज नई जिंदगी की उम्मीद से ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जा रहा था। एक घर का ग़म, दूसरे घर की खुशी बन गया। अंगदान की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि इंसान इस दुनिया से जाने के बाद भी कई लोगों की धड़कनों में ज़िंदा रह सकता है।

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शोधकर्ताओं ने एक उन्नत प्रकाश-चालित बहुक्रियाशील नैनोबोट विकसित किया है जो स्तन कैंसर के लक्षित उपचार में मदद कर सकता है...

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पिछले एक दशक में भारत की अंतरिक्ष यात्रा ‘विश्वास, विकास और जनकल्याण’ की भावना को प्रतिबिंबित कर रही है। भारत दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों में उभरकर सामने आया है। इस अवधि की प्रमुख उपलब्धियों में चंद्रयान-3 का चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतरना, आदित्य-एल1 का सौर मिशन तथा गगनयान और राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारियां शामिल हैं...

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क्रिकेट मैच देखने के लिए टिकट खरीदने से आप क्रिकेटर नहीं बन सकते, वोट डालने से नेताजी नहीं बन सकते, लाल टोपी पहनने से क्रांतिकारी नहीं हो सकते, सिर्फ शादी होने से बाप नहीं कहलाए जा सकते, तो फिर पासपोर्ट बनवाने से भारतीय नागरिक कैसे?

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​नदियां कभी सरहदें नहीं मानतीं। वे जीवन, संस्कृति और सभ्यता को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं। लेकिन, जब कोई शहर या राज्य अपनी गंदगी नदी में उड़ेल देता है, तो वह ज़हर भी सीमाएं नहीं मानता। वह भी बहते-बहते दूर तक पहुंचता है। आज यमुना इसी राष्ट्रीय शर्म की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है।

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एक दशक पहले, भारत के बिजली उत्पादन में सौर ऊर्जा का हिस्सा बहुत छोटा था। आज, यह देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती है। वर्ष 2014 में  लगभग तीन गीगावाट की स्थापित क्षमता से, इस क्षेत्र का विस्तार पचास गुना से भी अधिक हुआ है, और यह 30 जून तक 162.15 गीगावाट तक पहुंच गया...

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ब्लूबेरी और जामुन अक्सर एक जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में ये दो बिल्कुल अलग-अलग फल हैं। ब्लूबेरी उत्तरी अमेरिका की देन हैं। जो कि छोटे, गोल और हल्की खटास के साथ मीठापन लिए होते हैं। इन्हें ‘सुपरफूड’…

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