ताजा खबर : भारत का कुल समुद्री खाद्य निर्यात ₹72,000 करोड़ के उच्चतम स्तर पर पहुंचा * भारत के कुल वस्त्र निर्यात में सालाना 2.1 प्रतिशत की वृद्धि * अटल पेंशन योजना ने रचा नया कीर्तिमान, कुल नामांकन नौ करोड़ के पार

सुबह अगर आंख खुलते ही जलन हो, जैसे किसी ने मिर्ची का स्प्रे मार दिया हो, गले में खराश चिपक जाए मानो कोई पुराना कर्ज़ वसूल करने आ गया हो, और फेफड़े ऐसे खांसें जैसे ईएमआई की आखिरी किस्त पर डिफॉल्ट हो गया हो, तो घबराइए मत! बधाई हो, आप ‘विकास-प्रदत्त ऑक्सीजन’ का मजा ले रहे हैं। गहरी सांस लीजिए, ये बदबू नहीं, बल्कि ‘सक्सेस की सिग्नेचर फ्रेग्रेंस’ है। मुफ्त की हवा है जी, और मुफ्त में जो मिले, वह सबसे प्रीमियम क्वालिटी का होता है, बस एक्सपायरी डेट चेक मत करना!

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​खामोशी कभी-कभी सबसे बड़ा गुनाह बन जाती है। और आज वही घड़ी है। सभ्य दुनिया की इस चुप्पी में कोई समझ नहीं, कोई नैतिकता नहीं; सिर्फ एक ठंडी साजिश नज़र आती है। एक सवाल है जो रातों को जागता रखता है। एक बेचैनी है जो गले में फंस गई है। एक इंतज़ार है जो अब और नहीं सहा जा सकता।

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कांग्रेस-मुक्त भारत! यह नारा आज के राजनीतिक गलियारों में गूंजता है। पर इसकी पहली आहट बहुत पहले सुनाई दी थी। एक बाग़ी दिमाग में। एक बेचैन आत्मा में। डॉ राम मनोहर लोहिया के भीतर।

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क्या सचमुच भारत में चुनाव जीतने के लिए जाति का प्रमाण पत्र ही असली पासपोर्ट है? सवाल चुभता है, पर जवाब बहुतों को मालूम है। सच यह है कि हां, आज भी काफी हद तक यही हकीकत है। लोकतंत्र का मैदान खुला है, पर खेल के नियम अब भी पुरानी पहचानें तय करते हैं।

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भारत में रेलवे की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को बॉम्बे और ठाणे के बीच चलने वाली पहली यात्री ट्रेन के साथ हुई थी। शुरुआती स्टीम इंजन से अपनी यात्रा शुरू करते हुए, रेलवे ने मार्च 2026 तक ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है।

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दुनियाभर में जहां साफ पानी और शौचालय की कमी है, वहां असमानता और बढ़ती है, और सबसे ज्यादा बोझ महिलाओं पर पड़ता है...

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भारत बदल चुका है। चेहरा भी, चाल भी, चरित्र भी। सत्ता की भाषा बदली, शासन का व्याकरण बदला। पर असली सवाल अब सामने खड़ा है कि क्या यह बदलाव की आंधी आगे भी चलेगी, या अब इसकी सांस फूलने लगी है? 4 मई को पांच राज्यों के नतीजे इस पहेली का जवाब लिखेंगे।

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नल खुलता है। पानी गिरता है। हम चैन की सांस लेते हैं। लेकिन ज़मीन के नीचे? सन्नाटा है। सूखी दरारें हैं। और एक डर है, जो धीरे-धीरे हमारे भविष्य को खा रहा है...

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The well-being of a supervisor is reflected through supervisor-subordinate relationships in employee motivation and performance, and consequently, in the company’s competitiveness.

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War drums are beating again. Loud. Relentless. Almost theatrical. But here’s the uncomfortable truth: every war is not ours. And every fire does not demand that India jump in with a bucket.…

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रेलवे ने आईआरसीटीसी के माध्यम से वंदे भारत रेलगाडियों में क्षेत्रीय व्यंजनों की सेवा शुरू की है, ताकि स्थानीय जायके के साथ यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाया जा सके। इस पहल से यात्री देश के विविध…

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