ताजा खबर : वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारत के इस्पात क्षेत्र में नियमित रूप से वृद्धि जारी रही * मुंबई का जवाहर द्वीप भारत का पहला प्लास्टिक-मुक्त ऑयल टर्मिनल बना * भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू और कश्मीर में खुफिया जानकारी आधारित ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर कमांडर मूसा को मार गिराया

यूरोप की मेरी हाल की यात्रा को अगर एक शब्द में बांधना हो, तो वह शब्द होगा, ‘पानी’। मैंने वहां आधा दर्जन से ज़्यादा नदियां, नहरें और झीलें नज़दीक से देखीं। कभी क्रूज़ पर बैठकर, कभी फेरी में, कभी पुल से झांककर और कभी किनारे बैठकर। नाविकों, फेरीवालों, क्रूज़ मैनेजरों और गोंडोला चलाने वालों से बातें कीं। किनारे बैठे आम लोग भी देखे, जो दोपहर की सुनहरी धूप में नदी को निहार रहे थे, बातें कर रहे थे या बस ज़िंदगी को थोड़ी देर आराम दे रहे थे।

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मान भी लें कि कुछ गलत तत्व मीडिया में दाखिल हो चुके हैं, और कई एक्टिविस्ट सूचनाधिकार का दुरुपयोग करते हैं, तो क्या समूची बिरादरी को कटघरे में खड़ा करना उचित है? वकालत में, डाक्टरी में, न्यायिक व्यवस्था में, राजनीति में, सभी जगह ‘काली भेड़ें’ अमर्यादित कार्य कर रही हैं, लेकिन क्या पूरा सिस्टम दोषी है?

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भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा 1990 के दशक की शुरुआत में ‘परम 8000’ से विकसित होकर आज एक राष्ट्रीय परितंत्र में बदल गई है। माह सितंबर तक 40 सुपर कंप्यूटरों द्वारा 68 पेटाफ्लॉप्स, यानी, काफी तेज गणना देने के साथ, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग तक विस्तार किया जा रहा है।

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अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। टिकटों के लिए घेराबंदी तेज है, विपक्षी दल तालमेल की गांठें कस रहे हैं और भाजपा नेता पूरे भरोसे से कह रहे हैं, “हमारा काम बोलेगा।

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देश बदलने का दावा था। लेकिन, सड़कों पर अब भी वही पुराना दृश्य है। आगे लाल बत्ती जैसी अकड़। पीछे सायरनों की चीख। आम आदमी ट्रैफिक में पसीना बहाता खड़ा है और नेताओं के काफिले हवा चीरते निकल जाते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पुराने राजा हाथी पर चलते थे, नए शासक एसयूवी के झुंड में चलते हैं...

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भारत का स्वच्छता से नाता ऐतिहासिक है। सिंधु घाटी के पुरातात्विक सबूतों से पता चलता है कि वहां सफ़ाई की बेहतरीन व्यवस्था थी। आज के गुजरात स्थित लोथल जैसे शहरों में सुनियोजित नक्शे और बड़ी नालियों के नेटवर्क की व्यवस्था थी। कई घरों में निजी शौचालय थे जो नालियों से जुड़े हुए थे। इस व्यवस्था में ठोस कचरे का प्रबंधन करने के लिए निगरानी बिंदु और इससे संबंधित ढांचे भी शामिल थे...

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स्वच्छता के सफर में बदलाव की कई ऐसी कहानियां हैं, जिन्हें जानना बेहद ज़रूरी है। ये उन महिलाओं की कहानियां हैं, जो कचरे से रोज़गार पैदा कर रही हैं, अपने समुदायों में साफ-सफाई के कामों की अगुवाई कर रही हैं और रोज़मर्रा की चुनौतियों को अवसरों में बदल रही हैं। उनके साथ ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग भी हैं, जो साफ-सफाई की सेवाओं में पेशेवर भूमिकाएं और पहचान पा रहे हैं।

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विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली के एक नए अध्ययन के अनुसार, आयुष सेवा क्षेत्र भारत के सबसे तेजी से बढ़ते सेवा क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है और इसका वित्त वर्ष 2024-25 में अनुमानित आर्थिक योगदान 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर है...

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तेज़ी से बढ़ते शहरों में, पानी का इस्तेमाल होने के बाद पानी का चक्र खत्म नहीं होता है। घरों, कारखानों और आस-पड़ोस से बहकर निकलने वाले पानी को सही व्यवस्था के साथ, इस्तेमाल कर, पुन: एकत्र किया जा सकता है। उसका उपचार किया जा सकता है। पुनर्चक्रित किया जा सकता है और फिर से काम में लाया जा सकता है...

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वर्तमान दौर के भारत में महात्मा गांधी ‘आउट ऑफ फैशन’ हैं। यह अलग बात है कि विदेशों में भारत की पहचान महात्मा गांधी से ही है। विदेशी मेहमानों को आज भी सबसे पहले राज घाट स्मारक पर ही ले जाया जाता है। तो क्या गांधी गलत थे, या दुनिया के लालची इरादे ही सही थे?

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