ब्रज मंडल की प्रकृति, यमुना तट, कुंज गलियों, मोरों, गायों और कृष्ण लीलाओं का सुंदर वर्णन अनेक लोकप्रिय भजनों और गीतों में मिलता है। “श्याम तेरी बंसी पुकारे,” “राधे राधे बरसाने वाली,” “मैया मोरी,” और “जय राधा माधव” जैसे भजन वृंदावन, बरसाना और गोकुल की आध्यात्मिक सुंदरता को जीवंत करते हैं। सूरदास और रसखान के पद विशेष रूप से प्रकृति का मार्मिक वर्णन करते हैं। कभी यह धरती बांसुरी की तान पर झूमती थी। यमुना किनारे कदंब की छांव थी। कुंडों में कमल खिलते थे। तालाब गांवों की धड़कन होते थे। आज उसी ब्रज मंडल में सुबह का पहला दृश्य क्या है? हाथों में बाल्टियां लिए महिलाएं। सूखे नलों के नीचे टकटकी लगाए बच्चे। और पानी के टैंकर के पीछे भागती भीड़...
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