सुबह अगर आंख खुलते ही जलन हो, जैसे किसी ने मिर्ची का स्प्रे मार दिया हो, गले में खराश चिपक जाए मानो कोई पुराना कर्ज़ वसूल करने आ गया हो, और फेफड़े ऐसे खांसें जैसे ईएमआई की आखिरी किस्त पर डिफॉल्ट हो गया हो, तो घबराइए मत! बधाई हो, आप ‘विकास-प्रदत्त ऑक्सीजन’ का मजा ले रहे हैं। गहरी सांस लीजिए, ये बदबू नहीं, बल्कि ‘सक्सेस की सिग्नेचर फ्रेग्रेंस’ है। मुफ्त की हवा है जी, और मुफ्त में जो मिले, वह सबसे प्रीमियम क्वालिटी का होता है, बस एक्सपायरी डेट चेक मत करना!
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