ताजा खबर : स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डाला भारत की प्रगति पर प्रकाश * एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को मिलेगा एआई कौशल प्रशिक्षण * ‘अग्नि-4’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण

कल्पना कीजिए, चुनावी मंच पर एक महिला नेता खड़ी होती है। वह सरकार से तीखे सवाल पूछती है। विपक्ष को चुनौती देती है। अपनी पार्टी का बचाव करती है। कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया का माहौल बदल जाता है। उसके तर्कों पर कम, कपड़ों पर ज्यादा चर्चा होने लगती है। उसकी नीतियों को छोड़कर उम्र, शादी, शक्ल और निजी जिंदगी की चीरफाड़ शुरू हो जाती है। बस, यहीं हमारी राजनीति का सबसे बदसूरत चेहरा दिखाई देता है...

Read More

दिल्ली के कोचिंग सेंटरों के बाहर खड़े युवाओं से पूछिए, “क्या कर रहे हो?” जवाब लगभग एक जैसा मिलेगा, “यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं।” “क्यों?” “देश की सेवा करनी है। समाज बदलना है। संविधान की रक्षा करनी है।”

Read More

15 जून 2005 को भारत ने अपने नागरिकों को सिर्फ एक नया कानून नहीं दिया था। उसने उन्हें एक ताकत दी थी। सवाल पूछने की ताकत। और उससे भी बड़ी बात, जवाब मांगने का कानूनी अधिकार...

Read More

​राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने महात्मा गांधी की हत्या क्यों की और इस संगठन पर लगातार प्रतिबंध क्यों लगते रहे? साथ ही, प्रतिबंध उतनी ही बार 'हटते' भी क्यों रहे? इमरजेंसी के दौरान आरएसएस ने इंदिरा गांधी को चिट्ठियां क्यों लिखीं? आरएसएस ने बाबरी मस्जिद क्यों गिराई? आरएसएस द्वारा किए जाने वाले सेवा कार्यों का क्या सबूत है? केरल और पश्चिम बंगाल में आरएसएस ने स्वयं को 'पीड़ित' दिखाने के लिए ख़ुद अपने स्वयंसेवकों की हत्या क्यों कराई? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अक्सर पूछे जाने वाले इन पांच सवालों के जवाब फिल्म 'आखिरी सवाल' में देने की कोशिश की गई है।

Read More

अक्सर यात्राएं हमें वह सच दिखा देती हैं जो नेताओं के भाषणों और अख़बारों के संपादकीयों में नहीं मिलता। हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर मिलने वाले अनजान सहयात्री कई बार समाज का सबसे सटीक आईना साबित होते हैं...

Read More

अमेरिका सपनों की धरती है। कम-से-कम विज्ञापन यही कहते हैं। वहां सपने डॉलर में आते हैं और कभी-कभी उनकी ईएमआई जिंदगीभर चुकानी पड़ती है।

Read More

क्या भारतीय राजनीति एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है? क्या दलबदल अब महज़ अवसरवाद नहीं, बल्कि सत्ता के बड़े खेल का सबसे असरदार हथियार बन गया है...

Read More

आजकल बड़े शहरों में चमचमाती ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों की जिंदगी बदल गई है। ग्रेनाइट, शीशे और एयर-कंडीशनर से सजे इन आलीशान घरों में अब सूरज निकलने के बाद आराम से सोना लगभग गुनाह समझा जाता है...

Read More



Latest On Apunkacareer.com

लोकतंत्र में जब नया खून नहीं आता है, तो पुरानी नसों में जंग लगने लगती है। वही चेहरे, वही नारे, वही वादे और वही कुर्सी की दौड़। देश की राजनीति आज कुछ ऐसी ही थकी हुई दिखाई देती है...

Read More

Latest On Mediabharti.com

Picture it. A woman walks onto a public stage. She questions the government. She takes on her opponents. She defends her party without flinching.

Read More

Latest On Kadahi.com

ब्लूबेरी और जामुन अक्सर एक जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में ये दो बिल्कुल अलग-अलग फल हैं। ब्लूबेरी उत्तरी अमेरिका की देन हैं। जो कि छोटे, गोल और हल्की खटास के साथ मीठापन लिए होते हैं। इन्हें ‘सुपरफूड’…

Read More