मान भी लें कि कुछ गलत तत्व मीडिया में दाखिल हो चुके हैं, और कई एक्टिविस्ट सूचनाधिकार का दुरुपयोग करते हैं, तो क्या समूची बिरादरी को कटघरे में खड़ा करना उचित है? वकालत में, डाक्टरी में, न्यायिक व्यवस्था में, राजनीति में, सभी जगह ‘काली भेड़ें’ अमर्यादित कार्य कर रही हैं, लेकिन क्या पूरा सिस्टम दोषी है?
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