पेरिस की कक्षाओं से स्पेन की सड़कों तक, युवा बेहतर भविष्य मांग रहे हैं। भारत में कुछ युवा इस्तीफों, हंगामे और सियासी नौटंकी में क्यों उलझे हैं?
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Read Moreएक जमाना था सुबह का अखबार पढ़े बिना लोगों को चैन नहीं आता था। शाम को, ‘हम लोग’, या रविवार की सुबह ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ सीरियल देखे बगैर सो नहीं पाते थे। घंटों तक बच्चे टीवी से चिपके रहते थे। क्रिकेट मैच मोहल्लों को जोड़ देते थे। धारावाहिक घर-घर की बातचीत बन जाते थे। समाचार चैनल देश की राजनीतिक धड़कन तय करते थे। मीडिया सिर्फ सूचना का माध्यम नहीं था, वह सामाजिक संस्कृति का हिस्सा था। और अब...
Read Moreसाल 1987 में रिलीज और राज एन सिप्पी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ का गीत ‘दिल में हो तुम...’ को बप्पी लाहिरी के संगीत, फारूक कैसर के बोल और अलग-अलग गायकों की आवाजों ने एक खास पहचान दी।
Read Moreजम्मू-कश्मीर का दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र धीरे-धीरे कनेक्टिविटी के एक नए युग की ओर अग्रसर हो रहा है। उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक ने घाटी को भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ दिया है। इस परियोजना का प्रमुख आकर्षण चिनाब पुल है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल है।
Read Moreबेटे ने अपनी ही मां को गोली मार दी। भाई खेत के टुकड़े के लिए एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। बुजुर्ग मां फ्लैट के एक कोने में पड़ी रही, जैसे घर का कोई बेकार सामान। एक युवा प्रोफेशनल अकेलेपन से टूटकर आत्महत्या की कोशिश कर बैठा। यह किसी अपराध फिल्म की पटकथा नहीं है बल्कि यह बदलते भारत की भयावह सामाजिक तस्वीर है। वही भारत, जिसने कभी पूरे उत्साह से ‘हम दो, हमारे दो’ का नारा अपनाया था...
Read Moreसाल 1994 में रिलीज हुई फिल्म ‘इम्तहान’ का गीत ‘इस तरह आशिकी का...’ की खासियत केवल इसका रोमांटिक अंदाज नहीं है, बल्कि इसके दो अलग-अलग संस्करण भी हैं। एक संस्करण अमित कुमार ने गाया, जबकि दूसरे को कुमार सानू ने अपनी आवाज दी। दोनों संस्करणों का इस्तेमाल फिल्म में अलग-अलग किरदारों पर किया गया...
Read Moreयूरोप की चमचमाती सड़कें, साफ-सुथरी नदियां, शानदार इमारतें और समय पर दौड़ती ट्रेनें देखकर मन खुश हो जाता है। लगता है, बस यहीं बस जाएं! लेकिन, जैसे ही जेब से पैसे निकलने शुरू होते हैं, सपनों की दुनिया में महंगाई का भूत नाचने लगता है। खूबसूरती अपनी जगह है, मगर जिंदगी चलाने का खर्चा देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। आखिर यह कैसी तरक्की है, जहां कमाई लाखों में और बचत कौड़ियों में रह जाती है?
Read Moreहाल ही में, आगरा के एक घाट पर जो हुआ, वह कोई संयोग या महज़ दुर्भाग्य नहीं था। जन्मदिन मनाने आए छह युवा यमुना में उतरे। दो घंटे तक उन्हें बचाने की कोशिशें चलती रहीं, लेकिन अंततः चार बच्चों के शव बाहर निकाले गए। आए दिन ये दुर्घटनाएं हो रही हैं। पुलिस ने घाटों पर होर्डिंग लगाए हैं, सावधान किया है, पर लोग हैं कि मानते नहीं। वाकई, परिवारों का दुख शब्दों से परे है। वही यमुना, जिसके किनारे हमारी आस्था, इतिहास और सभ्यता सांस लेती आई है, आज मौत की गवाह बनती जा रही है...
Read Moreहिंदी फिल्मों के कुछ गीत ऐसे हैं, जिन्हें सुनते हुए आंखों के सामने पहाड़ों की हरियाली, झरनों का संगीत और प्रेम में डूबे दो दिलों की तस्वीर उभरने लगती है। साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्यासा सावन’ का गीत ‘इन हसीं वादियों से दो चार नजारे...’ ऐसा ही एक गीत है। इसमें प्रकृति की सुंदरता को केवल देखने की वस्तु नहीं, बल्कि प्रेम के अनुभव का हिस्सा बनाया गया है। विशाल आकाश से कुछ सितारे चुरा लेने और खूबसूरत वादियों से कुछ नजारे अपने साथ ले जाने की कल्पना गीत को एक सहज रोमांटिक रंग देती है...
Read Moreक्या होगा जब किसी पार्क में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार हो और इंसाफ की मांग का शोर चंद मिनटों में तुकबंदी के मुकाबले में बदल जाए? जरूर, पुलिस से जवाब मांगे जाने चाहिए, अफसरों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और बेटियों की हिफाजत सुनिश्चित होनी चाहिए। लेकिन, दिल्ली में एक गंभीर वारदात के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे नारे छा गए, मानो इंसाफ की लड़ाई नहीं, कोई हास्य कवि सम्मेलन चल रहा हो!
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28 वर्षीय युवक, उदय नाथ पीठ पर भारी बैग लटकाए ट्रैफिक चीरता भाग रहा है। बिहार से आया रमेश चौधरी चार मंज़िल सीढ़ियाँ चढ़कर राशन का सामान पहुंचा रहा है। उधर, हलवाई की दुकान के बाहर बाबू लाल मोबाइल स्क्रीन…
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The song ‘Is Tarah Aashiqui Ka...’ from the 1994 film 'Imtihaan' is special not only for its romantic appeal but also for its two distinct versions. One was sung…
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Makhana, or fox nut, has emerged as a fast-growing agri-food product in India. This is due to its nutritional value, rising health awareness, and increasing global demand.
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