ताजा खबर : स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डाला भारत की प्रगति पर प्रकाश * एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को मिलेगा एआई कौशल प्रशिक्षण * ‘अग्नि-4’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण

पिछले कुछ दिनों में तिब्बती प्रतिनिधिमंडलों ने कर्नाटक के नेताओं से मुलाकात की है। बेंगलुरु में नवनिर्वाचित तिब्बती सांसद चोप्पेल ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात कर शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकारी सहायता मांगी। उन्होंने कर्नाटक में बसे तिब्बतियों की समस्याओं पर भी ध्यान देने की अपील की...

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कल्पना कीजिए, चुनावी मंच पर एक महिला नेता खड़ी होती है। वह सरकार से तीखे सवाल पूछती है। विपक्ष को चुनौती देती है। अपनी पार्टी का बचाव करती है। कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया का माहौल बदल जाता है। उसके तर्कों पर कम, कपड़ों पर ज्यादा चर्चा होने लगती है। उसकी नीतियों को छोड़कर उम्र, शादी, शक्ल और निजी जिंदगी की चीरफाड़ शुरू हो जाती है। बस, यहीं हमारी राजनीति का सबसे बदसूरत चेहरा दिखाई देता है...

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दिल्ली के कोचिंग सेंटरों के बाहर खड़े युवाओं से पूछिए, “क्या कर रहे हो?” जवाब लगभग एक जैसा मिलेगा, “यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं।” “क्यों?” “देश की सेवा करनी है। समाज बदलना है। संविधान की रक्षा करनी है।”

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15 जून 2005 को भारत ने अपने नागरिकों को सिर्फ एक नया कानून नहीं दिया था। उसने उन्हें एक ताकत दी थी। सवाल पूछने की ताकत। और उससे भी बड़ी बात, जवाब मांगने का कानूनी अधिकार...

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​राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने महात्मा गांधी की हत्या क्यों की और इस संगठन पर लगातार प्रतिबंध क्यों लगते रहे? साथ ही, प्रतिबंध उतनी ही बार 'हटते' भी क्यों रहे? इमरजेंसी के दौरान आरएसएस ने इंदिरा गांधी को चिट्ठियां क्यों लिखीं? आरएसएस ने बाबरी मस्जिद क्यों गिराई? आरएसएस द्वारा किए जाने वाले सेवा कार्यों का क्या सबूत है? केरल और पश्चिम बंगाल में आरएसएस ने स्वयं को 'पीड़ित' दिखाने के लिए ख़ुद अपने स्वयंसेवकों की हत्या क्यों कराई? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अक्सर पूछे जाने वाले इन पांच सवालों के जवाब फिल्म 'आखिरी सवाल' में देने की कोशिश की गई है।

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अक्सर यात्राएं हमें वह सच दिखा देती हैं जो नेताओं के भाषणों और अख़बारों के संपादकीयों में नहीं मिलता। हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर मिलने वाले अनजान सहयात्री कई बार समाज का सबसे सटीक आईना साबित होते हैं...

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अमेरिका सपनों की धरती है। कम-से-कम विज्ञापन यही कहते हैं। वहां सपने डॉलर में आते हैं और कभी-कभी उनकी ईएमआई जिंदगीभर चुकानी पड़ती है।

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क्या भारतीय राजनीति एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है? क्या दलबदल अब महज़ अवसरवाद नहीं, बल्कि सत्ता के बड़े खेल का सबसे असरदार हथियार बन गया है...

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लोकतंत्र में जब नया खून नहीं आता है, तो पुरानी नसों में जंग लगने लगती है। वही चेहरे, वही नारे, वही वादे और वही कुर्सी की दौड़। देश की राजनीति आज कुछ ऐसी ही थकी हुई दिखाई देती है...

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How many times must a woman speak before the system listens? How many headlines must scream before a powerful man is made to answer for an alleged sexual crime?

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मखाना भारत में तेजी से उभरता हुआ कृषि-खाद्य उत्पाद बन गया है। इसका कारण इसका पोषण मूल्य, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और वैश्विक मांग में वृद्धि है।

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