ताजा खबर : स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डाला भारत की प्रगति पर प्रकाश * एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को मिलेगा एआई कौशल प्रशिक्षण * ‘अग्नि-4’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण

अमेरिका सपनों की धरती है। कम-से-कम विज्ञापन यही कहते हैं। वहां सपने डॉलर में आते हैं और कभी-कभी उनकी ईएमआई जिंदगीभर चुकानी पड़ती है।

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क्या भारतीय राजनीति एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है? क्या दलबदल अब महज़ अवसरवाद नहीं, बल्कि सत्ता के बड़े खेल का सबसे असरदार हथियार बन गया है...

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आजकल बड़े शहरों में चमचमाती ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों की जिंदगी बदल गई है। ग्रेनाइट, शीशे और एयर-कंडीशनर से सजे इन आलीशान घरों में अब सूरज निकलने के बाद आराम से सोना लगभग गुनाह समझा जाता है...

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वरुण धवन ‘गोविंदा’ बनने की कोशिश क्यों करते हैं? यह सवाल इसलिए दिलचस्प है क्योंकि वरुण धवन के करियर को ध्यान से देखें तो जवाब उनकी अभिनय क्षमता में नहीं, बल्कि उनकी अभिनय-शैली के चुनाव में छिपा हुआ दिखाई देता है।

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राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के नाम पर परिवारों, खासकर बेटियों को निशाना बनाना लोकतंत्र नहीं, सामाजिक पतन का संकेत है।

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कुछ दिन पहले दक्षिण भारत के एक छोटे शहर में दीप कुमार जो एक स्वयंसेवी संगठन चलाते हैं, से मुलाकात हुई। मोदी की वजह से उनके द्वारा दलित उत्थान के कार्य में मुश्किलें आएंगी। उनकी चिंता है कि 30-40 लोगों के स्टाफ को कहां से सैलरी देंगे, कैसे वाहन चलेंगे। दीप कुमार के जैसे अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं को फॉरेन कंट्रीब्यूशन कानून में संशोधनों से बहुत वेदना है, आक्रोश है...

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सूचना का अधिकार कानून कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार माना जाता था। इसे जनता की आंख और कान कहा गया। उम्मीद थी कि सरकारी फाइलों में छिपे सच बाहर आएंगे और अफसर जवाबदेह बनेंगे। लेकिन, आज तस्वीर बदलती दिख रही है। कई जगह आरटीआई जनहित का नहीं, बल्कि निजी फायदे, ब्लैकमेल और उगाही का औजार बन चुकी है। कानून की आड़ में कुछ लोगों ने पूरा कारोबार खड़ा कर लिया है...

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साल 1455 में जब योहानेस गुटेनबर्ग ने चल अक्षरों वाली मुद्रण मशीन का आविष्कार किया, तब शायद उन्हें भी अंदाज़ा नहीं था कि एक दिन किताबें छापना इतना आसान हो जाएगा कि हर लेखक स्वयं का प्रकाशक बन सकेगा। गुटेनबर्ग के छापाखाने ने ज्ञान को राजमहलों और मठों की दीवारों से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाया। अब, लगभग साढ़े पांच सौ वर्ष बाद, स्व-प्रकाशन उसी क्रांति को एक नए मुकाम पर ले गया है।

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India has changed dramatically since this question was first raised decades ago. Universities have multiplied, technology has transformed workplaces and the economy has grown at a much faster pace.…

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The Partition of 1947 remains one of the deepest wounds in Indian history. Millions were displaced. Countless families were torn apart. The flames of violence and hatred engulfed the subcontinent.…

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ब्लूबेरी और जामुन अक्सर एक जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में ये दो बिल्कुल अलग-अलग फल हैं। ब्लूबेरी उत्तरी अमेरिका की देन हैं। जो कि छोटे, गोल और हल्की खटास के साथ मीठापन लिए होते हैं। इन्हें ‘सुपरफूड’…

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