किसी भी मुल्क की सियासत में बदलाव ज़रूरी है, लेकिन हर बदलाव बेहतर हो, यह ज़रूरी नहीं। कभी-कभी जो व्यवस्था मुश्किलों के बावजूद स्थिर हो गई हो, उसे अचानक बदलना खुद एक बड़ा जोखिम बन जाता है। भारत के लिए 2014 के बाद का दौर इसी सवाल को बार-बार उठाता है। क्या निरंतरता को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया जाए कि बदलाव आकर्षक लगता है...
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