साल 2014 में दो करोड़ नौकरियां हर साल देने का वादा कहां गया? क्या हमारी नदियां सचमुच साफ हो गईं? क्या शहर स्मार्ट हो गए या सिर्फ स्मार्ट बोर्ड लग गए? भ्रष्टाचार कम हुआ या हमने उसके साथ जीना सीख लिया? और बारह साल बाद आखिर वादे और डिलीवरी के बीच कितनी दूरी तय हुई? ये किसी विश्वविद्यालय के शोध के सवाल नहीं हैं। ये वे सवाल हैं जो लोग चाय की दुकानों पर, घरों में, दफ्तरों में और रेलवे प्लेटफॉर्म पर पूछते हैं...
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