यूरोप जीतने निकले थे। कुछ ही दिनों के बाद पता चला कि यूरोप जीतना तो दूर, अपने घुटनों को मनाना ही बड़ी जीत है।
Read Moreयूरोप जीतने निकले थे। कुछ ही दिनों के बाद पता चला कि यूरोप जीतना तो दूर, अपने घुटनों को मनाना ही बड़ी जीत है।
Read Moreकुछ फिल्में अपनी कहानी, प्रस्तुति और तकनीकी खूबियों के कारण दर्शक को बांध लेती हैं, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाती हैं कि अगर इसके कुछ किरदारों के लिए कलाकारों का चुनाव अलग होता तो क्या यह फिल्म कहीं ज्यादा प्रभावशाली हो सकती थी? ‘मैं वापस आऊंगा’ ऐसी ही फिल्म है। इसमें एक मजबूत कहानी, शानदार संपादन और कई प्रभावशाली अभिनय क्षण मौजूद हैं, लेकिन इसकी कास्टिंग कई जगह फिल्म की संभावनाओं को सीमित करती दिखाई देती है...
Read More26 सितंबर से 10 अक्तूबर तक पितृ पक्ष है। यह कहानी किसी घाट से शुरू होकर वहीं ख़त्म नहीं होती है बल्कि यह सात देशों से होकर गुज़रती है और आख़िर में लौटकर आपके ही घर पर रुकती है।
Read Moreकुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं, जिन्हें सुनते हुए लगता है जैसे समय ठहर गया हो। जैसे, किसी पुराने महल की दीवारों में सदियों से कैद कोई प्रेमकथा अचानक सांस लेने लगी हो। जैसे, किसी विरहिणी के दिल में दबे हुए आंसू सुर बनकर बाहर आ गए हों। और, जैसे, संगीत के सामने राजसत्ता, वैभव और दुनिया की तमाम चकाचौंध छोटी पड़ गई हो।
Read Moreआखिर कोई देश दिल्ली की एक कॉलोनी से भी छोटा होकर अपना राजकुमार, अपनी सरहदें, अपनी हुकूमत और इतना राष्ट्राभिमान कैसे रख सकता है कि उसका झंडा भी कभी-कभी शरमा जाए...
Read Moreईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान मीरवाइज उमर फारूक से हुई मुलाकात ने भारत की कूटनीति और कश्मीर की राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। किसी ईरानी राष्ट्रपति का भारत की राजधानी में कश्मीर के एक प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक चेहरे से मिलना निश्चित रूप से सामान्य घटनाक्रम नहीं माना जा सकता है। इसके बावजूद, इस मुलाकात को केवल कश्मीर के नजरिए से देखना शायद ईरान की मौजूदा कूटनीतिक रणनीति को पूरी तरह समझने में मदद नहीं करेगा...
Read Moreझरना गरज रहा था। नाव झूम रही थी। और, तभी एक सीढ़ी ने हमारे घुटनों के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया! हम स्विट्ज़रलैंड के शाफहाउज़ेन के पास शानदार राइन फॉल्स देखने आए थे। सोचा था शांतिपूर्ण नाव की सैर होगी। लेकिन, देखते-देखते यह सफर रोमांच, सीढ़ियों की चढ़ाई, यातायात की उलझन और आखिर में बचाव अभियान में बदल गया। और इस पूरे अभियान में हमारे साथ थीं, लेडी मार्था, चाय और समोसे!
Read Moreकई दशकों तक, ग्रामीण स्वच्छता देशभर में विकास से जुड़ी एक लगातार बनी रहने वाली चिंता का विषय रही। 2014 में जब स्वच्छ भारत मिशन शुरू हुआ, तब स्वच्छता कवरेज 39 प्रतिशत था। 2019 तक, ग्रामीण भारत ने 100 प्रतिशत स्वच्छता कवरेज हासिल कर लिया। 2014 और 2019 के बीच 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10.28 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए। इसके बाद 2019 में ग्रामीण भारत को 'खुले में शौच से मुक्त' घोषित किया गया। इस उपलब्धि ने भारत में स्वच्छता के परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। अब ध्यान सिर्फ घरों में शौचालय की सुविधा देने से हटकर, स्वच्छता के तौर-तरीकों को लंबे समय तक बनाए रखने और गांव के स्तर पर कचरा प्रबंधन जैसे व्यापक मुद्दों पर केंद्रित हो गया...
Read Moreब्रसेल्स में छात्र सड़क पर उतर आए और हम भारतीय पर्यटक टॉयलेट की तलाश में उतर गए। यूरोप में शिक्षा महंगी हो रही है। भारत में भी शिक्षा पर राजनीति गरम है। और दोनों के बीच एक बेचारा पर्यटक खड़ा है, जिसे सिर्फ एक मुफ्त टॉयलेट चाहिए। यही है आज का ग्लोबल विलेज! ब्रसेल्स में छात्र कह रहे हैं, “पढ़ाई हमारा हक है।” दिल्ली के कॉकरोच कह रहे हैं, “हम भी यहीं हैं!” और भारतीय पर्यटक पूछ रहा है, “भाई, टॉयलेट किधर है?
Read Moreहमारी आरामदेह टूरिस्ट बस ने एक ही दिन में फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड के किनारे पार किए। रात तक हम जर्मनी के फ्रैंकफर्ट पहुंच चुके थे। न टैंक, न सैनिक, बस कैमरा, नाश्ता, गूगल मैप और उत्सुक भारतीय वरिष्ठ नागरिकों का एक जत्था...
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A 28‑year‑old Uday Nath, a heavy bag slung over his shoulder, weaves through traffic toward Defence Colony. Ramesh Choudhary, who came from Bihar, climbs four flights of stairs to deliver groceries.…
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We climbed into a boat that cheerfully ignored personal space and took us remarkably close to Europe’s largest waterfall by sheer volume, the Rhine Falls near Schaffhausen, Switzerland. The closer…
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Makhana, or fox nut, has emerged as a fast-growing agri-food product in India. This is due to its nutritional value, rising health awareness, and increasing global demand.
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