ताजा खबर : वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारत के इस्पात क्षेत्र में नियमित रूप से वृद्धि जारी रही * मुंबई का जवाहर द्वीप भारत का पहला प्लास्टिक-मुक्त ऑयल टर्मिनल बना * भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू और कश्मीर में खुफिया जानकारी आधारित ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर कमांडर मूसा को मार गिराया

भारत की अंतरिक्ष यात्रा 1963 में केरल के थुम्बा से लॉन्च किए गए एक साउंडिंग रॉकेट के साथ जो शुरू हुई थी, वह अब एक प्रस्तावित 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' की ओर मुखातिब हो रही है। नई अंतरिक्ष  प्रौद्योगिकियां इस प्रगति को गति दे रही हैं। इनमें पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान, इलेक्ट्रिक, ग्रीन और परमाणु प्रणोदन, और इन-ऑर्बिट सर्विसिंग सभी शामिल हैं...

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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को चुनौती आखिर देगा कौन? चुनावी रणभेरी बजने से पहले ही सियासी गलियारों में यह सवाल गूंजने लगा है। न कोई बड़ा जनाक्रोश दिख रहा है, न विरोधियों के हाथ कोई ऐसा मुद्दा नजर आता है, जिस पर सत्ता-विरोधी लहर खड़ी हो सके...

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जयपुर में कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां पहुंचकर लगता है कि इतिहास केवल किताबों के पन्नों में दर्ज घटनाओं का नाम नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव है। आमेर का किला ऐसा ही एक स्थान है। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा यह दुर्ग दूर से ही अपनी भव्यता से आकर्षित करता है। पहाड़ी की ढलान पर फैली मजबूत प्राचीर, ऊंचे दरवाजे और बलुआ पत्थर से बनी दीवारें उस दौर की याद दिलाती हैं, जब स्थापत्य कला केवल सुंदरता का माध्यम नहीं, बल्कि सत्ता, सुरक्षा और प्रतिष्ठा का प्रतीक भी हुआ करती थी...

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यह नेताओं को क्या हो गया है? लोकतंत्र में सवाल उठते हैं, दलीलें दी जाती हैं और सरकारों को कठघरे में खड़ा किया जाता है। मगर भारतीय सियासत का नया तमाशा देखिए! यहां मुद्दों की जगह मुहावरों ने ले ली है। नीतियों की जगह निजी हमले हैं। बहस की जगह बदजुबानी का बाजार गर्म है। ऐसा लगता है कि संसद और चुनावी मंचों के बीच कहीं कोई कुश्ती का अखाड़ा खुल गया है। फर्क बस इतना है कि पहलवानों की जगह नेता हैं और तालियां बजाने वालों में जनता के साथ टीवी कैमरे भी शामिल हैं।

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एक ही दिन भारत की अर्थव्यवस्था की दो ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो विकास और आर्थिक विषमता के बीच मौजूद गहरी खाई पर सोचने को मजबूर करती हैं। देश का सबसे बड़ा आईपीओ जियो प्लेटफॉर्म्स शेयर बाजार में दस्तक देता है और पहले ही दिन अपने इश्यू मूल्य से करीब 21 फ़ीसदी की बढ़त के साथ सूचीबद्ध और दिन के अंत में करीब 27 फीसदी तक पहुंचकर निवेशकों के लिए उत्साह का कारण बनता है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र के नांदेड़ में ₹10 हजार के कथित कर्ज से जुड़ा किसान चंद्रकांत शिंदे का मामला सामने आता है। इस मामले में परिवार ने हत्या का आरोप लगाया है और पुलिस ने हत्या तथा अपहरण का मामला दर्ज किया है। इस घटना को, फिलहाल, आत्महत्या का मामला कहना उचित नहीं होगा, लेकिन तुलनात्मक रूप से एक बेहद छोटी रकम से जुड़ा यह विवाद ग्रामीण आर्थिक असुरक्षा की गंभीरता पर सवाल जरूर खड़ा करता है। 

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बॉलीवुड की फिल्मों में भगवान के प्रति आस्था को अक्सर प्रार्थना, भजन और समर्पण के जरिए व्यक्त किया जाता रहा है, लेकिन कुछ दृश्य ऐसे भी हैं, जिनमें नायक अपने आराध्य के सामने सिर झुकाने के बजाय उनसे सवाल करते हैं। वे अपने दुख का कारण जानना चाहते हैं, अपने साथ हुए अन्याय का हिसाब मांगते हैं और कभी-कभी भगवान को ही अपने उलाहनों के घेरे में खड़ा कर देते हैं। हिंदी सिनेमा में ऐसे दो दृश्य खास तौर पर याद आते हैं। एक है फिल्म ‘दीवार’ में अमिताभ बच्चन का ‘आज खुश तो बहुत होगे तुम...’ वाला दृश्य और दूसरा है फिल्म ‘सुर संगम’ में गिरीश कर्नाड पर फिल्माया गया गीत ‘हे शिवशंकर...’। दोनों दृश्यों का अंदाज एकदम अलग है, लेकिन दोनों में भगवान शिव से शिकायत का भाव समान है...

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जब हर हाथ में मोबाइल हो, हर मोबाइल न्यूज़रूम बन जाए और हर सोशल मीडिया वाला खुद को पत्रकार बताने लगें, तो असली पत्रकार की पहचान कौन करेगा? क्या कैमरा उठाना ही काबिलियत है? क्या माइक पकड़कर चिल्लाने से पत्रकारिता आ जाती है? क्या किसी अफसर को धमकाकर ही प्रेस की धौंस जमाई जा सकती है? और क्या पत्रकार होने का दावा करते ही खास सुरक्षा और सुविधाओं का पट्टा मिल जाना चाहिए? सवाल तीखे हैं, मगर वक्त की जरूरत हैं।

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फिल्म ‘सुर संगम’ का ‘हे शिव शंकर...’ सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं है, बल्कि एक ऐसी संगीत यात्रा का अभूतपूर्व हिस्सा है जिसमें बनारस की शास्त्रीय परंपरा, मुंबई के फिल्म संगीत की दुनिया और एक असाधारण गायक की स्वाभाविक आवाज एक जगह आकर मिलती है। इस गीत को सुनते हुए सबसे पहले जो बात मन को पकड़ती है, वह है पंडित राजन मिश्र की आवाज। उसमें भक्ति की विनम्रता है, शास्त्रीय गायकी की गंभीरता भी और सुरों पर ऐसी पकड़ भी, जो गीत को एक सामान्य फिल्मी भजन की सीमा से बहुत आगे ले जाती है...

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जब से बड़बोले डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में दोबारा डेरा जमाया है, दुनिया की शामत आई हुई है। लगता है, तीसरा विश्व युद्ध बस ट्रंप की अगली पोस्ट का इंतज़ार कर रहा है। अब तक तीन-चार बार दुनिया बारूद के ढेर पर बैठते-बैठते बची है। ट्रंप की जुबान मिसाइल है, दिमाग मौसम विभाग और फैसले ऐसे कि सुबह का शेर शाम को भीगी बिल्ली बन जाए...

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साल 1985 में रिलीज हुई फिल्म ‘मोहब्बत’ का लता मंगेशकर की आवाज में सजा गीत ‘नैना ये बरसे...’ प्रेम की उस स्थिति को व्यक्त करता है, जब दिल किसी के इंतजार में डूबा हो और परिस्थितियां चाहकर भी दो प्रेमियों को एक-दूसरे के करीब नहीं आने देती हैं...

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