ताजा खबर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया सोमनाथ मंदिर में कुंभ अभिषेक * ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने पर सशस्त्र बलों को सलाम * भारत का कुल समुद्री खाद्य निर्यात ₹72,000 करोड़ के उच्चतम स्तर पर पहुंचा

एक तरफ़ देश में एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और डिजिटल क्रांति की नई इबारत लिखी जा रही है। दूसरी तरफ़ समाज का एक बड़ा हिस्सा अब भी सदियों पुराने पूर्वाग्रहों और सामंती सोच की जंजीरों में जकड़ा हुआ है...

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पिछले एक दशक में भारत की पहचान सिर्फ एक बड़े डिजिटल बाजार की नहीं रही है, बल्कि वह दुनिया के सामने एक उदीयमान वैश्विक टेक-पावर बनकर उभरा है। पहले जहां भारत को केवल इंटरनेट प्लेटफॉर्म और डिजिटल सेवाओं के एक विशाल उपभोक्ता के रूप में देखा जाता था, वहीं आज हमारा देश अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वदेशी नवाचारों और दमदार स्टार्टअप इकोसिस्टम के दम पर पूरी दुनिया में तकनीक की दिशा तय कर रहा है...

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आह, गर्मी की छुट्टियां! यह वाक्य कभी आज़ादी की महक लेकर आता था। तीस-चालीस साल पहले भारत में पले-बढ़े बच्चों के लिए गर्मी की छुट्टियां कैलेंडर की तारीख़ नहीं, साल का सबसे बड़ा उत्सव होती थीं। स्कूल की आख़िरी घंटी बजते ही लगता था, मानो जेल का फाटक खुल गया हो। वे भी क्या दिन थे...

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उनके लिए युद्ध एक खेल था। वे आए, धमाकेदार आतिशबाजी की, बम, मिसाइल, ड्रोन खूब चले, हजारों मरे, रिहाइशें तबाह हुईं, हवा जहरीली हुई, तापमान बढ़ा, समुद्र खौला, जंगल नष्ट हुए। वे तो गए। मानसून की चाल बिगड़ गई। अब भुगतो...

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रात के अंधेरे में शहर डराते नहीं; डर तब लगता है, जब उजाले में इंसानियत खोने लगे। डर तब लगता है, जब किसी अस्पताल की कतार में खड़ी बीमार मां को पीछे धकेलकर कोई सीना तानकर कहे, "जानते नहीं, मैं कौन हूं?

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साल 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा ज़ख्म है। लाखों लोग बेघर हुए। अनगिनत परिवार बिछड़ गए। नफ़रत की आग में पूरा उपमहाद्वीप झुलस गया। आज भी उस दौर की कहानियां सुनकर रूह कांप उठती है...

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ब्लॉकबस्टर फिल्मों ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर : द रिवेंज’ की शानदार सफलता के बाद अभिनेता राकेश बेदी अब सोनू त्यागी की बहुप्रतीक्षित आध्यात्मिक वेब सीरीज ‘टू ग्रेट मास्टर्स’ में मेजबान की भूमिका निभाते नजर आएंगे।

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कभी घर सिर्फ ईंट और छत नहीं होते थे, यादों के गोदाम होते थे। उन यादों की रखवाली करते थे, कई भारी-भरकम ट्रंक और खनखनाते कनस्तर...

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मेघालय के मॉसिनराम में बारिश से भीगी एक सुबह, बंशैलंग मारबानियांग पहाड़ियों पर छाए काले बादलों को देख रहे थे। बारिश लगातार हो रही थी, जैसा कि दुनिया की सबसे ज़्यादा बारिश वाली इस जगह पर अक्सर होता…

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