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क्या भारत की हजारों छोटी नदियों को अपनी पहचान खोकर कूड़े के नीचे दब जाने, सीवर में बदल जाने या अतिक्रमण की चादर ओढ़ लेने दिया जाएगा? यह सवाल अब केवल पर्यावरणविदों का ही नहीं रहा, बल्कि देश के भविष्य, जल-सुरक्षा और सभ्यतागत अस्तित्व का भी बन चुका है...
क्या उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था योगी आदित्यनाथ के शासन में वाकई में सुधरी है, या शांति सिर्फ बंदूक की नोक पर थोप दी गई है...
कभी 'खिलाड़ी', 'बाजीगर', 'सोल्जर', 'अजनबी' और 'हमराज' जैसी 'कल्ट' फिल्में देने वाले वाले अब्बास-मस्तान को 'किस किसको प्यार करूं' जैसी फिल्में बनाते देखने से दिल को बहुत दर्द होता है। इतना ही नहीं, दोबारा 'किस किसको प्यार करूं2' जैसी फिल्म बनाने की क्या मजबूरी रही होगी, समझ से बाहर है...
डोनाल्ड ट्रंप को इतिहास में कभी कोई महान जनरल नहीं मानेगा। लेकिन, जंग की व्याकरण बदलने वालों में उनका नाम जरूर दर्ज होगा। उन्होंने बता दिया है कि अब लड़ाई के लिए बंदूक ज़रूरी नहीं है। न रणभूमि, न धुएं से भरा आसमान, बस टैरिफ़, ट्वीट, धमकी और तमाशा…
भारत की विदेश नीति आज एक ऐसे डायमंड क्रॉसिंग पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां रास्ते एक ही दिशा में नहीं जाते, बल्कि कई ओर खुलते हैं। यहां रिश्ते जकड़े हुए नहीं हैं बल्कि लचीले हैं, और फैसले विचारधारा से ज़्यादा कौमी हितों पर आधारित हैं। बदलती और बेचैन दुनिया में भारत ने किसी एक खेमे में बंधने के बजाय अपने लिए खुली राह चुनी है...
भारत में प्रौद्योगिकी का भविष्य एक सरल लेकिन प्रभावशाली विचार ‘एआई का लोकतंत्रीकरण’ द्वारा संचालित है। भारत का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल कुछ कंपनियों, संस्थानों या देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके बजाय, इसे इस तरह विकसित और उपयोग किया जाना चाहिए कि हर नागरिक को लाभ मिले, सार्वजनिक कल्याण और सामूहिक भलाई का समर्थन हो। मानवता के लिए एआई का यह विज़न प्रौद्योगिकीगत प्रगति में लोगों को केंद्र में रखता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि नवाचार समाज की सेवा करे, न कि इसके विपरीत...
कर्नाटक हाईकोर्ट का ताज़ा फैसला कोई साधारण कानूनी टिप्पणी नहीं है। यह शासन व्यवस्था की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट है। अदालत ने दो टूक शब्दों में स्वीकार किया है कि अवैध रेत खनन पर राज्य का कोई नियंत्रण नहीं बचा है। कानून थक चुका है। प्रशासन ने हथियार डाल दिए हैं। राजनीति ने आंखें मूंद ली हैं...
जब अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होने की खबर आई, तो बाज़ार की प्रतिक्रिया लगभग तुरंत दिखी। भारी टैरिफ़ के बोझ तले दबे हुए टेक्सटाइल निर्यातक, अचानक राहत महसूस करने लगे। गोकलदास एक्सपोर्ट्स और केपीआर मिल जैसे शेयर तेज़ी से ऊपर गए और अपर सर्किट तक पहुंच गए, क्योंकि निवेशकों को साफ़ दिख रहा था कि कम शुल्क का मतलब है, बेहतर मार्जिन, मज़बूत प्रतिस्पर्धा और अमेरिकी बाज़ार में विकास का रास्ता बिल्कुल साफ...
The Supreme Court’s latest directives on basic educational facilities deserve a loud welcome. At least someone in authority has acknowledged what millions of parents and students already know:…
Will India's thousands of small rivers be left to lose their identity, buried under garbage, turned into sewers, or taken over by illegal settlements? This question is no longer just for environmentalists.…
Scientists have discovered a simple yet effective method for detecting toxic molecules at incredibly low concentrations by exploiting the same phenomenon that causes coffee stains.