सावित्री देवी को वह शाम आज भी याद है जब उनकी बेटी ने किताब पढ़ते समय आंखें सिकोड़ना बंद कर दिया था। उत्तराखंड के एक छोटे से पहाड़ी गांव में वर्षों तक बारह साल की प्रिया मिट्टी के तेल की ढिबरी के सामने बैठकर पढ़ती थी। पीली, कांपती हुई लौ। धुएं से भरा कमरा। आंखों में जलन। कई बार तेल खत्म हो जाता और पढ़ाई भी। फिर, पिछले साल उनकी छत पर एक सौर पैनल लग गया...
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