एक बार जर्मनी की महान विचारक रोजा लेक्जेंबर के खिलाफ किसी ईर्ष्यालु ने अखबार में कुछ गलत अफवाहें छपवा दीं।

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महाराष्ट्र के मुरुड कस्बे में जन्मे महर्षि धोंडो केशव कर्वे को उनकी विद्वता तथा अमूल्य राष्ट्रसेवा के लिए याद किया जाता है। भारत में शिक्षा प्रसार के लिए उन्होंने उल्लेखनीय काम किया। उनकी इन्हीं सेवाओं के लिए साल 1958 में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया। अपनी देशसेवा के अतिरिक्त महर्षि अपनी वाक्पटुता के लिए भी अत्यंत प्रसिद्ध थे।

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प्रख्यात शिक्षाविद ईश्वर चंद्र विद्यासागर को भला कौन नहीं जानता है। उनके त्याग, परोपकार, न्यायप्रियता, क्षमाशीलता के किस्से काफी मशहूर हैं।

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प्रसिद्ध कला गुरु जामिनी रॉय अंतराष्ट्रीय स्तर के कलाकार थे। यद्धपि, उनकी ख्याति देश-विदेश के क्षितिज को छू रही थी लेकिन वह प्रसिद्धि और दिखावे से कोसों दूर रहते थे। वह किसी भी समारोह या गोष्ठी में नहीं जाते थे। उनके समकालीनों का कहना है कि वह शायद ही कभी कलकत्ता से बाहर गए हो।

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बेंजामिन फ्रैंकलिन का जीवन उपलब्धियों की एक अजीब गाथा है। शिक्षा हो या साहित्य, प्रकाशन हो या व्यवसाय, शासन या खोज, हर क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां महान हैं।

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मैडम क्यूरी की बेटी आइरीन क्यूरी भी बचपन से ही बड़ी कुशाग्र बुद्धि की थी। मां के संरक्षण में उन्होंने पेरिस के रेडियम इंस्टीट्यूट में शिक्षा प्राप्त की थी। साल 1918 में जब वह रेडियम इंस्टीटयूट की सदस्य बनीं तब उसकी उम्र मात्र 21 वर्ष थी।

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