विज्ञान / तकनीक / गैजेट्स

दोहरे रूप से कार्य करने में सक्षम छिद्रपूर्ण ग्राफीन कार्बन नैनोकम्पोजिट इलेक्ट्रोड पर आधारित एक उच्च-वोल्टेज सुपरकैपेसिटर विकसित किया गया है। यह सौर पैनलों जैसे अनुप्रयोगों के लिए अधिक स्थिर सुपरकैपेसिटर बनाने में सहायक हो सकता है। साथ ही, यह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ी हुई रेंज और तेज त्वरण प्रदान कर सकता है...

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सतत ऊर्जा भंडारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में शोधकर्ताओं ने एक नवीन कैथोड सामग्री विकसित की है जो जलीय जिंक-आयन बैटरी के प्रदर्शन और स्थिरता को नाटकीय रूप से बढ़ाती है...

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भारत में प्रौद्योगिकी का भविष्य एक सरल लेकिन प्रभावशाली विचार ‘एआई का लोकतंत्रीकरण’ द्वारा संचालित है। भारत का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल कुछ कंपनियों, संस्थानों या देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके बजाय, इसे इस तरह विकसित और उपयोग किया जाना चाहिए कि हर नागरिक को लाभ मिले, सार्वजनिक कल्याण और सामूहिक भलाई का समर्थन हो। मानवता के लिए एआई का यह विज़न प्रौद्योगिकीगत प्रगति में लोगों को केंद्र में रखता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि नवाचार समाज की सेवा करे, न कि इसके विपरीत...

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एक जाने-माने सेल्फ-असेंबलिंग बैक्टीरियल शेल प्रोटीन की नई खोजी गई सेमीकंडक्टर प्रॉपर्टी सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रॉनिक्स का रास्ता खोल सकती है - मोबाइल फोन और स्मार्ट घड़ियों से लेकर चिकित्‍सा उपकरणों और पर्यावरण संबंधी सेंसर तक…

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एक पनडुब्बी अनजाने समंदर की गहराइयों में उतरती है, वो भी 1870 में, जब बैटरी नाम की चीज़ बस एक तजुर्बा भर थी। एलियन तीन पैरों वाली डरावनी मशीनों से हमला करते हैं, और वही कल्पना इंसानों को चांद तक ले जाने वाले रॉकेट की प्रेरणा बन जाती है। बिजली से ‘ज़ॉम्बी’ को ज़िंदा करने की कहानी, आज अस्पतालों में दिल बचा रही है...

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इस वर्ष भारतीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में राजस्व के $280 बिलियन का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है। वर्ष 2035 तक एआई भारत की अर्थव्यवस्था में $1.7 ट्रिलियन जोड़ सकता है।

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