विज्ञान / तकनीक / गैजेट्स

भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा 1990 के दशक की शुरुआत में ‘परम 8000’ से विकसित होकर आज एक राष्ट्रीय परितंत्र में बदल गई है। माह सितंबर तक 40 सुपर कंप्यूटरों द्वारा 68 पेटाफ्लॉप्स, यानी, काफी तेज गणना देने के साथ, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग तक विस्तार किया जा रहा है।

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सेमीकंडक्टर आधुनिक प्रौद्योगिकी के आधारभूत घटक और आर्थिक शक्ति की नींव हैं। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, दूरसंचार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा और उन्नत विनिर्माण को शक्ति प्रदान करते हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 5जी/6जी, डेटा सेंटर और स्वायत्त वाहनों जैसी प्रौद्योगिकियां भी चिप्स की मांग को लगातार बढ़ा रही हैं...

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भारत में अब सिर्फ यह नहीं पूछा जा रहा है कि वह चिप बना सकता है या नहीं बल्कि अब सवाल यह है कि चिप बनाने के आसपास की पूरी व्यवस्था कितनी तेजी से तैयार की जा सकती है। यानी, चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों के साथ-साथ उनकी डिजाइनिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण, सप्लाई चेन और उनसे जुड़े दूसरे उद्योग भी भारत में कितनी तेजी से विकसित हो सकते हैं।

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पिछले एक दशक में भारत की अंतरिक्ष यात्रा ‘विश्वास, विकास और जनकल्याण’ की भावना को प्रतिबिंबित कर रही है। भारत दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों में उभरकर सामने आया है। इस अवधि की प्रमुख उपलब्धियों में चंद्रयान-3 का चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतरना, आदित्य-एल1 का सौर मिशन तथा गगनयान और राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारियां शामिल हैं...

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एक दशक पहले, भारत के बिजली उत्पादन में सौर ऊर्जा का हिस्सा बहुत छोटा था। आज, यह देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती है। वर्ष 2014 में  लगभग तीन गीगावाट की स्थापित क्षमता से, इस क्षेत्र का विस्तार पचास गुना से भी अधिक हुआ है, और यह 30 जून तक 162.15 गीगावाट तक पहुंच गया...

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देश का अंतरिक्ष क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का प्रक्षेपण इस परिवर्तन का प्रतीक है...

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पिछले एक दशक में भारत की पहचान सिर्फ एक बड़े डिजिटल बाजार की नहीं रही है, बल्कि वह दुनिया के सामने एक उदीयमान वैश्विक टेक-पावर बनकर उभरा है। पहले जहां भारत को केवल इंटरनेट प्लेटफॉर्म और डिजिटल सेवाओं के एक विशाल उपभोक्ता के रूप में देखा जाता था, वहीं आज हमारा देश अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वदेशी नवाचारों और दमदार स्टार्टअप इकोसिस्टम के दम पर पूरी दुनिया में तकनीक की दिशा तय कर रहा है...

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दोहरे रूप से कार्य करने में सक्षम छिद्रपूर्ण ग्राफीन कार्बन नैनोकम्पोजिट इलेक्ट्रोड पर आधारित एक उच्च-वोल्टेज सुपरकैपेसिटर विकसित किया गया है। यह सौर पैनलों जैसे अनुप्रयोगों के लिए अधिक स्थिर सुपरकैपेसिटर बनाने में सहायक हो सकता है। साथ ही, यह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ी हुई रेंज और तेज त्वरण प्रदान कर सकता है...

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सतत ऊर्जा भंडारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में शोधकर्ताओं ने एक नवीन कैथोड सामग्री विकसित की है जो जलीय जिंक-आयन बैटरी के प्रदर्शन और स्थिरता को नाटकीय रूप से बढ़ाती है...

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भारत में प्रौद्योगिकी का भविष्य एक सरल लेकिन प्रभावशाली विचार ‘एआई का लोकतंत्रीकरण’ द्वारा संचालित है। भारत का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल कुछ कंपनियों, संस्थानों या देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके बजाय, इसे इस तरह विकसित और उपयोग किया जाना चाहिए कि हर नागरिक को लाभ मिले, सार्वजनिक कल्याण और सामूहिक भलाई का समर्थन हो। मानवता के लिए एआई का यह विज़न प्रौद्योगिकीगत प्रगति में लोगों को केंद्र में रखता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि नवाचार समाज की सेवा करे, न कि इसके विपरीत...

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