हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा ने इस जगत की रचना की है। लेकिन, इसे कुदरत की एक अजीब विडंबना ही कहा जाएगा कि पुराणों में उनकी न तो पूजा करने का कोई विशेष विधान है और न ही उनके नाम का कोई खास मंदिर।

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पठान कुल में जन्मे रसखान को माता पिता का स्नेह व सुख वैभव सभी कुछ उपलब्ध था। एक बार कहीं भगवत कथा का आयोजन हो रहा था। व्यास गद्दी पर बैठे कथा वाचक भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन कर रहे थे।

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वास्तविकता यह है कि दुनिया में कोई भी धर्म किसी से लड़ना नहीं सिखाता है। आज हम अपने चारों ओर देखें तो ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं, जो सभी धर्मों का सम्मान करने के विचारों का संप्रेषण करते हों।

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पूरी दुनिया में धर्म और जाति के नाम पर तमाम लड़ाई-झगड़े और बड़े-बड़े युद्ध होते रहे हैं। स्वतंत्र भारत में भी आजादी के साथ-साथ धर्म के नाम पर हुए बंटवारे के बाद से ही हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच एक चौड़ी खाई बनने लगी थी।

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राम मंदिर निर्माण में 167 साल लग गए। इस दौरान कई बार संघर्ष के दौरान हिंसा हुई। बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के हित में फैसला किया।

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चौरासी कोस परिक्रमा के तहत राजस्थान की सीमा में आने वाले इस स्थान से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद गांव विलोंद के निकट एक पर्वत पर भगवान केदारनाथ शेषनाग रूपी एक विशाल श्वेत पत्थर की चट्टान के नीचे छोटी से गुफा में विराजमान हैं।

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