धर्म, कला और संस्कृति

भारत में त्योहार कई रूपों में आते हैं, लेकिन उनसे जुड़ी भावनाएं बहुत जानी-पहचानी होती हैं। गणेश चतुर्थी पर बप्पा को घरों और मोहल्लों में लाया जाता है। दुर्गा पूजा पंडालों को भक्ति और कलात्मकता से भर दिया जाता है। दिवाली दीयों की चमक, प्रार्थनाओं और नई शुरुआत को लेकर आती है। छठ परिवारों को घाटों पर एक साथ लाती है, जहां सूर्य देव को अर्घ्य और प्रार्थनाएं की जाती हैं। आस्था, परिवार और समुदाय में रचे-बसे ये उत्सव उन स्थानों से भी गहराई से जुड़े हैं जहां ये मनाए जाते हैं...

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त्योहार खुशियां लाते हैं। वे लोगों को जोड़ते हैं और रिश्तों में मिठास घोलते हैं। लेकिन, जब भक्ति का वॉल्यूम इतना बढ़ जाए कि पूरा मोहल्ला परेशान हो जाए, तो सवाल उठना लाज़िमी है...

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हिंदू धर्म में ऐसी कई धार्मिक यात्राओं का उल्लेख मिलता है, जिनके बारे में माना जाता है कि जीवन में एक बार इन्हें पूरा करने पर किसी भी व्यक्ति को मोक्ष या मृत्यु के बाद भगवान का धाम मिलता है। साथ ही, उस यात्रा का फल आगे आने वाली कई पीढ़ियों को भी मिलता रहता है। ऐसी ही एक यात्रा है किन्नौर कैलाश की...

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भारत में अनेक मंदिर अपनी अद्भुत विशेषताओं और पौराणिक कथाओं के कारण श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। इनमें से एक है गुजरात के भावनगर जिले के पास कोलियाक तट पर स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति और समुद्र से जुड़ी अद्भुत घटनाओं के कारण भी विशेष स्थान रखता है...

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सुबह की ठंडी हवा में घंटियों की आवाज गूंजती है। दूर तक युवाओं के जत्थे दिखाई देते हैं। किसी के कंधे पर कांवड़ है, कोई नंगे पांव परिक्रमा कर रहा है, तो कोई दोस्तों के साथ भजन गाते हुए पहाड़ चढ़ रहा है। मोबाइल जेब में है, सेल्फी भी चल रही है और भगवान का नाम भी। यही भारत की नई तीर्थयात्रा है...

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इंदौर स्थित बड़े गणेश मंदिर की स्थापना साल 1901 में हुई थी। इसके बाद, धीरे-धीरे इंदौर का जिस तरह से विकास हुआ, उसके साथ इस मंदिर की ख्याति भी बढ़ी। जो भक्त भगवान खजराना गणेश के दर्शन करने के लिए इंदौर आते हैं, वे बड़े गणेश के भी दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं...

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देश में भगवान शिव को समर्पित एक ऐसा भी मंदिर है, जहां महादेव के दर्शन करने मात्र से ही सभी पापों से मुक्ति मिलती है। गुजरात के द्वारका धाम से 17 किलोमीटर बाहरी क्षेत्र की ओर यह मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि नागेश्वर मंदिर के रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती नाग-नागिन के रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए इसे नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। देशभर में शिव के बारह ज्योतिर्लिंग हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का दसवां स्थान है...

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दुनिया में ब्रज की होली का डंका बज रहा है। सरकार लगातार होली को प्रचारित प्रसारित कर रही है। होली की व्यवस्थाओं को व्यापक बनाया जा रहा है। होली पर ब्रज में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इसका दूसरा पहलू यह है कि ब्रजवासी लगातार होली से दूर हो रहे हैं।

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सांवरिया सेठ मन्दिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। किंवदंती यह है कि वर्ष 1840 में, भोलाराम गुर्जर नाम के एक दूधवाले ने बागुंड गांव के छापर में तीन दिव्य मूर्तियों के भूमिगत होने का सपना देखा था। उस स्थान को खोदने पर वहां भगवान कृष्ण की तीन सुंदर मूर्तियां मिलीं, जैसा कि सपने में देखा गया था...

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भारत में नृत्य महज मनोरंजन का साधन नहीं रहा है, बल्कि यह आत्मा की ज़बान भी रहा है। मंदिरों की देहरी से लेकर राजदरबारों तक, गांव की चौपाल से लेकर बड़े रंगमंच तक, नृत्य ने भाव, राग और रस की परंपरा को ज़िंदा रखा है...

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