क्या हम ताज महल को बचा रहे हैं, या धीरे-धीरे उसे धूल, धुंध और धुएं में दफ़न कर रहे हैं? आगरा की हवा साल के अधिकांश दिनों में ज़हरीली रहती है...
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क्या हम ताज महल को बचा रहे हैं, या धीरे-धीरे उसे धूल, धुंध और धुएं में दफ़न कर रहे हैं? आगरा की हवा साल के अधिकांश दिनों में ज़हरीली रहती है...
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तीन विश्व धरोहर स्मारक और लगभग आधा दर्जन अलग आकर्षणों को अपनी गोद में रखे आगरा शहर एक अजीब उलझन में फंसा दिखता है। यह शहर न तो हेरिटेज सिटी बन पाया और न ही स्मार्ट सिटी, आज आगरा की पहचान ‘जाम नगरी’ की बन चुकी है...
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सुबह की पहली किरण ताज महल पर पड़ने से पहले ही आगरा के लोग अपने घरों से निकलते हैं। लेकिन अब उनकी पहली चिंता ट्रैफिक नहीं, बल्कि सड़क पर खड़े या दौड़ते जानवर होते हैं। दयालबाग, कमला नगर, शाहगंज, ताजगंज, सिकंदरा, बल्केश्वर और ट्रांस यमुना कॉलोनियों तक एक जैसा मंजर दिखाई देता है...
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आगरा दुनियाभर में ताज महल की बेमिसाल ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता है। रोज़ हज़ारों सैलानी संगमरमर में तराशी मोहब्बत का दीदार करने आते हैं। लेकिन, पर्यटकों की चहल-पहल से ज़रा हटकर, एक और कारोबार चुपचाप फल-फूल रहा है; नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक लैब, निजी अस्पताल और दवा मार्केट नेटवर्क...
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अगर ताज महल एक सुबह खामोश हो जाए, तो क्या आगरा भी चुप पड़ जाएगा? जवाब है “नहीं”। तब शायद पहली बार यह शहर अपनी असली आवाज़ में बोलेगा, कारीगरों की हथौड़ी की टन-टन, बाजारों का मोल-भाव, हलवाइयों की कड़ाही की खुशबू और शायरों की नज़्मों के बीच। ताज महल आगरा का ताज है, लेकिन आगरा सिर्फ ताज नहीं, यह एक चलती-फिरती सभ्यता है...
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आगरा की इमारतें सिर्फ़ ईंट, पत्थर और गुम्बद नहीं हैं। ये सदियों से चली आ रही एक कहानी है, हुकूमत की, ख़ूबसूरती की, आस्था की और फ़ितरत से तालमेल की। पांच सौ सालों में आगरा ने अलग-अलग तहज़ीबों के असर को अपने भीतर समेटा और उन्हें अपनी खास पहचान में ढाल दिया।
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