पर्यावरण / मौसम

क्या हमारी नदियां अब सिर्फ नक्शों में बचेंगी? या फिर हम उन्हें सच में “राष्ट्रीय संपत्ति” मानकर बचाने की जद्दोजहद करेंगे?

Read More

अब मौसम भरोसे के क़ाबिल नहीं रहा। सचमुच आसमान ने अपनी ज़ुबान बदल ली है। मौसम अब वैसा नहीं रहा, जैसा हमने बचपन में जाना था। कभी हल्की-फुल्की बारिश होती थी, अब वही आफ़त बनकर टूट पड़ती है। कभी गर्मी बस तपिश देती थी, आज वही जानलेवा लू बन जाती है...

Read More

सुबह अगर आंख खुलते ही जलन हो, जैसे किसी ने मिर्ची का स्प्रे मार दिया हो, गले में खराश चिपक जाए मानो कोई पुराना कर्ज़ वसूल करने आ गया हो, और फेफड़े ऐसे खांसें जैसे ईएमआई की आखिरी किस्त पर डिफॉल्ट हो गया हो, तो घबराइए मत! बधाई हो, आप ‘विकास-प्रदत्त ऑक्सीजन’ का मजा ले रहे हैं। गहरी सांस लीजिए, ये बदबू नहीं, बल्कि ‘सक्सेस की सिग्नेचर फ्रेग्रेंस’ है। मुफ्त की हवा है जी, और मुफ्त में जो मिले, वह सबसे प्रीमियम क्वालिटी का होता है, बस एक्सपायरी डेट चेक मत करना!

Read More

दुनियाभर में जहां साफ पानी और शौचालय की कमी है, वहां असमानता और बढ़ती है, और सबसे ज्यादा बोझ महिलाओं पर पड़ता है...

Read More

नल खुलता है। पानी गिरता है। हम चैन की सांस लेते हैं। लेकिन ज़मीन के नीचे? सन्नाटा है। सूखी दरारें हैं। और एक डर है, जो धीरे-धीरे हमारे भविष्य को खा रहा है...

Read More

बीते 9 अप्रैल को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने ‘आरोग्य वन’ पहल शुरू की। राजमार्गों के किनारे अब औषधीय पेड़ों के जंगल उगेंगे। सफ़र होगा, और साथ में सेहत का पैग़ाम भी मिलेगा। सड़कें दौड़ती थीं। अब पेड़ भी साथ दौड़ेंगे। हवा में सिर्फ़ धूल नहीं, शिफ़ा की ख़ुशबू भी होगी। अब ज़रा पीछे चलते हैं।

Read More



Mediabharti