अपने प्रियतम से जुदा होने के बाद हमसफर द्वारा कोई पैगाम तक न भेजे जाने के बाद के भावों को प्रकट करती हुई कुमार आकाश की एक शानदार कविता पेश है।

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जज्बातों का तूफान इधर भी होता है और उधर भी, लेकिन कोई इन जज्बातों के इजहार की जिद करता है तो कोई रुसवाई के डर से इन्हें छुपाने के लिए मिन्नतें करता है। कुमार आकाश की यह कविता कुछ ऐसे ही भाव दर्शाती है।

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रोज कमाने और खाने वाले लोग शहरों को छोड़कर अपने गांवों की ओर निकल पड़े हैं। ऐसे में युवा कथाकार सविता पांडे की ये तीन लघु कथाएं परिस्थितियों का बहुत खूबसूरत चित्रांकन करती हैं।

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देश में कोरोना संकट के चलते लोग अपने घरों में बंद हो गए हैं। लोग अपने दोस्तों व परिजनों से मिल नहीं पा रहे हैं। प्रेमी और प्रेमिकाओं का मिलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में युवा कथाकार सविता पांडे की ये तीन लघु कथाएं परिस्थितियों का बहुत खूबसूरत चित्रांकन करती हैं।

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बंकिमचंद के दोस्त दीनबंधु मित्र बड़े विनोदी स्वभाव के थे और कभी-कभी उनसे भी विनोद करने से न चूकते थे।

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हिन्दी के मूर्धन्य कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को साहित्य जगत का सिरमौर बनाने में अकेले कलकत्ता के सेठ महादेव प्रसाद मतवाला का जो योग है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

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