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... बिहार में राजनीतिक सरगर्मियां अब अपने चरम पर हैं। ऐसे में वहां का माहौल अब कैसा है, यह जानने के लिए सुनें वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल की कविता स्वयं उनकी जुबानी...

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क्या कच्चतीवू मामला श्रीलंका के साथ संघर्ष की वजह बन सकता है? इस मामले का भारत और श्रीलंका के संबंधों पर पड़ने वाले असर के बारे में बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल।

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गठबंधन के बावजूद, दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एकदूसरे को नीचे की ओर खींचने में लगे हुए हैं और इसका पूरा फायदा पहले से ही बहुत ज्यादा मजबूत भारतीय जनता पार्टी को मिलना तय है।

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लोकसभा चुनावों के बाद बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हाल क्या होगा..., बता रहे हैं प्रख्यात राजनीतिक टिप्पणीकार पारस नाथ चौधरी...

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प्रशांत किशोर एक बेहतरीन विश्लेषक हैं लेकिन क्या वह कोई राजनीतिक आंदोलन खड़ा करने की कुव्वत रखते हैं…, बता रहे हैं प्रख्यात राजनीतिक टिप्पणीकार पारस नाथ चौधरी।

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इस बार के लोकसभा चुनावों के दौरान बिहार में मुस्लिम-यादव गठजोड़ कितना कामयाब हो सकता है, बता रहे हैं प्रख्यात राजनीतिक टिप्पणीकार पारस नाथ चौधरी।

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राजनीतिक रूप से बिहार में बीते पांच साल काफी उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। इस दौरान बिहार की जनता ने नीतीश कुमार की बीजेपी व राजद जैसे विपरीत स्वभाव वाले दलों के साथ सरकारें देखीं। लेकिन, मौजूदा समय में बिहार में एक नए तरह का 'आशावाद' दिखाई दे रहा है।

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कच्चतीवू मामले से एक तरफ जहां राष्ट्रवादी राजनीति को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी, वहीं स्थानीय तमिल राजनीति को एक जोरदार झटका भी लग सकता है। इस मामले का तमिल राजनीति पर पड़ने वाले असर के बारे में बता रहे हैं, वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल।

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इंदिरा गांधी द्वारा कच्चतीवू द्वीप को श्रीलंका के हवाले कर दिए जाने व बांग्लादेश के साथ हुए सीमावर्ती गांवों के लेन-देन समझौते में क्या अंतर है, तथा मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इस मामले में उपलब्ध विकल्प और इस मसले को उठाने के पीछे उनकी मंशा के बारे में बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल।

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इंदिरा गांधी द्वारा कच्चतीवू द्वीप श्रीलंका को दे दिए जाने की पूरी कहानी बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल। ब्रज खंडेलवाल देश के वह पहले पत्रकार हैं, जिन्होंने कच्चतीवू को श्रीलंका के हवाले किए जाने के विरोधस्वरूप सबसे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

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