पर्यटन

भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन पटरी पर उतार दी है। यह ट्रेन सबसे स्वच्छ ईंधन हाइड्रोजन का उपयोग करके स्वयं बिजली उत्पन्न करती है। उपयोग के समय इससे लगभग शून्य उत्सर्जन होता है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों को चलाने के तरीके में हुए विकास का एक नया अध्याय है, जो कोयले और भाप से स्वच्छ, अधिक टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर भारत की व्यापक यात्रा को दर्शाता है...

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भारतीय रेल स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी विश्व स्तर पर जीवाश्म ईंधन-आधारित कर्षण प्रणालियों के एक आशाजनक विकल्प के रूप में उभरी है। हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली स्वदेशी ट्रेन इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक स्वचालित इंजन है जो चलायमान रहते हुए हाइड्रोजन का उपयोग करके अपनी बिजली उत्पन्न करता है। 17 जुलाई को उद्घाटन के साथ, हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन का परिचालन शुरू हो गया। यह उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत खंड पर चलेगी।

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भारत में रेलवे की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को बॉम्बे और ठाणे के बीच चलने वाली पहली यात्री ट्रेन के साथ हुई थी। शुरुआती स्टीम इंजन से अपनी यात्रा शुरू करते हुए, रेलवे ने मार्च 2026 तक ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है।

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कोसी नदी के तट पर, जहां दशकों से लोग बाढ़, अलगाव और लंबे चक्करों से जूझ रहे हैं, एक नया सपना साकार हो रहा है। 13.3 किलोमीटर लंबा भेजा-बकौर कोसी पुल अब निर्माण के अंतिम चरण में है...

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सोलह कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, लंबी दूरी की यात्रा में जाने वाले मुसाफिरों को ध्यान में रखकर बनाई गई है और इसमें अत्याधुनिक यात्री सुविधाएं मौजूद हैं...

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भारत के राजमार्ग योजना निर्माण से लेकर टोल संग्रह तक हर चरण के डिजिटलीकरण के साथ बदल रहे हैं। इससे उनका भौतिक और डाटा संचालित, दोनों तरह की संपदा में परिवर्तन हो रहा है। फास्टैग ने देश की इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को एक क्रांतिकारी स्वरूप दिया है। लगभग 98 प्रतिशत वाहन फास्टैग का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या आठ करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।

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