बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

कर्नाटक में मिली सफलता के बाद, उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब राज्य सरकार से सरकारी बसों में मुफ़्त यात्रा प्रदान करने का आग्रह कर रही हैं। महिला समूहों ने पूरे राज्य में यूपी राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ़्त यात्रा की मांग की है...

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साल 1947 में स्वतंत्रता मिलने पर बहुत से सेक्युलरवादियों ने सोचा था कि युगों से चला आ रहा विचारधाराओं का संघर्ष, ‘टू नेशन थ्योरी’ के जनक मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान मिलने के बाद समाप्त हो जाएगा। जिन्ना शुरू से ही कहते आए थे कि हिन्दू, मुस्लिम दो अलग राष्ट्र हैं, इसलिए विभाजन ही इस दम घोंटू स्थिति का एकमात्र समाधान है...

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कैसे ये तथ्य नजरअंदाज करें कि आबादी के नियंत्रण से आज भारत की सामाजिक आर्थिक व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, मध्यम वर्ग की जीवन शैली तथा शिक्षा स्तर काफी सुधरा है। स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है। साल 1952 में शुरू हुए परिवार नियोजन अभियान का प्रभाव अब दिखने लगा है। ऐसे में जनसंख्या वृद्धि का सुझाव कौन मानेगा?

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ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से उभरते पारिस्थितिक संकट के संदर्भ में बुनियादी मानव अधिकार के रूप में स्वच्छ हवा व पानी के अधिकार को शामिल करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। पुलिस को मानवीय बनाना और पर्याप्त सुधार लागू करना भी इस बुरे वक्त की मांग है। हर इंसान को स्वच्छ हवा व पेयजल तथा पूर्ण सुरक्षा मिले, ये प्रावधान मानव अधिकारों की सूची में प्राथमिकता के आधार पर जोड़े जाएं।

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बृज भूमि, खास तौर पर गोवर्धन और वृंदावन में हरियाली की भयावह गिरावट एक दुखद विडंबना को दर्शाती है। कभी हरे-भरे जंगलों, मैंग्रूव, पवित्र तालाबों और यमुना के शांत घाटों की जीवंत तासीर वाला यह क्षेत्र अब तेजी से हो रहे शहरीकरण की खूंखार पकड़ का शिकार हो रहा है। कृष्ण की बांसुरी की गूंज कंक्रीट की संरचनाओं के बढ़ने और पवित्र भूमि के निरंतर विकास के कारण, अब सुनाई नहीं देती है...

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वर्षों से चले आ रहे वकीलों के आंदोलन और निरंतर की जा रही मांगों के बावजूद, आगरा में उच्च न्यायालय पीठ स्थापित करने की फिलहाल कोई संभावना नहीं दिख रही है...

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