भारत जैसे खुले लोकतांत्रिक समाज में, मास मीडिया कई तरह की भूमिकाएं निभाता है। यह एक निगरानीकर्ता के रूप में कार्य करता है, सत्ता को जवाबदेह बनाता है, और सरकार और जनता के बीच एक पुल का काम करता है।
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बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।
भारत जैसे खुले लोकतांत्रिक समाज में, मास मीडिया कई तरह की भूमिकाएं निभाता है। यह एक निगरानीकर्ता के रूप में कार्य करता है, सत्ता को जवाबदेह बनाता है, और सरकार और जनता के बीच एक पुल का काम करता है।
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एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ब्यूटी टिप्स देने वाली मोहतरमा ने सलाह दी कि मुंहासों के लिए रात को टूथपेस्ट लगाकर सोएं। 15 वर्षीय बालिका माही ने कई रातों तक यह फॉर्मूला आजमाया, अब उसके चेहरे पर मुंहासों के गुच्छे निकल आए हैं...
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पूर्व की मुगल राजधानी आगरा ने अपनी महानगरीय भावना को बरकरार रखा है, जो इसके जीवंत क्रिसमस समारोहों में स्पष्ट है। हालांकि, ईसाई आबादी यहां कुछ कम हो गई है, लेकिन उत्सव का उत्साह मजबूत बना रहा। बीते कुछ समय से इसमें अब एक अलग स्थानीय स्वाद भी भर गया है...
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अन्याय और उपेक्षा का लगातार शिकार रहा है आगरा। दो बैलों की जोड़ी से लेकर साइकिल तक का सफर, लेकिन, अब तक माया मिली न राम...
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कभी गणित और ज्योतिष का केंद्र रहा भारत आज अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर इस विधा में तेजी से पिछड़ रहा है। किसी भी विद्यार्थी से पूछें तो सबसे ज्यादा भयभीत करने वाला विषय गणित ही निकलेगा। अब कोई रामानुजन नहीं बनना चाहता है, जबकि इंजीनियर, डॉक्टर या अकाउंटेंट बनने के लिए गणित का ज्ञान ही पहली सीढ़ी है...
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यदि दैनिक जीवन में बोले जानी वाली गंदी और अपमानजनक भाषा का उपयोग करने की बात करें तो शिक्षा, संस्कृति और सम्पन्नता कोई बंधन नहीं हैं...
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