बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

कुछ दिन पहले दक्षिण भारत में आयोजित एक शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में एक विद्वान ने मुझसे प्रश्न किया कि आगरा घराने की वर्तमान स्थिति क्या है, और कौन इसे संजो रहा है? मेरा उत्तर अज्ञानता और असहायता के बोझ से दबा हुआ था। यह प्रश्न एक बड़ी चिंता की ओर इशारा करता है कि कैसे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, विशेष रूप से आगरा घराना, आधुनिक समय में उपेक्षित हो रहा है...

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दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यमुना नदी की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने नदी की सफाई और शुद्धिकरण के लिए एक बड़ा कार्यक्रम प्राथमिकता के तौर पर शुरू करने का मन बना लिया है। इससे आगरा, मथुरा और वृंदावन समेत बृज मंडल के निवासियों में नई उम्मीद जगी है...

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गैर कानूनी अप्रवासियों के खिलाफ जो जंग छेड़ी है, उसके परिणामस्वरूप भारत समेत एक दर्जन देशों में खलबली मची हुई है। कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज करने के पश्चात सदियों से यह मुल्क रंग-बिरंगे लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा है। लेकिन, अब ऐसा लगने लगा है कि प्रवासियों के लिए अमेरिका जाना आसान नहीं होगा।

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आज, जबकि दुनिया गुलाबों और चॉकलेट के साथ ‘वैलेंटाइन डे’ मना रही है, तब ताजमहल का शहर आगरा मोहब्बत की नई परिभाषा और एक ऐसी दास्तां लिखना चाहता है जो क्षणभंगुर इशारों और व्यावसायिक दिखावों से परे है।

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भारतीय मीडिया आज़ादी के कई दशकों बाद तक, झूठा ही सही या दिखावे के लिए ही, विपक्ष की प्रभावी भूमिका निभाता रहा। बड़े-बड़े खुलासे हुए, सरकारें तक गिर गईं। कार्टूनिस्टों को भी नेताओं की खिंचाई के लिए खूब मौके मिलते थे। 1970 का दशक प्रेस की स्वतंत्रता का काला और स्वर्णिम युग था। आपातकाल के पहले और बाद में मीडिया ने आज़ादी का भरपूर उपयोग किया।

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हिंदी भाषा की बढ़ती लोकप्रियता और व्यापक स्वीकार्यता इस बात का प्रमाण है कि यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही है, बल्कि अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। हिंदी को भारत की लोक भाषा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली भाषा बनाने में साहित्यकारों, हिंदी संस्थानों और भाषा प्रेमियों का योगदान बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन जनसंचार माध्यमों, विशेष रूप से बॉलीवुड और टेलीविजन चैनलों की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता...

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