भारत को स्वतंत्रता यूं ही प्राप्त नहीं हुई है। अपने रक्त से असंख्य क्रांतिवीरों ने भारत माता का अभिषेक किया है। स्वतंत्रता का उद्देश्य सम्मुख रख वे हंसते-हंसते फांसी पर झूले हैं। वह दौर ही दूसरा था। गुलामी और अत्याचार के बीच न डिगने का संकल्प अटल था। यही संकल्प और अनथक प्रयासों की परिणति आज स्वतंत्र भारत के रूप में हमारे समक्ष है। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले ऐसे ही एक वीर थे... राजेंद्र नाथ लाहिड़ी..
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