‘सदभाव दिवस’ पर चिंतन
मथुरा। अयोध्या हादसे के चलते मौजूदा समय तक कलंकित होती आई देश -विदेश की तारीखों पर पुनर्मंथन किये बगैर मजबूत राष्ट्रनिर्माण कभी न हो सकेगा। यह समाधान डा. रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में अयोध्या हादसे के दिन सोमवार को गणेश धाम कॉलोनी स्थित संस्थान पर बैठक में सुझाया गया।
संस्थापक अध्यक्ष डा. सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि हादसे के 24 वर्षों बाद भी सामाजिक समरसता की स्थापना के मद्देनजर सरकार समेत जनता की ओर से ठोस कदम नहीं उठाये गये जिसके चलते राष्ट्रीय एकता की नई खाइयों को पाटा नहीं जा सका। आगे कहा कि देश का विभाजन विघटनकारी ताकतों की सबसे बड़ी मिसाल है जिसके खामियाजे दोनों देशों की गरीब जनता अब तक भुगत रही है। फिर भी ताज्जुब है कि आजादी के साथ हुई बरबादी से उबरने के लिए भारत समेत पाकिस्तान में नया नेतृत्व नहीं पनपने दिया गया। डा. शर्मा ने उम्मीद जताई कि मजबूत राष्ट्र निर्माएा के लिए अभी भी यदि अयोध्या हादसे से विभाजन तक की गलतियों पर पुनर्मंथन किया जाय तो राष्ट्रीय एकता के साथ दोनों देशों के संबंधों में सुधार के नये रास्ते खुल सकते हैं। इसी के साथ यह कोशिश न किये जाने पर देश के भविष्य पर खतरे मंडराते रहेंगे। इससे पूर्व उपस्थितों ने प्रार्थना से बैठक की शुरूआत की। तत्पश्चात् देश का होगा तभी विकास, याद करोगे जब इतिहास’ ‘मानव मात्र एक समान एक पिता की सब संतान’ नारों से आयोजन स्थल गूंज उठा। इस अवसर पर भूपेन्द्र सिंह, प्रो. धर्मचन्द विद्यालंकार, बब्लू भाटिया, नवीन उपाध्याय, गिरीश शर्मा, आशा मिनोचा, सुषमा गणेेश आदि उपस्थित थे।





