ईटानगर । अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बागी नेता कलिखो पुल मंगलवार सुबह अपने घर में फंदे से लटके पाए गए। कलिखो का शव उनके घर में पंखे से लटका हुआ था। एक कांग्रेस नेता ने बताया कि कलिखो ने खुदकुशी की है। अरुणाचल में बदले राजनैतिक हालात के बाद भी कलिखो मुख्यमंत्री आवास में ही रह रहे थे। माना जा रहा है कि कलिखो सीएम पद से हटाए जाने के बाद से ही अवसाद में थे।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने कलिखो की मौत की खबर पर अफसोस जताते हुए कहा, यह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि कलिखो पुल जैसे युवा नेता अब हमारे साथ नहीं हैं।
बता दें कि नबाम तुकी के नेतृत्व वाली सरकार से कांग्रेस के जिन विधायकों ने फरवरी में बगावत की थी, उस बागी गुट का नेतृत्व कलिखो ही कर रहे थे। कांग्रेस से बगावत कर कलिखो पुल फरवरी, 2016 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मदद से अरुणाचल प्रदेश में नौवें मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के जुलाई में आए आदेश के बाद उन्हें पद से हटना पड़ा था। बता दें कि दिसंबर में नबाम तुकी सरकार से बगावत करके कांग्रेस नेताओं का एक धड़ा अलग हो गया था। पुल इसकी अगुवाई कर रहे थे। 19 फरवरी को कलिखो पुल को राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व से असंतुष्ट कलिखो ने जब पार्टी से बगावत की, तो उनके साथ कांग्रेस के 19 बागी विधायक थे। सरकार गठित करने के लिए उन्हें भाजपा के 11 और 2 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन मिला था। कांग्रेस का आरोप था कि कलिखो के सहारे भाजपा सेंध लगाकर अरुणाचल पर काबिज होना चाहती है।
कलिखो के नेतृत्व में गठित सरकार को कांग्रेस ने अवैध ठहराया था। इसके खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। कांग्रेस को हालांकि सुप्रीम कोर्ट से उस समय कोई राहत नहीं मिली थी, लेकिन 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में पिछली कांग्रेस सरकार को बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही, 15 दिसंबर से पहले की स्थिति कायम रखने को कहा। सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के 11 घंटे के अंदर ही पुल के हाथ से सत्ता चली गई और नबाम तुकी फिर से मुख्यमंत्री पद पर काबिज हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में लगाए गए राष्ट्रपति शासन को अवैध करार दिया था। मगर कोर्ट ने साथ ही, नबाम तुकी सदन के फ्लोर पर विश्वास मत हासिल करने को भी कहा। भाजपा को एक ओर जहां कलिखो पुल और बागी विधायकों पर पूरा भरोसा था, वहीं आखिरी समय में कांग्रेस ने राजनैतिक दांव खेलते हुए नबाम तुकी को हटाकर पेमा खांडू को मुख्यमंत्री बना दिया। अधिकतर बागी विधायक चूंकि तुकी से असंतुष्ट थे, ऐसे में उन्हें हटाए जाने का फैसला कांग्रेस के पक्ष में गया और उसने सदन में बहुमत साबित कर दिया। इससे ना केवल भाजपा को, बल्कि कलिखो पुल को भी काफी बड़ा धक्का पहुंचा था। फिलहाल कलिखो की मौत के कारणों पर कुछ भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
साभार-khaskhabar.com






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