आगरा के दो दरोगाओं की शिकायत पर हुआ सपा नेता गिरफ्तार

तीन सौ लोगों से 300 करोड़ की ठगी

आगरा मथुरा समेत कई जनपदों के व्यापारी हुए शिकार

आगरा/मथुरा। तमाम उद्योग-धंधों की उच्च हस्तियों समेत पुलिस-प्रशासन, राजनीतिक लोगों व न्यायपालिका में भी अच्छी खासी पकड़ रखने वाले मथुरा के एक अरबपति मिठाई कारोबारी के दामाद एवं युवा व्यवसायी को आगरा की पुलिस ने 300 करोड़ की ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। मथुरा आगरा के अलावा अनेक जनपदों के व्यापारी हुए इस शातिर का शिकार, मथुरा और आसपास के जिलों में खासी चर्चा है।

एक करोड़पति परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस युवा व्यवसायी को अचानक पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने के पीछे 300 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन होना बताया जा रहा है। 

कभी अपने आपको प्रदेश के मुख्यमंत्री का नजदीकी बताकर तो कभी भारत में न्यूजीलैंड का उच्चायुक्त बन कर। जब भी वह अपने घर से निकलता महंगी कारों का काफिला संग होता। रुतबा ऐसा दिखाता कि क्या मंत्री और क्या अधिकारी सभी धोखा खा जाएं। पुलिस पूछताछ में शैलेन्द्र अग्रवाल ने कई चैंकाने वाले खुलासे किए हैं। मोबाइल एप के जरिए फेक कॉल कर अब तक वह लोगों को करीब 300 करोड़ का चूना लगा चुका है।

 

मथुरा के कुछ व्यापारियों ने दबी जुबान से इसकी पुष्टि की है। कृष्णानगर निवासी तथा एक इलैक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के एक प्रमुख व्यवसायी ने अपना करीब 10 लाख रुपया बकाया होने की बात स्वीकार की जबकि उनके जानकार ने उनका 10 लाख रुपये से कहीं अधिक उक्त युवा व्यवसाई के पास लगा होना बताया।

दूसरे कई व्यवसाइयों ने यह भी स्वीकार किया कि उक्त युवा व्यवसायी ने मथुरा से भी अनेक व्यापारियों से पैसा ले रखा है। मथुरा के व्यावसाईयों ने समय समय पर उसकी तलाश की लेकिन पता नहीं चला आखिर उन्होंने युवा व्यापारी का मथुरा छोड़ कर आगरा में कहीं रह रहा है जिसकी जानकारी किसी को नहीं थी। लोग तरह तरह के अनुमान लगा रहे थे कि देनदारी से बचने के लिए उसने लखनऊ में राजनीतिक शरण ले रखी है तो किसी का अनुमान है कि वह देश छोड़कर जा चुका है। लेकिन शनिवार को आगरा की पुलिस ने विभव नगर आगरा में आलीशान कोठी जो इस शातिर ने किराये पर ले रखी थी। पर अचानक छापा मारा वहां से उसे गिरफ्तार कर लिया।

लम्बे समय से राजनीतिक गलियारों में प्रभाव रखने वाले लेकिन संदिग्ध चरित्र के धनी इस युवा व्यवासायी का यह पहला मौका नहीं है जब उक्त युवा व्यवसायी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हुआ हो। बहुत पहले से वह विभिन्न कारणों से चर्चा में रहा है और उनमें पैसे के लेन-देन से उपजे विवाद भी हैं। अपने अरबपति ससुराल पक्ष से संबंधों के कारण भी वह हमेशा चर्चित रहा है।

यही कारण है कि ससुराल पक्ष के लोग उसकी किसी गतिविधि के बारे में कोई जानकारी नहीं देते हैं और न उसके बावत बात करना पसंद करते हैं।

क्योंकि मथुरा के पॉश एरिया डेम्पियर नगर से लेकर आस-पास के कई दूसरे जिलों से भी इस युवा व्यवसायी का कारोबारी एवं स्वजातीय रिश्ता है इसलिए आसानी से व्यापारियों को अपना निशाना बनाना उसकी आदत बन चुका है।

दरअसल इस युवा व्यवयायी ने अपने ससुराल पक्ष की तरह कई व्यापार-धंधों में हाथ-पांव फैला रखे हैं जिनमें जमीनी करोबार भी शामिल है। विनोद अग्रवाल के गायब होने पर उसकी जमीन कब्जाने वाला यह अरबपति कारोबारी कोई और नहीं, वही है जिसके दामाद के गिरफ्तार होने की चर्चा हो रही है।

आगरा के दो पुलिसवालों को दस लाख का चूना लगाने वाले सपा नेता शैलेंद्र की जालसाजी का शिकार उद्योगपतियों से लेकर पुलिस के तमाम अधिकारी तक हुए। बताया जा रहा है कि उसने सैकड़ों लोगों को जाल में फंसाया और उनके करोड़ों डकार गया। उसे शनिवार को सीजेएम कोर्ट ने 15 मई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। शैलेंद्र को शुक्रवार आधी रात विभव नगर स्थित किराये के आलीशान फ्लैट से डीआईजी की स्पेशल टीम ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ताजगंज थाने में पीडि़त व्यवसायियों का तांता लग गया।

शैलेन्द्र अग्रवाल की तलाशी में उसके फ्लैट से चार हार्ड डिस्क, कंप्यूटर, दो मोबाइल, कई सिम, आईपैड आदि बरामद हुए। जीआरपी में तैनात एसआई विजय सिंह चक की पत्नी श्वेता सिंह उर्फ रंजीता सिंह ने शैलेंद्र के खिलाफ ताजगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। दर्ज एफआईआर में उन्होंने कहा है कि शैलेंद्र ने उन्हें बताया था कि वह आलू का बड़ा कारोबारी है। आगरा, मथुरा, छिबरामऊ, फर्रुखाबाद में उसके कोल्ड स्टोर हैं। व्यापार में कई पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैसा लगा होने की बात कहते हुए उसने 35 फीसदी प्रतिवर्ष लाभ देने का झांसा दिया था। उन्होंने भरोसा करके पांच लाख रुपये जुटाकर उसे दे दिए। विजय सिंह के मित्र एसआई धीरजपाल ने भी कर्ज लेकर पांच लाख रुपये उसे दिए। शैलेंद्र ने जब पैसा व्यापार में नहीं लगाया तो उन्होंने वापस मांगा। इस पर उसने डीजीपी के सीयूजी नंबर से कॉल करके धमकी दी थी।

श्वेता ने बताया कि उनके अलावा एक रिटायर्ड डीआईजी, एसआई लक्ष्मण सिंह, यशपाल सिंह, जितेंद्र दीखित, छोटेलाल, कामता प्रसाद, दुष्यंत तिवारी और आरक्षी असित कुमार से भी शैलेंद्र ने काफी पैसा हड़पा है। इस मामले में शैलेंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट का मुकदमा दर्ज किया गया है।

मथुरा में शैलेन्द्र को आलू वाला के नाम से ही जाना जाता है और कई स्थानों पर आलू के कोल्ड स्टोर का कारोवार लम्बे समय से उसका परिवार करता चला आ रहा है। गोविन्द गंज में आलू की गददी भी हुआ करती थी। 

हर समय कड़ी सुरक्षा में रहने वाला शैलेंद्र आलू वाला लोगों को बताता था कि वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का क्लासमेट रहा है। उसके इसी तड़क-भड़क वाले रहन-सहन से लोग झांसे में आ जाते थे। उसने लोगों को मिड डे मील की पंजीरी का प्लांट लगाने, आलू व वारदाना ट्रेडिंग आदि में निवेश करने के नाम पर शहर के कई व्यापारियों से करोड़ों रुपये ले लिये, केदार नगर के रवि बंसल, विनय बंसल का कोल्ड स्टोर है। उन्होंने बताया कि तकरीबन 20 करोड़ रुपये शैलेंद्र पर फंसा हुआ है। पेट्रोल पंप व्यवसायी मनोज गोयल के मुताबिक उनके भी करोड़ों का बकाया हैं। शाम को दो और पीडि़त डीआईजी कार्यालय पहुंचे। एक व्यवसायी के 6.50 करोड़ रुपये, त्रिवेणी देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक के दस लाख रुपये, वीरी सिंह के दस लाख रुपये शैलेंद्र पर हैं। ये सभी पीडि़त डीआईजी लक्ष्मी सिंह से मिले। बताते हैं कि शहर के तीन सौ से अधिक लोगों का करोड़ों रुपये शैलेंद्र अग्रवाल पर है।

 

दरोगाओं से ठगी में हुआ गिरफ्तार

पुलिस ने विभव नगर में शुक्रवार देर रात छापा मार कर मथुरा के चर्चित सपा नेता शैलेंद्र अग्रवाल को उनके आवास से हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि उसने एक दरोगा से दस लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। पुलिस आरोपी को ताजगंज थाने लेकर आई, यहां देर रात तक पूछताछ की जा रही है। ये कार्रवाई डीजीपी के निर्देश पर की गई। बताते हैं, शैलेंद्र जमीनों के कारोबार से भी जुड़ा हुआ है। वह जमीन और आलू भंडारण के नाम पर सैकड़ों लोगों के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी कर चुका है। उसके खिलाफ जब तक शिकायतें मिलती रही हैं। मूल रूप से मथुरा का रहने वाला शैलेंद्र अग्रवाल लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़ा रहा है। पुलिस ने बताया कि शैलेंद्र ने जीआरपी में तैनात एसआई विजय सिंह चक और एसआई धीरज पाल से आलू भंडारण के नाम पर दस-दस लाख रुपया लिया और उन्हें आलू भंडारण में मोटा मुनाफा होने की बात कही थी। इस मामले में एसआई विजय सिंह चक ने लखनऊ में पुलिस महानिदेशक एके जैन से शिकायत की थी। बताया गया है कि मामले को गंभीरता से लेकर पुलिस महानिदेशक ने डीआईजी लक्ष्मी सिंह को उक्त सपा नेता के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके बाद ताजगंज थाने में दरोगा ने शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। शुक्रवार की देर रात को एएसपी सलमान ताज पाटिल, सीओ सदर असीम चैधरी समेत कई थानों की पुलिस ने शैलेंद्र के आवास को घेर लिया और उसे पकड़ लिया। उसके आवास पर भी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

इनकम टैक्स के एक उच्च अधिकारी की हत्या का मामला भी चला था।

आगरा में इनकम टैक्स के एक उच्च अधिकारी की हत्या में जा चुका है जेल। सपा नेता शैलेंद्र वर्ष 2005 में एक इनकम टैक्स अधिकारी के अपहरण और उसकी हत्या के मामले में भी पकड़ा जा चुका है। थाना न्यू आगरा से जुड़े इस मामले में उसे जेल भेजा गया था। यह मामला भी करोड़ों रुपयों के लेनदेन का बताया जाता है। 

 

नजदीकी रिश्तेदार के मथुरा स्थित होटल में पुलिस की पार्टी चल रही थी।

आगरा मंडल की पुलिस जब शैलेंद्र पर बड़ी कार्रवाई में जुटी थी ठीक उसी समय मथुरा से स्थानांतरित एक पुलिस अधिकारी की मथुरा के एक बड़े होटल में पार्टी चल रही थी। यह होटल शैलेंद्र के ससुराल पक्ष के रिश्तेदार का है और यहीं पर ऊपर से आदेश आते ही पुलिस की टीमें शैलेंद्र के घर दबिश के लिए रवाना कर दी गईं।

शाम सात बजे के बाद से ही पुलिस के अधिकारी विदाई समारोह का हिस्सा बनने मथुरा शहर के नामी होटल में एकत्र होने लगे थे। यहां पर लोग पार्टी का आनंद ले रहे थे कि आगरा से आई काल ने पुलिस को चैंका दिया। चूंकि होटल शैलेंद्र के रिश्तेदार का था लिहाजा कार्रवाई में पुलिस ने सतर्कता बरती। होटल मालिक को भनक भी न लगी और उसके रिश्तेदार शैलेंद्र के घर के पास पुलिस जमा होने लगी। इस कार्रवाई में पुलिस ने शैलेंद्र के घर के ठीक दस कदम की दूरी पर रात 10ः30 बजे ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। शैलेंद्र अग्रवाल के घर में पहुंचने से पहले ही पुलिस ने मथुरा म्यूजियम के पास इतनी ज्यादा चहलकदमी की कि पूरे डैंपियरनगर में लोगों में कानाफूंसी होने लगी कि आज कोई बड़ी कार्रवाई होन वाली हैै। मथुरा पुलिस ने औपचारिकता निभाते हुए शैलेंद्र के घर में छापेमारी तो की। लेकिन छापेमारी तब हुई जब शैलेंद्र के रिश्तेदार के होटल में पुलिस की पार्टी खत्म हो चुकी थी। पुलिस का यह रवैया पूरे दिन शहर में चर्चा का विषय बना रहा। 

 

आधी रात को डैंपियर नगर स्थित घर पर दी गई दबिश

आगरा के दो दरोगा और शहर के धनी लोगों से करोड़ों की ठगी कराने के मामले में आगरा डीआईजी के निर्देश पर मथुरा पुलिस ने देर रात शैलेन्द्र अग्रवाल के डैंपियर नगर स्थित आवास पर दबिश दी। एसपी देहात अजय कुमार के नेतृत्व में दी गई दबिश में सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी, कोतवाली प्रभारी, गोविंद नगर,

कृष्णानगर पुलिस व एलआईयू के लोग शामिल हुए। उसका मकान बंद मिला। एक कमरे का शीशा पुलिस को टूटा मिला। कमरे में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के पदनाम लिखी गाडि़यों पर लगाने वाली और गेट पर लटकाने वाली प्लेट मिली। कुछ नकदी मिलने की भी चर्चा है। 

एसएसपी मथुरा मंजिल सैनी बताया कि आगरा से अधिकारियों के निर्देश पर शैलेन्द्र अग्रवाल के डैंपियर नगर स्थित आवास पर दबिश दी गई थी। दबिश में कुछ खास नहीं मिला। उसके बारे में मथुरा से कुछ जानकारी भी मांगी गई थी, जानकारी जुटाई जा रही है।

 

शैलेंद्र को मिली हुई थी वाई श्रेणी से ज्यादा की सुरक्षा

शहर की कोतवाली क्षेत्र के डैंपियर नगर निवासी शैलेन्द्र अग्रवाल आलू वाला खुद को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय स्तर का नेता साबित करता रहा है। पहले उसके पास सपा व्यापार सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद था। लोगों पर हनक जताने के लिए उसने 11 गनर ले रखे थे। उसे यह सुविधा गनर की सैलरी की सिर्फ दस प्रतिशत अदायगी पर ही मिली थी। समाजवादी कुनवे के तमाम बडे़ नेताओं के साथ शैलेन्द्र की मौजूदगी आम लोगों में एक सन्देश देती थी जिसका लाभ लेकर उसने व्यापारी, उद्योगपति, अधिकारी, व पुलिस के तमाम अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को अपना निशाना बनाया।

मथुरा में बड़ी तेजी के साथ सुर्खियों में आया शैलेंद्र अग्रवाल वर्ष 2006 में सपा व्यापार सभा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बन बैठा। इसके बाद वह आगरा में रहने लगा। आगरा में रहने के दौरान उसने दो साल पूर्व अपने परिवारीजनों की सुरक्षा का हवाला देकर गनर देने के आदेश कराए। इसमें उसने अपने पिता मुरारीलाल, चाचा बनवारीलाल, भाई नितेन्द्र अग्रवाल और जमुना कोल्ड स्टोरेज के डायरेक्टर मनमोहन शर्मा के नाम से सुरक्षा का हवाला दिया। इसमें चार गनर मथुरा पुलिस लाइन से दिए गए। मथुरा की जनपदीय समिति से दो गनर और दो गनर डीआईजी आगरा की ओर से गठित मंडलीय समिति की संस्तुति पर दिए गए। हर तीन माह बाद उनका रिन्युअल किया जाता रहा है। 31 मार्च को समयावधि पूरी होने के बाद चार अप्रैल को मथुरा के चारों गनर वापस ले लिए गए। वहीं आगरा की पुलिस लाइन से उसने छह गनर लिए थे। यह गनर उसने अपने, पत्नी और अपने दो सचिव सहित परिवार के छह लोगों की सुरक्षा के नाम पर लिए। गनर को लेने के लिए उसने शासन से संस्तुति कराई। एक गनर कन्नौज की पुलिस लाइन से लिया गया था। 

गनर की संस्तुति के लिए शासन से डाला गया दवाव। 

शैलेन्द्र के प्रार्थना पत्रों को जनपद की स्थानीय समिति ने कई बार गनर न देने की संस्तुति की तो उसने लखनऊ से दबाव बनवाया। इसके लिए सचिवालय और सीएम कार्यालय से पत्र भी भेजे गए। 

 


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