ईश्वर को सर्वत्र न मानने वाला रहता है गलत कार्यों में लिप्त

मथुरा। मनुष्य जब यह मान लेता है कि ईश्वर सर्वत्र व्यापक है तो वह कभी गलत काम नहीं करता क्योंकि उसे डर रहता है कि ईश्वर उसे देख रहा है। हमेशा गलत कार्यों में वहीं संलिप्त होते हैं जो ईश्वर को सर्वत्र न मानकर स्थान विशेष पर मानते हैं। उक्त विचार रविवार को मसानी स्थित वेद मंदिर पर आयोजित सत्संग में वेद मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश महाराज ने व्यक्त किये। आचार्य ने सत्संग में आये श्रद्धालुओं से सायंकाल को प्रतिदिन बैठकर संध्या वंदन तथा दिन में किये कार्यों की समीक्षाकर, जो भूलवश गलत कार्य हो जाते हैं उनका पश्चाताप करने को कहा। उन्होंने कहा कि जितने भी सत्संगप्रेमी यहां आये हैं वह अपने बच्चों को भी सत्संग लायें ताकि बच्चों में भी शुरू से ही अच्छे संस्कार पडें। सत्संग से पूर्व प्रातःकाल की बेला में वेद मंत्रों से यज्ञ हुआ। मंत्रोच्चारण गुरूकुल विश्वविद्यालय वृन्दावन के ब्रम्हचारियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर आर्य गायक महाशय देवी सिंह व ब्रम्हचारियों द्वारा ईश्वर महिमा के भजन प्रस्तुत किये गये। सत्संग में प्रमुख रूप से भगवानदेव वानप्रस्थी, कपिल प्रताप सिंह, रघुवीर सिंह, विनोद कुमार, विवेक प्रिय आर्य, प्रभूदयाल आर्य, प्रेम सिंह जादौन, अमरचंद आर्य, कृष्णगोपाल गुप्ता आदि उपस्थित थे।


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