मुफ्त चिकित्सा सुविधा के नाम पर मरीजों का हो रहा है शोषण
मथुरा। महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल में व्यवस्थायें सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। उप्र सरकार द्वारा गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा के नाम पर जिला अस्पताल के डाॅक्टरों द्वारा उनका शोषण किया जा रहा है। यहां तक कि अधिकतर डाॅक्टर ओपीडी के समय अपने कक्षों में उपस्थित न होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि दंत चिकित्सक और नेत्र परीक्षण अधिकारी द्वारा जमकर मरीजांे का शोषण किया जा रहा है। आंख टैस्ट कराने के बाद पीके रंगेश्वर मंदिर के सामने बने पीके आॅप्टीकल के यहां उन्हें चश्मा बनवाने के लिये भेजा जा रहा है। जहां दुकानदार द्वारा उनका शोषण किया जा रहा है। वहीं जिला अस्पताल के डाॅक्टरांे को चश्मा बनवाने वाले लोगों का कमीशन पंहुचाया जा रहा है। दंच चिकित्सक अस्पताल में डाॅक्टरी परीक्षण कराने आने वाले लोगों के दांतों को तोड़कर उनके द्वारा रिपोर्ट लगा दी जाती है जिससे पुलिस द्वारा विभिन्न धारायें बना दी जाती हैं। विभागीय लोगों का कहना था कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने जिला अस्पताल में कार्यभार संभालने के बाद व्यवस्थाओं को सुधारने का दावा किया था लेकिन अस्पताल की व्यवस्थायें जस की तस बनी हुयी हैं। अस्पताल के वार्डों में न सफाई है और न शौचालयों में पानी की व्यवस्था है। जिला अस्पताल के शौचालय गंदगी से अटे पड़े हुये हैं। वहीं मैडिकल वार्ड में एक गेट के टूट जाने के बाद भी अभी तक उसे सही नहीं कराया गया है जिससे यहां भर्ती मरीजों को जिला अस्पताल में रहने वाले बंदरों की समस्याओं से भी सामना करना पड़ता है। बंदर इनके सामान को उठाकर ले जाते हैं। इससे मरीज काफी परेशान हैं। देखने मंे आया है कि जिला अस्पताल के डाॅक्टर अब पर्चों पर ही बाहर से दवाईयों को लिख देते हैं जबकि प्रदेश सरकार के सख्त निर्देश हैं कि वे मरीजों को जिला अस्पताल में मिलने वाली दवाईयों को ही वहां से दें लेकिन इसका डाॅक्टरों द्वारा अनुपालन नहीं किया जा रहा है। हडडी विशेषज्ञ मरीजों को प्लास्टर चढाने के नाम पर पैसा वसूलते हैं तथा 270 रूपये की रसीद को भी अपनी जेब में रख लेते हैं तथा इसके बाद उनसे पैसों की मांग करते हैं। इससे जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों में डाॅक्टर के प्रति काफी रोष है लेकिन सीएमएस का ध्यान जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को संभालने की ओर नहीं है।





