पंच शताब्दी कार्यक्रम में शामिल हुये राष्ट्रपति
मथुरा। अनेकता में एकता ही हमारे देश की सांस्कृतिक पहचान है। दूसरे देशों को इसे देख हैरानी होती है, चेतन्य महाप्रभु एक अच्छे संत थे, उन्होंने विश्वभर में लोगों को प्रेम का संदेश दिया। मुझे भी ब्रज से विशेष पे्रम है। यहीं कारण है कि एक वर्ष के अंतराल में मैं दूसरी बार यहां आया हूं। यह बात आज वृंदावन में देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में श्री चेतन्य महाप्रभु ब्रज वृंदावन आगमन पंचशती महोत्सव के उद्घाटन के दौरान कही।
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मुझे ब्रज से लगाव है, मेरा मन यहां आने पर बेहद प्रसन्न होता है। पांच सौ वर्ष पूर्व चेतन्य महाप्रभु ने बंगाल के नवदीप से यहां पहुंच वृन्दावन की खोज की तथा वृन्दावन का इतिहास रचाया। उन्होंने कहा कि 125 करोड़ की आबादी वाले भारत देश में लगभग सौ भाषायें तथा इतने ही समुदायों के लोग रहते हैं। हमारा देश सभी धर्म सम्प्रदायों का सम्मान करता है। हमारे देश की मिसाल पूरी दुनिया में अलग ही छाप रखती है। उन्होंने कहा कि हमें चेतन्य महाप्रभु के बताये प्रेम संदेश, भाईचारे को आत्मसात करते चलना है। इस दौरान मंच पर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, सांसद हेमामालिनी, जीएलए विश्व विद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, नेता कांग्रेस विधान मंडल दल प्रदीप माथुर, प्रदेश के वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, वृंदावन पालिका अध्यक्ष मुकेश गौतम एवं आयोजक पदमनाभ गोस्वामी मौजूद रहे।
राधारमण जू मंदिर में भाव विभोर हुये राष्ट्रपति
महाप्रभु के आसन व अंगवस्त्र के किये दर्शन
मथुरा। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी कार्यक्रम उदघाटन के बाद प्राचीन मंदिर राधारमण के दर्शनों हेतु पहुंचे, जहां राधारमण जू मंदिर के सेवायत पदमनाभ गोस्वामी और पदमलोचन गोस्वामी ने मंदिर वाह्य द्वार पर स्वागत किया। राधारमण जू घेरा में प्रवेश करते मंदिर प्रांगण में जाकर वैदिक मंत्रों द्वारा मंदिर में सत्कार करते हुये राष्ट्रपति ने अति भावुक हृदय से दर्शन किये। मंदिर में श्रीचैतन्य देव के आसन व अंगवस्त्र, कोपीन, डोर, वहिर्वास आदि के दर्शन किये। राधारमण लाल के दर्शन कर राष्ट्रपति गोपीनाथ बाजार वृन्दावन में अमिय निमाई गौरांग महाप्रभु मंदिर के दर्शन करने गये जहां चैतन्य महाप्रभु की सेवा अराधना विगत 80 वर्षों से हो रही है। यहां मंदिर में श्री गौर हरि का दास विग्रह है। जो नवदीप के निमाई पंडित के अपने घर में स्थित नीम वृक्ष से एक व शेष भाग से निर्मित है। श्री विग्रह का दर्शन कर राष्ट्रपति ने मौन रूप अपनी प्रार्थना की और कतिपय क्षणों के लिये भावधारा में अन्तरतम प्रमुदित हो गये।





