जनपद के 2000 शिक्षामित्रों ने मांगी इच्छामृत्यु

टैंक चैराहे से बड़ा प्रदर्शन निकालकर डीएम को दिया ज्ञापन

मथुरा। हाईकार्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने से शिक्षामित्रों में भारी उबाल है। आज भी विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत सैंकड़ों शिक्षामित्रों ने स्कूलों में काम नहीं किया और हाईकोर्ट के खिलाफ आवाज बुलंद की। शिक्षामित्रों की पूरी गुस्सा हाईकोर्ट और उसके चीफ जस्टिस पर है। इसको लेकर शिक्षामित्र पूरे जनपद में धरना-प्रदर्शन और शिक्षण कार्य ठप्प कर काम से वंचित हैं।कल बरेली के तीन हजार शिक्षामित्रों द्वारा इच्छामृत्यु की मांग के बाद आज मथुरा जनपद के शिक्षमित्रों ने भी जिला प्रशासन को एक ज्ञापन दिया जिसमें इच्छामृयु सामूहिक रूप से देने की राष्ट्रपति से गुहार की है। इस दौरान भारी संख्या में मौजूद शिक्षा मित्र कलैक्ट्रेट परिसर में ही बैठ गये और प्रदर्शन किया। शिक्षामित्रों ने कहा कि हम प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य वर्ष 2001 से अब तक अल्प मानदेय ;3500 रूपयेद्ध में निरंतर करते आ रहे हैं। सपा सरकार ने सहायक अध्यापक पद पर इन्हें समायोजित किया था जिसे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने द्वेषपूर्ण रवैया अपनाते हुये शिक्षामित्रों के समायोजन को ही सिरे से खारिज कर दिया है जिसके फलस्वरूप हमारा भविष्य अंधकार में हो गया है। प्रदेश के शिक्षामित्रों में आत्महत्या और हृदयघात से मौत का सिलसिला शुरू हो गया है जिसके कारण तमाम परिवार तबाह हो रहे हैं जो न्यायोचित नहीं हैं। जनपद के दो हजार शिक्षामित्र उच्च न्यायालय से पीड़ित होकर राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग करते हैं। जल्द से जल्द उन्होंने इच्छामृत्यु की मांग की है। आज ज्ञापन से पूर्व टैंक चैराहे पर सभी शिक्षामित्र इकटठे हुये। महिला-पुरूषांे की काफी संख्या थी। ये नारेबाजी करते हुये जिलाधिकारी कार्यालय पर पंहुचे, वहां पंहुचकर इन लोगों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार को ज्ञापन दिया और अपनी मांग के बारे में अवगत कराया। इस अवसर पर खेम सिंह चैधरी जिलाध्यक्ष, मुंसिफ अली जिला महामंत्री, दुष्यंत सारस्वत जिलाध्यक्ष, हाकिम ंिसह जिला महामंत्री सहित भारी संख्या में शिक्षामित्र मौजूद थे।


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