चिकित्सक को नोटिस भेजने की कार्यवाही की उड़ाई जा रही फर्जी अफवाहें
लगातार शिकायतों के बावजूद भी नहीं हो रही झोलाछाप की जांच और कार्यवाही
मथुरा। जनपद भर में तैनात झोलाछाप चिकित्सक लगातार लोगों की जान के साथ बेखौफ होकर खिलवाड़ कर रहे है। लेकिन स्वास्थ्य महकमा कभी भी जन स्वास्थ्य के प्रति सजग ही नहीं होता है। यदि कोई आम आदमी इनके खिलाफ खड़ा होता भी है तो उसे चिकित्सा अधिकारी कभी तबज्जों नहीं देते। ऐसे ही एक झोलाछाप के खिलाफ शिकायतें लेकर दर दर घूम रहे एक वृद्ध की अवस्था पर भी स्वास्थ्य विभाग को तरस नहीं आया और वे उसके आधा दर्जन आवेदनों को रददी की टोकरी में फैंक कर उसे तरह तरह से गुमराह कर चिकित्सक को बचाने में जुटे है। हद तो तब हो गयी जब ऐसी शिकायतों से अजिज आकर उस वृद्ध ने सीएमओं दफ्तर के हर सम्बन्धित कर्मचारी अधिकारियों जमकर खरी खोटी सुनाई। इसके बावजूद भ्रष्टाचार के दलदल में आकण्ठ डूबे सभी कर्मचारी अधिकारी डट कर उस वृद्ध के ताने सुनते रहे। लेकिन उस वृद्ध की परेशानी को भी देखकर न तो उनका उनका दिल पसीजा और न ही वे इतनी ज्यादा खरी खोटी सुनने के बावजूद शर्मशार हुए। सिर्फ ठहाके लगा लगा कर उस वृद्ध को कार्यालय से भगाने का प्रयास करते रहे।
मिली जानकारी के अनुसार जनपद के शहर मुख्यालय से मात्र दो मिनट और 2 किलो मीटर दूर स्थित सदर बाजार में पिछले लम्बे समय से ऐसा ही एक झोलाछाप चिकित्सक लोगों के स्वास्थ्य के साथ जमकर खिलवाड़ कर रहा है। सिर्फ अन्दाजे से ही दवाऐं देने वाले इस चिकित्सक ने अपनी दुकान के बाहर डा0 विमल कुमार शर्मा एमबीबीएस पुत्र राधा गोविन्द शर्मा आदि लिखा एक बोर्ड लगा रखा है। इसी बोर्ड की आड़ में ये यहां से अपने काले कारनामों को चला रहा है। यहीं सदर बाजार के निवासी भुवन सक्सैना ने भी एक बार गलती से इससे अपने बुखार के लिये दवाऐं ले ली तो बुखार ने उतरने की बजाय बढ़ना शुरू कर दिया तो उसने एक अन्य दूसरे वरिष्ठ चिकित्सक से परामर्श कर दवा ली तब जाकर उसका बुखार थम सका। लेकिन शिक्षित औैर जागरूक होने के नाते उसने इस चिकित्सक की शिकायतें अधिकारियों से करना शुरू कर दिया। वहीं चिकित्सक अब उनसे दुश्मनी मानने लगा औैर उन्हें झूठे मामलों में फंसाने के प्रयासों में जुट गया। लेकिन उन्होंने भी हार नहीं मानी और चिकित्सक की सच्चाई को उजागर करने की कमान अब पुत्र के हाथों से छीन कर पिता ने थाम ली। भुवन के पिता चेतन स्वरूप सक्सैना ने भी कई बार इस झोलाछाप चिकित्सक की शिकायतें सीएमओं कार्यालय में की लेकिन कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी। पीडि़त सक्सैना ने आरटीआई के माध्यम से भी इस चिकित्सक के पंजीकरण और इसकी डिग्रियों की जानकारी जब स्वास्थ्य विभाग से मांगी तो उन्होंने आवेदन पत्र का जबाब देने की बजाय आरोपी चिकित्सक के विरूद्ध नोटिस भेजने की कार्यवाही कर देने का जबाब भेजा। लेकिन मांगने पर भी नोटिस की न तो कोई प्रति उपलब्ध करा सके और न ही विभाग के किसी भी डाक रजिस्टर में उस कथित नोटिस का उल्लेख मिल सका। वहीं आरोपी चिकित्सक ने लगातार शिकायतों को देखकर अब अपने क्लीनिक पर लगा बोर्ड हटा दिया है और एक नया बोर्ड लगवाया है जिस पर अब उस चिकित्सक की डिग्रियां ही बदल गयी है। उन पर अब बीईएमएस लखनऊ एवं डीवाईएन दिल्ली लिखा बोर्ड लगवा दिया हैै। विगत 24 अप्रैल को पीडि़त श्री सक्सैना ने एक और शिकायती पत्र सीएमओ कार्यालय में दिया। लेकिन यहां से अब सीएमओ का तबादला हो चुका था। उनके स्थान पर अब वहीं वरिष्ठ चिकित्सक कार्यवाहक सीएमओं का पदभार संभाल रहे है जिन पर पूर्व में की गयी शिकायतों की जांच थी और जिन्होने उन शिकायतों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की थी। इस से पीडि़त चेतन स्वरूप सक्सैना ने जमकर सीएमओं दफ्तर के हर सम्बन्धित कर्मचारी अधिकारियों को जमकर खरी खोटी सुनाई। इसके बावजूद भ्रष्टाचार के दलदल में आकण्ठ डूबे सभी कर्मचारी अधिकारी डट कर उस वृद्ध के ताने सुनते रहे। लेकिन उस वृद्ध की परेशानी को भी देखकर न तो उनका उनका दिल पसीजा और न ही वे इतनी ज्यादा खरी खोटी सुनने के बावजूद शर्मशार हुए। सिर्फ ठहाके लगा लगा कर उस वृद्ध को कार्यालय से भगाने का प्रयास करते रहे।
सीएमओ कार्यालय में सूचीबद्ध है 5 हजार से अधिक झोलाछाप डाॅक्टर
डीलिंग क्लर्क के पर्सनल रजिस्टर से होती है अलग से उगाही
जिले में 5 हजार से अधिक आरएमपी और झोलाछाप डाॅक्टर सीएमओ कार्यालय में ऐसे सूचीबद्ध है जो लोगों की जान से खिलवाड़ करने की अनुमति 5 से 10 हजार रूपये तक सलाना पर लेते है और इनकी सारी शिकायतों को सीएमओ कार्यालय से निपटाया जाता है। जिले में झोलाछाप और आरएमपी चिकित्सकों की लम्बी फेहरिस्त है जो गाँव देहात और गली मौहल्लों में में कुकरमुत्तों की तरह चिकित्सा सेवा की आड़ में लेागों से अपनी रोजी रोटी ही नहीं चला रहा बल्कि धन्नासेठ बने बैठे है। अनुभवहीन इन चिकित्सको द्वारा रोगी की कोई जाँच पड़ताल किये बगैर ही अंदाजे में इलाज किया जाता है जिसमें कई बार रोगियों को जाने से हाथ धोना पड़ा है अथवा आर्थिक रूप से वह कंगाली के कगार पर जा पहुँेचे है। इस सबके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जब कोई विशेष घटना होती है तो जाँच के पचडे में फंसाकर ऐसे मामलों को टाल देते है। ऐसा नही है कि झोलाछाप डाॅक्टरों की जानकारी सीएमओ कार्यालय को नही है बल्कि उनके कार्यालय के पास इन सभी के नाम पते और मोबाइल नम्बर का एक अलग रजिस्टर है जिसमें करीब 5 हजार ऐसे झोलाछाप सूचीबद्ध है। सूत्र बताते है कि सूचीबद्ध प्रत्येक झोलाछाप चिकित्सक से उसकी हैसियत के हिसाब से वार्षिक वसूली की जाती है जिसमें 40 फीसदी भागीदारी बाबू व 60 फीसदी सीएमओ की बताई जाती है। सूत्र बताते है कि इस अवैध वसूली का ही कारण है कि किसी भी झोलाछाप डाॅक्टर के खिलाफ की जाने वाली शिकायत को सीएमओ स्तर से बाबू को अग्रसारित कर दिया जाता है और बाबू इस सबकों रजिस्टर के स्तर से निबटवा देते है।





