दीनदयालधाम में लोकगीत प्रतियोगिता की तैयारियां शुरू

फरह। पं. दीनदयाल उपाध्याय का जन्म धाम लोकगीत की प्रतियोगिता के रियाज से गूंज रहा है। प्राचीन विद्या की इस प्रतियोगिता जीतने को सुबह से ही बहिनें तैयारी में जुट रहीं हैं।

आसपास के गांवों में भी बालिकाओं और महिलाओं के दल लोकगीतों की तान पर स्वार और ढोलक के संग रियाज में जुटे हुए हैं। लोक गीतों की इस प्रतियोगिता में आगरा और मथुरा की महिलाएं भी शामिल होंगी। नौ अक्टूबर से एकात्म मानववाद की धरा पर जुड़ने वाले तीन दिवसीय पं. दीनदयाल उपाध्याय जन्मोत्सव मेला के दूसरे दिन भजन तो तीसरे दिन लोकगीतों की प्रतियोगिता का होगी। जन्मदिन पर दस अक्टूबर को भजन होंगे और इसमें केवल स्थानीय महिलाएं ही शामिल होंगी, जबकि 11 अक्टूबर को समूचे क्षेत्र के साथ आगरा और मथुरा की महिलाएं लोकगीतों की प्रतियोगिता में जीत को मुकाबला करेंगी। लोकगीत प्रतियोगिता को यहां के सिलाई केंद्र से जुड़ी बहिनें ढोलक के साथ जमकर रियाज में जुटी हैं।

कार्यक्रम को लेकर संयोजिका रीना सिंह का कहना था, करीब पांच घंटे की इस प्रतियोगिता में बालिकाओं और महिलाओं के करीब चालीस दल आएंगे।प्राचीन विद्या का पुरस्कार जीतने के लिए इन बालिकाओं को दीनदयाल धाम की निवासी अनार देवी कई दिनों से रियाज कराने में जुटी हुईं हैं। दौरान सिलाई केंद्र की शिक्षिका अनार देवी ने बताया कि लोकगीत के इस दल को वह अब तक जच्चा, कौमरी के साथ ढोलक के साथ गाने का सलीका सिखा चुकी हैं। सिलाई केंद्र में लोकगीत गाने का ढ़ग सीख रहा बालिकाओं और महिलाओं का यह ग्रुप मेला के मंच पर कव्वाली की भी प्रस्तुति देगा। इसके अलावा दीनदयाल गांव, बर का नगला, बिसू, फरह के साथ ही आसपास के गांव के दल भी लोकगीतों की प्रतियोगिता में जीतने को जमकर अभ्यास में जुटे हैं। लोकगीत कार्यक्रम को लगातार लोकप्रियता के प्रायदान पर चढ़ाने में जुटा आगरा और मथुरा की महिलाओं का दल बीते रोज गांव में बने पं. दीनदयाल उपाध्याय के स्मारक पर बड़ी बैठक करके तैयारियों को परख चुका है, तो इस बार आगरा और मथुरा की शहरी महिलाएं इस प्रतियोगिता में अपने सुर का जादू बिखेरेंगी।


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