दोपहर बाद चला भीतरी बाजारों में बुलडोजर

 सिटी मजिस्टेªट एवं सीओ तथा पीएसी के मौजूदगी में चला अतिक्रमण अभियान होलीगेट के अंदर 

मथुरा। बुलडोजर का ‘भभका’ दिखाकर प्रशासन पांच घंटे तक चैन की बंसी बजाता रहा। व्यापारियों में हड़कंप मचा। स्वतः अतिक्रमण हटाये गये। तीन बजे तक प्रशासन और पुलिस ने देखा कि व्यापारी अब थक गये हैं तो स्वयं बुलडोजर लेकर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ पुलिस व पीएसी छत्ता बाजार में घुस गये और जो अतिक्रमण रह गये थे उन्हें भी बुलडोजर से ढहाना शुरू कर दिया। इस सकरे बाजार में तीन-तीन बुलडोजरों के घुसने से रास्ता जाम हो गया लेकिन प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था। एक बुलडोजर से अतिक्रमण गिराये जा रहे थे तो दूसरे से गंदगी और कूड़ा साफ किया जा रहा था। प्रशासन के इस अभियान से शहर में चमक आयी है। अब बाजार खुले-खुले से नजर आ रहे हैं। बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बोर्ड हटने से बाजारों में रौनक लौटी है। 

बुलडोजरों के ‘भभके’ से व्यापारियों में मचा हड़कंप

मथुरा। प्रशासन के ‘भभके’ से आज स्वतः ही व्यापारियों ने बिना मजिस्ट्रेट, पुलिस बल और निकाय कर्मचारियों के ही अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया।  प्रशासन ने केवल होलीगेट के चैराहे एक के बाद एक तीन बुलडोजर जैसे ही खड़े किये, इसे देखकर व्यापारियों में हड़कंप मच गया। स्वतः ही हथौड़े, छैनी लेकर दुकानदार अपने-अपने प्रतिष्ठानों के बोर्ड और नीचे के चबूतरों को हटाते देखे गये। पूरा हुजूम जमा हो गया। चर्चायें चलने लगीं। होलीगेट पर मेले का सा माहौल नजर आने लगा तो शहर के भीतर के बाजारों में हथौड़ी, छैनी की घनघनाहट देखते ही बन रही थी। पूरे बाजारों मंे खटपट की आवाजें और व्यापारियों की नुक्ताचीनी सुनाई दे रही थी। प्रशासन का एक आदमी भी बाजारों में नहीं पंहुचा लेकिन ‘भवके’ के चलते ही होलीगेट से चैकबाजार और होलीगेट से भरतपुर गेट और आगरा रोड, आर्यसमाज रोड पर भी स्वतः ही अतिक्रमण हटने लगे।  हालांकि व्यापारी एक-दूसरे से चर्चा भी करते सुने गये कि किस क्षेत्र में अभियान कब चलेगा? लेकिन नगर मजिस्ट्रेट के कोई निर्णय न लेने से स्थिति असमंजस की बनी हुयी है। केवल बुलडोजर खड़े कर प्रशासन ने शहर का अतिक्रमण हटवा दिया, इससे अच्छी बात नहीं हो सकती। 

बाजारों में पसरा सन्नाटा

बिना पुलिस-प्रशासन के आज केवल बुलडोजरों का भय दिखाकर प्रशासन ने जो चाल चली उसमें उसे सफलता मिल गयी। बुलडोजरों का खौफ देख दुकानदार स्वतः ही अपने-अपने अतिक्रमण हटाने लगे। स्थिति यह थी कि अंदर और बाहर के बाजारों में हथौड़ी, छैनी की घनघनाहट ही सुनाई पड़ी। बाजारों मंे फर्श और शटर तोड़ने वाले मजदूरों की कमी पड़ गयी। रोजाना होलीगेट पर बैठने वाले मजदूर इस काम के लिये कम पड़ गये। चारों तरफ दुकानदार अतिक्रमण हटाने में लग गये। बाजारों मंे बिक्री का काम पूरी तरह ठप्प हो गया। चारों तरफ मलबे के ढेर और अतिक्रमण सड़कों पर डाले जा रहे थे। कई दिन से बाजारों में सूनापन देखने को मिल रहा है। रौनक न होने से धंधे, व्यापार भी बंद हैं। व्यापारी पहले प्रशासन से निपटने के मूड में है। अपने अतिक्रमण स्वयं हटा रहे हैं। प्रशासन ने इससे राहत महसूस की है और व्यापारियों का आभार भी जताया है कि वे स्वतः संज्ञान लेकर इस परोपकार के काम को कर रहे हैं। ऐसा ही रहे तो अतिक्रमण कभी नहीं हो सकता। 

 

मीटिंग में भिड़े व्यापारी और व्यापारी नेता

मथुरा। शहर में आज बिना पुलिस-प्रशासन की टीम से स्वतः ही प्रशासनिक भभके के चलते व्यापारी अपनी-अपनी दुकानों से अतिक्रमण हटाने लगे। व्यापारियों में भारी मतभेद देखा गया। होलीगेट की अग्रवाल धर्मशाला में व्यापार मण्डल के नेताओं और व्यापारियों मंे जमकर नोंकझोंक हुयी। तू तड़ाक और गर्मा गर्मी के बीच दुकानदारों ने आरोप लगाया कि व्यापार मण्डल पूरी तरह निष्क्रिय है। वह व्यापारियों के हित साधने में पूरी तरह असफल है। इसी का नतीजा है कि आज कई दिन हो गये लेकिन बाजारोे में काम नहीं हो पा रहा है। दुकानदारी ठप्प पड़ी है। प्रशासन की हठधर्मिता के चलते अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर व्यापारियों के उत्पीड़न के खिलाफ व्यापारी नेता आवाज बुलंद नहीं कर रहे। इसको लेकर मीटिंग में काफी तड़का भड़की भी हुयी। व्यापारियों नेताओं ने अपना पक्ष रखते कहा कि उन्होंने तो सभी व्यापारियों से कहा था कि वह अतिक्रमण न हटायें। पहले दिन होलीगेट से डीगगेट चले अतिक्रमण हटाओ अभियान में ही व्यापार मण्डल के नेता रमेश चतुर्वेदी, सुनील साहनी सहित एक दर्जन नेताओं ने सड़क पर बैठकर विरोध और नारेबाजी की थी, दुकानदारों को इसका वास्ता दिया गया। बड़ी मुश्किल से विवाद बीच बचाव कर समाप्त कराया गया। 


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