इन्सान ने सिखा दिया जानवरों को, मांगने से कोई कुछ नही मिलता छीन कर लेना पडता है
बन्दरों की घुड़की से छत्त से कुदी महिला की मौत
मथुरा। मथुरा जनपद की सबसे बड़ी समस्या अगर कोई यहां के निवासियों से पूछे तो उनके मुह से तुरन्त ही निकलेगा बन्दर। हर गली मौहल्ले की हर गली और हर छत्त इस समय बन्दरों से भरी पड़ी है। धार्मिक नगरी के कारण यहां रहने वाले सभी लोग हर जीव पर दया भाव दर्शाते हैं। बन्दर यहां बजरंगबली का अवतार माने जाते हैं। यही बजह है कि बन्दरों के लिये खाने और रहने के लिये कोई कमी नहीं है, यहां दिन रात बन्दरों की संख्या में आश्चर्य जनक वृद्धि देखी जा रही है। संख्या में वृद्धि के कारण अब इन्हें खाना देने वालों की सोच में भी बदलाव आ रहा है। बन्दरों को पर्याप्त खाना न मिलने के कारण ये अब राहगीरों को अपना निशाना बनाने लगे हैं। इस समस्या से यहां के जनप्रतिनिधियों पर शायद कोई फर्क न पड़ता हो लेकिन जनपद में निवास करने वाले व यहां पर्यटन की दृष्टि या तीर्थयात्रा की दृष्टि से आने वालों पर फर्क पड़ता है।
बन्दरों के द्वारा खाने पीने की वस्तुओं को छीना लेना तो आम बात है। अब बन्दरों की बजह से स्कूल काॅलेजों तक आने जाने वाले छोटे से बडे़ छात्रों को भी इनका निशाना बनना पड़ रहा है। वृन्दावन में तो तीर्थयात्रियों से छीना झपटी आम बात है। बन्दरों में भी अब समझ आ गई है कि इन्सानों से कुछ छीन कर ले जाया जाय तो यह कुछ न कुछ खाना खाने की वस्तु देंगे ही इस लिये अब बन्दरों ने सीख लिया है कि आदमी के सिर पर या कन्धे पर बैठ कर चश्मा, मौबाईल पर्स काम काज की कोई भी आवश्यक वस्तु छिना कर किसी उंचे स्थान पर जाकर बैठ जाना जिससे इनको खाना खाने की वस्तु देना मजबूरी बन जाय। इन्सान ने ही सिखा दिया जानवरों को कि मांगने से कोई कुछ नही देता छीन कर लेना पडता है। यह युक्ति बन्दरों ने इन्सानों से ही सीख ली है और यह काम भी कर रही है। बन्दर भी चालाक हो गये हैं अटटालिका पर बैठ कर देखते हैं कि खाने को कुछ मिल रहा है या नही अगर खाना नही तो सामान भी नहीं चश्मे की डन्डी धीरे धीरे तोडी जायेगी फिर भी खाना नही मिला तो दूसरी डन्डी तोड दी जायेगी इस पर भी नही मिला तो चश्मा मौबाइल पर्स आदि ऐसा कर दिया जायेगा कि यह हमारे किसी काम का नही तो तुम्हारे भी किसी काम का नही रहेगा।
जनपद के हर क्षेत्र में बन्दरों की अत्यधिक बढती संख्या का अनुमान नही लगाया जा सकता है। खाने पीने की वस्तुओं की कमी ने बन्दरों को आम सड़कों काॅलोनियों की सड़कों पर या छत्तों पर झुण्ड में हमला करते देखा जा सकता है। मथुरा शहर के हर मौहल्ले, वृन्दावन की हर गली मौहल्ले, गोवर्धन, राधाकुण्ड, दाऊजी, बलदेव, समेत तीर्थ यात्रा के सभी पड़ावों में यहां तक कि गावों में भी इस समस्या से लोग परेशान हैं। आज स्थिति यह है कि इन्सान पिंजडे में निवास करते हैं और बन्दर स्वछन्द घूमते हैं।
बन्दरों को पकड़ना और पकड़ कर कहीं और ले जाकर छोड़ना समस्या का हल नही है। इनके लिये स्थाई आवास बाड़ा बनाने की आवश्यकता है जिसमें उंची उंची बाड बन्दी होनी चाहिये जिसमें इनको रखा जाय चारों ओर खुला और हरियाली युक्त बातावरण हो धार्मिक आस्था के लोग वहां जाकर बन्दरों को खाने के लिये दे सकें। एकान्त में जंगलों में छोड़ दिये जाने पर यह फिर शहर की ओर रूख करते हैं जहां इनकों पर्याप्त खाना मिलता है यह वहां जायेंगे भी और लोगों को इसी तरह से परेशान भी करेंगे। अब तक न जाने कितनी जानें बन्दरों के काटने से हुयी हैं या इनके द्वारा गिरा दिये जाने या उंचाई से इनके भय से गिरने से हुयी हों।
हाल ही में थाना वृन्दावन के गोबिन्द बाग में एक महिला को कपड़ें सुखाने के दौरान छत्त पर आये बन्दरों के झुण्ड ने हमला वोल दिया जिससें घबड़ा कर महिला अपने घर की छत्त से नीचें कूद गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के विरोध में स्थानीय व्यापारियों ने बाजार बन्द कर जाम लगा दिया। सूचना पर पहुंचें आला अधिकारियों ने क्षेत्र में बन्दर पकड़वाने का आश्वसन देकर जाम को तो खुलवा दिया।
मिली जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के गोबिन्द वाग निवासीें धर्मशानाथ शास्त्री की 52 वर्षीय धर्मपत्नी अन्जली देवी प्रतिदिन की भांति छत्त पर कपड़ा सुखाने के लिए गई थी की इसी दौरान एक बन्दरों का झुण्ड आया जिससें अन्जली देवी द्वारा भगाने का प्रयास किया तो बन्दरों के झुण्ड ने महिला पर हमला वोल दिया। बन्दरों के एक तरफा हमलें से अन्जली देवी घबड़ा गई और वह बन्दरों के भय से छत्त से ही कूद गई। जिससें अन्जली देवी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना को स्थानीय लोगों में हड़.कम्प मच गया। स्थानीय लोग घटना स्थल की ओर दोड़ पड़ें। घटना से आक्रोशित लोगों ने महिला के शव को सड़क पर रखकर बाजार बन्द जाम लगा दिया। जिससें आवागमन में लोगों को दिक्कत होने लगी। जाम की सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस व पालिका के प्रशासनिक अधिकारियों ने जाम लगा रहे लोगों को समझा बुझाकर जाम को खुलवाया तथा क्षेत्र में शीघ्र ही बन्दरों को पकड़वाने का आश्वासन दिया। घटना को लेकर क्षेत्र में पालिका प्रशासन व जिला प्रशासन के विरूद्व आक्रोश बना हुआ हैं।
यह एक बड़ी समस्या बनी हुई है लेकिन इस समस्या के लिये जिला प्रशासन के पास इसका कोई ठोस समाधान नही है।





