जयपुर। प्रदेश भर की पंचायतों मेें होने वाले कामों की अब बडे पैमाने पर नियमित सोशल ऑडिट होगी। इसके लिए प्रदेश में जल्द ही सोशल ऑडिट निदेशालय का गठन किया जाएगा। पिछले माह मुख्य सचिव के साथ सिविल सोसाइटी और एनजीओ के सदस्यों की बैठक में जल्द सोशल ऑडिट निदेशालय के गठन का फैसला हुआ था। सोशल ऑडिट निदेशालय के जिम्मे नियमित रूप से पंचायतों केे कामों की सोशल ऑडिट करवाना रहेगा। पंचायतों में होने वाले कामों मेें कितना खर्च कैसे हुआ इस पर निगरानी के लिए सोशल ऑडिट शुरू की गई थी। सोशल ऑडिट मुख्य रूप से नरेगा के कामों की ही होती है, अन्य योजनाओं के कामों की सोशल ऑडिट कम ही होती है।
सोशल ऑडिट से बडे पैमाने पर घपले पकडे गए थे, इसका नतीजा यह हुआ कि सरपंचों और पंचायतीराज प्रतिनिधियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद सोशल ऑडिट का काम रस्म अदायगी के तौर पर ही हो रहा है। अब सरकार सोशल ऑडिट निदेशालय बना रही है। सिविल सोसाइटी से जुडे लोगों का कहना है कि पंचायत के हर बडे काम की नियमित रूप से सोशल ऑडिट होनी ही चाहिए, सोशल ऑडिट में जो भी गडबडी पकड मेें आए उस पर तत्काल कार्रवाई भी होनी चाहिए। सिविल सोसाइटी की मांग पर सरकार अब सोशल ऑडिट निदेशालय के गठन पर राजी हुई है लेकिन राजनीतिक दबाव की आशंका अब भी बनी हुई है।
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