भागवत प्रभु का साक्षात शब्दमय विग्रह

मथुरा। भागवत कथा आयोजन समिति के तत्वावधान में भागवत जयंती समारोह भक्ति

व श्रद्धा के साथ गऊघाट स्थित गोपीनाथ मंदिर में आयोजित किया गया। समारोह

में सर्वप्रथम स्वस्तिवाचन के उपरांत भागवत का शास्त्रोक्त विधि से चंदन,

पुष्प व 108 तुलसीदल अर्पित कर किया। इस अवसर पर वर्तमान परिप्रेक्ष्य

में श्रीमदभागवत की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी हुयी। अध्यक्षता करते

राजा बाबा ने कहा कि भागवत भक्ति ज्ञान, वैराग्य प्रदान करने वाला ग्रंथ

एवं भूत, भविष्य, वर्तमान का त्रिवेणी संगम है। यह प्रभु का साक्षात

शब्दमय विग्रह है। पंडित अमित भारद्वाज ने कहा कि सकल मनोकामनाओं को

पूर्ण करने वाला एवं पुराणों का मुकटमणि यह ग्रंथ सदैव प्रासंगिक रहेगा।

आचार्य प्रणव दीक्षित और रामदत्त शास्त्री ने भी व्यवसायीकरण एवं संगीत

की प्रचुरता पर सहमति जताते कहा कि जनकल्याण करने वाले ग्रंथ को

स्वकल्याण का साधन बनाया जाना चिंतनीय है। इस अवसर पर आनंद बल्लभ

शास्त्री, बलराम आचार्य, पदमनाथ वशिष्ठ, देवेन्द्र पुरोहित, गोपाल बल्लभ,

कृष्णमुरारी भारद्वाज, कृपाशंकर द्विवेदी, रवि नारायण पाराशर, कृष्ण

कुमार शास्त्री, मुकेश शास्त्री, धीरज गोस्वामी आदि उपस्थित थे।


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