‘भूजल बचाओ’ आन्दोलन का आगाज
मथुरा। राक्षसी प्रवत्तियों के चलते जहरीले हो रहे धरती माता की कोख के अमृत भूजल की हिफाजत के मद्देनजर रविवार को विश्रामघाट क्षेत्र में ‘भूजल बचाओ’ आन्दोलन के जरिये प्रदूषकों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया।
डा. रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में आन्दोलन के मूर्तन पर संस्थापक अध्यक्ष डा. सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भूजल रक्षा पर बने कानूनों की धज्जियां इस हद तक उड़ायी जाने लगी हैं कि कारखानों के जहरीले रसायनों के साथ-साथ शैतानी ताकतें बोरिंग पाइपों के जरिये मल-मूत्र तक भूजल में प्रवाहित करने लगी हैं जिसे जयसिंहपुरा खादर, राधिका विहार काॅलोनी समेत कई इलाकों के लोग पीने को बेबश हो रहे हैं। बताया कि हैवानियत का यह मंजर सिर्फ कृष्णनगरी ही नहीं बल्कि अन्य शहरों में भी देखा गया है। डा. शर्मा ने रोष जताया कि प्रजातांत्रिक स्तम्भों ने जहां सीवरों के बजाय देव प्रतिमाओं को नदियों का प्रदूषक तत्व करार दिया, वहीं भूजल की रक्षा के लिए कानून होने के बावजूद प्रतिमा विसर्जन पर रोक जैसी सक्रियता नहीं दिखाई है। गौरतलब है कि पंचमहाभूतों के प्रमुख घटक जल की रक्षा के लिए पूरा वैदिक दर्शनशास्त्र खड़ा किया गया जिसके आधार पर ही आधुनिक युग मेें भी 1993 में संविधान में किये गये 73 वें और 74 वें संशोधन एवं अनुच्छेद 30 डी, परम्परा से चलते आये जल कानूनों के संरक्षण व अधिकार की ही वकालत करते हैं। मगर जनाधार केन्द्रित शासन पद्धति में पारिस्थिति की मूल्यों को नजर अन्दाज किया जा रहा है।
डाॅ0 शर्मा ने क्षोभ जताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी जितनी तवज्जो विघटनकारी ताकतों को दी है, उतनी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्द्धन को नहीं दी। उसी का नतीजा है कि भारत में सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ प्राकृतिक विरासत के संरक्षण स्थल बहुत कम बनाये जा सके जबकि प्रकृति हमेशा अपनी परवाह किये बगैर संस्कृति को सींचती रही है।
डा0 शर्मा ने प्रधानमंत्री समेत राज्य सरकारों से जहरीली हवा, पानी और भोजन के मौलिक अधिकार की रक्षा की मांग की। बताया कि जब जीवन के मौलिक आधार ही खतरों से घिर जायेंगे तो फिर लोग किस भरोसे जी सकेंगे। चेतावनी दी कि यदि सरकारों ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये तो उग्र आन्दोलन किया जायेगा।
इससे पूर्व उपस्थितों ने मां यमुना के चित्रपट पर पुष्पार्चन से आयेजन की शुरूआत की, तत्पश्चात आयोजन स्थल देश प्रेम के जयकारों से गूंज उठा।
इस अवसर पर स्वेता पान्डेय, बलिया, प्रियंका देवरिया, आभा पटेल अम्बेडकर नगर फैजावाद, ललिता देवरिया, कमली चतुर्वेदी, विपिन चतुर्वेदी, देवेन्द्र चतुर्वेदी, संतोषी, मंनशोला चतुर्वेदी, सुनील शर्मा पत्रकार, वीरेन्द्र चतुर्वेदी .उपस्थित थे।





