मथुरा। पूरे देश में एक तरफ स्वच्छता अभियान की गूंज हो रही है वहीं कृष्ण-कन्हैया की नगरी मथुरा गंदगी के ढेरों से तीर्थयात्रियों का स्वागत कर रही है। जगह-जगह उफनते सीवर, नालियों में भरी गंदगी, सड़कों पर फैलते गंदे पानी, तीर्थयात्रियों ही नहीं स्थानीय लोगों की भी भावनायें दूषित कर रहे हैं। नगर पालिका द्वारा ठेके और अपने कर्मचारियों द्वारा सफाई कैसे करायी जा रही है? शहर का भ्रमण करने से इसका स्वतः ही अंदाजा लग जायेगा। प्रमुख मंदिरों के आसपास बड़े-बड़े गंदगी के ढेर और मंदिर आने वाले चैक से द्वारिकाधीश तक स्थान-स्थान पर गंदगी, शहर की पाॅश कालोनी डैम्पियर नगर, सौंख अडडा मार्ग, स्टेट बैंक, कोतवाली रोड सभी जगह गंदगी देखने को मिलेगी। और तो और शहर के हृदयस्थल होलीगेट पर भी जगह-जगह गंदगी ने शहर के धार्मिक स्वरूप को बिगाड़ रखा है। नगर पालिका के सफाई कर्मचारी क्यों इस पर ध्यान नहीं देते? चेयरमैन क्यों इसका निरीक्षण नहीं करतीं? कोतवाली रोड स्थित संतोषपुरा के सामने और चम्पा अग्रवाल इण्टर कालेज के सामने उफनते सीवरों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। वहीं प्राईमरी लाल स्कूल के सामने स्थित शौचालय के बाहर भारी गंदगी से सफाईकर्मी खुद दुखी हैं। मसानी के नाले से दूसरे सुभाष नगर और अन्य नाले बुरी तरह उफन रहे हैं। नये बस स्टैण्ड क्षेत्र में भी भारी गंदगी फैली हुयी है। भारी संख्या में तीर्थयात्री आते रहते हैं। शहरवासी भी इस गंदगी से परेशान हैं। सफाई का ठेका देने के बाद भी सीवरें उफन रही हैं। गंदे पानी सड़क पर बह रहे हैं और भाजपा की चेयरमैन स्वच्छता अभियान की हवा निकालने में लग रही हैं, यह कहना गलत नहीं होगा। नगर पालिका क्षेत्र में ही गंदगी का आलम बताता है कि कभी शहर का निरीक्षण नहीं होता है। जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यांे से विमुख हैं जिसके कारण पूरा शहर गंदगी की चपेट में है। गली-मौहल्लों का और भी बुरा हाल है। घनी बस्ती वाले क्षेत्रों में नियमित सफाई नहीं होती। सफाई निरीक्षक, ईओ और चेयरमैन कभी इस तरह गौर नहीं करते।





