मथुरा। गिटटी, मिटटी, बालू, पत्थर पर अविवहन शुल्क की मार झेल रहे ट्रक चालकों पर अब फिर पुनः वन विभाग का डंडा शुरू हो गया है। बीच में कई माह तक इस शुल्क से छुटकारा पाये रेत सप्लायर अब पुनः इस टीम की चपेट में आने लगे हैं। इसी खौफ से राजस्थान से मथुरा आने वाले बालू के ट्रक अब आंख बचाकर मथुरा सीमा में आ रहे हैं। बालू, रेत, बजरफुट, गिटटी, चिलका का व्यापार करने वाली फर्मों द्वारा पूर्व में माननीय न्यायालय के आदेशों के चलते रिट याचिका पर इस अविवहन शुल्क से मुक्ति पा रखी थी, फिर भी रात के अंधेरे में वन विभाग के कर्मचारी अवैध तरीके से ये शुल्क वसूलते रहे। शिकवा-शिकायतों के बीच यह गोरखधंधा बंद हुआ फिर टीपी कटाने लोग जरूरी कागजों के लिये वन विभाग कार्यालय भी आने लगे हैं। अब पुनः कई दिन से घूम रही वन विभाग की इस्काट टीम द्वारा सड़क मार्गों पर ऐसी गाड़ियों को रोककर फाइलें ली जा रही हैं जिससे ट्रांसपोर्ट के धंधे में लगे लोगों के पैर उखड़ रहे हैं। कहीं सेलटैकस कर्मी तो कहीं एआरटीओ तो कहीं वन विभाग की गाड़ियों में सवार सरकारी नुमाइंदे वाहन चालकों के लिये मुसीबत बने हुये हैं। लखनऊ से आयी वन विभाग की टीम द्वारा जनपद में कई प्रमुख मार्गों पर जहां से गिटटी, पत्थर, बजरफुट, बालू, चिलका, लकड़ी आदि सामग्री की खेप निकलती हैं वहां गाड़ियों को रोककर अविवहन शुल्क वसूला जा रहा है। वन विभाग के कर्मचारी मौके से जल्दबाजी कर गाड़ी चालकों से फाइलें छुड़ा ले जाते हैं। जल्दबाजी में न तो गाड़ी मालिक न तो यह समझ पाते हैं कि यह सेलैटक्स कर्मी हैं या एआरटीओ के लोग। जब सुबह दिन निकलने के बाद लोग एक-दूसरे से फाइलों की जानकारी लेते देखे जा सकते हैं कि किस विभाग के कर्मी रात में फाइलांे को ले गये हैं।





