मथुरा। दिल्ली से आये निरंकारी संत इन्द्रजीत शर्मा ने गनेशरा मार्ग स्थित राधापुरम एस्टेट के खुले पार्क में आयोजित निरंकारी आध्यात्मिक संध्या में व्यवहारिक मानवीय सिद्धांत अपनाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि ‘धर्म की जय हो’ कहने मात्र से धर्म की जय होने वाली नहीं, इसके लिए मानवीय सिद्धांतों को व्यवहार में अपनाना होगा। माता-पिता, गुरूजनों और अतिथियों के सम्मान की परम्परा को बनाये रखना होगा। जब प्राणियों में सद्भावना होगी तभी धर्म की जय होगी और विश्व का कल्याण होगा। निरंकारी संत ने कहा कि बिना सत्गुरू के धर्म की जय होने वाली नहीं। सत्गुरू ब्रह्मज्ञान प्रदान कर परमतत्व का बोध कराता है, जिससे भेद मिट जाते है, दूरिया समाप्त हो जाती है, फिर धर्म के नाम पर झगड़े नहीं होते, बल्कि धर्म की जय-जयकार होती है। प्रसिद्ध गीतकार कलाकार विनोद साई ने कहा कि में अहंकार होता है, तू में निरंकार होता है, एक में तकरार होता है, एक में बस प्यार होता है। कार्यक्रम के सूत्रधार एल.पी. भट्टराई , उर्वशी एके त्रिपाठी तथा स्थानीय जिला संयोजक हरविन्द्र कुमार ने संत-भक्तों का स्वागत कर आभार जताया। इसमें एसकेरावत, भरत, बच्चनसिंह, मारूति स्टील के गोल्डी, पूर्व उबेशि अधिकारी एसपी शर्मा, सीता दुबे, राजीव सिमरन, रेखा, राजेश्वरी सैंगर, डा. अनिल अग्रवाल, डा. मुनेन्द्र, पुनीत सरीन, शाहिद आशा, अंकित त्रिपाठी तथा मिडिया प्रभारी किशोर स्वर्ण का विशेष सहयोग रहा ।





