मथुरा। ब्रज में तो हर बालिका राधा है, राधिका है, आराधिका है, लाड़-लड़ैती लाड़िली है, कीरति किशोरी है। सावन में ‘झूला पै झूलैं ए जी राँनी राधिका जी‘ हैं तो फागुन में ‘रंग बरसै रे गुलाल बरसै, राधा राँनी हँमारी पै रंग बरसै‘ में होली की नायिका हैं। ये उद्गार ज्ञानदीप शिक्षा भारती के संस्थापक सचिव मोहन स्वरूप भाटिया ने ज्ञानदीप प्रांगण में आयोजित राधाष्टमी महोत्सव में व्यक्त किए। उन्होनें छात्र छात्राओं को बताया कि रावल राधाजी की जन्मभूमि, बरसाना बाल लीलास्थली और वृन्दावन किशोरकालीन लीलास्थली है। राधा का अलौकिक व्यक्तित्व रहा है। भगवान कृष्ण भी उनकी आराधना करते हैं। तीन लोक तारन-तरन कृष्ण उनके आधीन रहते हैं और जन जन की वह परम धन हैं, हमारौ धन राधा, श्रीराधा, परमधन राधा, राधा, राधा, राधा, राधा। ज्ञानदीप की प्रधानाचार्या निधि भाटिया ने कहा कि राधा श्रीकृष्ण की अह्लादिनी शक्ति हैं, रस माधुर्य की साक्षात प्रतिमूर्ति है। शैक्षिक निदेशक केजी माहेश्वरी ने कहा कि राधा की महत्ता इसी से प्रमाणित है कि कृष्ण से पहले राधा का नाम लिया जाता है। राधाष्टमी महोत्सव में राधा स्तुति एवं राधा महिमा सम्बन्धी लोकगीतों तथा पदों का गायन किया गया और ‘बूझत स्याम कौन तू गोरी- पद पर नृत्य की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम की संयोजिका मधुलिका थीं।





