मथुरा। श्राद्घ पक्ष में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या को तिलमिश्रित जल कुश के अग्रभाग से अपने पितृों को स्मरण कर देने से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा एक हजार वर्ष पर्यन्त श्राद्घ हो जाता है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है, एवं घर में वंश और धन की वृद्घि होती है। यह बात श्रीमद्भागवत कथा का एवं तीर्थ पुरोहित महासंघ के पंघ् देवदत्त शास्त्री चतुर्वेदी एवं पंडित लालजी भाई शास्त्री चतुर्वेदी ने सनातन धर्मियों से सोमवती अमावस्या 12 अक्टूबर को ब्राह्मण भोज से पूर्व पांच ग्रास निकाल गौ, कौआ, कुत्ता, पीपल के जड़ में एवं देवताओं के लिए निकालें। जो श्राद्घकर्ता के लिए शुभ फलदायक होगा।





