13 बीघा जमीन की खातिर

मथुरा। 13 बीघा जमीन के चक्कर में चार बच्चे अनाथ हो गये। अफसोस! कि चारों लड़किया हैं। अब से लड़कियां अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बड़ी मुश्किल से परिवार के लोगों की कैद से निकलीं ये बालिकायें आज जब वृन्दावन कोतवाली पंहुची तो कोतवाल संजय जायसवाल भी आश्चर्य में रह गये। मजिस्ट्रेट प्रतिभा शर्मा को भी उन पर भारी तरस आया। अब इन बच्चांे को साध्वी ऋतंभरा के वात्सल्य गांव में शिक्षा हेतु भेजे जाने की तैयारियां कोतवाल और प्रतिभा शर्मा द्वारा की जा रही हैं, जो प्रशंसनीय हैं।

हुआ यह कि छाता के रहेड़ा गांव में शंकर पुत्र सोढ़ी रहता था। उसके तीन अन्य भाई भी थे। बताते हैं कि शंकर की 13 बीघा जमीन थी जिस पर उसके भाईयों की नजर थी। बताया गया कि शंकर की पत्नी को वर्ष 2010 में जहर दे दिया गया। कोतवाली में मौजूद अबोध बच्चों मीनू (12), संजू (10), कविता (8), वंदना (7), ने बताया कि उनकी मां को चाचाओं श्याम, वीरो और धर्मी ने जहर देकर मार दिया और वर्ष 2013 में उनके सिर से बाप का साया भी हट गया। उसके पिता शंकर को 2013 में ट्रैक्टर से कुचलवाकर मरवा दिया गया। तब से शंकर की चारों लड़कियां अनाथ हो गयीं। परिवार के लोगों को लगा कि अब इनका रहना भी ठीक नहीं है। भारी प्रताड़नाओं के बीच वह परिवार में जैसे-तैसे अपना जीवन काटने लगीं। परिवार के साथ घुटन में जी रहे इन चारों बच्चों ने अचानक अपनी बुआ की लड़की रचना को जैसे-तैसे अपनी आपबीती सुनाई। रचना इन बच्चों को लेकर वृन्दावन आ गयी और उसने अपने लोगों से बातचीत कर सीधे वृन्दावन कोतवाली लेकर बच्चों को पंहुची। बताते हैं कि रचना इन बच्चों को वात्सल्य गांव में पढाना चाहती थी लेकिन वहां आयीं तमाम बाधाओं में पहली बाधा यह थी कि पुलिस इस मामले में जानकारी करके वात्सल्य गांव को बताये, तब वे इन बच्चों का दाखिला लेंगे। इंस्पैक्टर वृन्दावन संजय जायसवाल और अनाथ बच्चों की रहनुमा मजिस्ट्रेट प्रतिभा शर्मा ने इन बच्चों को वात्सल्य पंहुचाने का पूरा प्रयास कर दिया है। जल्द ही ये बच्चे वहंा पंहुच जायेंगे। एक ऐसी हृदयविदारक कथा जो इन बच्चों ने बतायी, रोंगटे खड़े करने वाली है।

कैसे 13 बीघा जमीन हड़पने के चक्कर में पिता के खास भाई ही उनके दुश्मन बन गये? पूरा परिवार अलग-थलग पड़ गया। मां-बाप मर गये और चारों बच्चे आज वात्सल्य ग्राम में अनाथ होकर पढने को मजबूर हैं। 


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