मथुरा। प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालय में लंबित वादों का परस्पर सहमति के आधार पर निस्तारण कराए जाने हेतु गत् 3 सितम्बर 2012 के कार्यालय ज्ञाप को संशोधित करते हुए 19 जून 2015 के कार्यालय ज्ञाप द्वारा 02 विभागीय विवाद समाधान फोरम के स्थान पर 04 विभागीय विवाद समाधान फोरम का गठन किया जा चुका है।
मुख्य सचिव ने विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी दी कि विभागीय विवाद समाधान फोरम के समक्ष ऐसे सेवा संबंधी प्रकरण, जो उच्च न्यायालय में लंबित हों और जिनमें राज्य सरकार को पक्षकार बनाया गया हो, को सौहार्दपूर्ण वातावरण में निस्तारण हेतु कर्मचारी निर्धारित प्रारूप पर आवेदन पत्र प्रमुख सचिव-न्याय को प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि अनुश्रवण प्रकोष्ठ न्याय विभाग प्राप्त आवेदनों को प्रथम दृष्ट्या सुनवाई हेतु संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव को इस आशय से पत्रावली संदर्भित करेगा कि संबंधित प्रमुख सचिव सचिव, वादी को बुलाकर उनकी समस्याओं को स्वंय सुनें तथा निर्दिष्ट समय के अंतर्गत विधिमान्य व्यवस्थाओं के अनुसार प्रकरण का निस्तारण करके पत्रावली प्रमुख सचिव, अनुश्रवण प्रकोष्ठ न्याय विभाग को वापस करें। विभागीय प्रमुख सचिव यदि प्रकरण का निस्तारण फोरम के द्वारा कराना चाहते हैं तो अनुश्रवण प्रकोष्ठ न्याय विभाग मामले का परीक्षण करते हुए अग्रेतर कार्यवाहीध्सुनवाई हेतु उसे संबंधित फोरम के अध्यक्ष को प्रस्तुत करेगा। मुख्य सचिव के अनुसार फोरम के गठन का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना तथा उच्च न्यायालय में लंबित वादों की संख्या में उत्तरोत्तर कमी लाना है।





