अग्निकांड में नहीं जला पालिका का महत्वपूर्ण रिकाॅर्ड

ईओ का गैरजिम्मेदाराना बयान

मथुरा। नगर पालिका परिषद के रिकाॅर्ड में लगी आग रहस्यमयी होकर रह गई है। पालिका अधिशाषी अधिकारी राजपाल यादव का कहना है कि जलने वाला रिकाॅर्ड महत्वपूर्ण नहीं था, उसे तो चार-पांच साल पूर्व ही जला दिया जाना चाहिए था। अब सवाल यह उठता है कि ईओ का यह बयान जिम्मेदाराना है, गैरजिम्मेदाराना? यह तय करना प्रशासन के बड़े अधिकारियों का काम है। लेकिन इतना तय है कि किसी भी रिकाॅर्ड को नष्ट करने के लिए उसकी अनुमति लेना अथवा नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में उसका प्रस्ताव पारित कराना, जहां तक है आवश्यक था। अब जब रिकाॅर्ड जला है तो लोगों को आशंका है कि एआरटीओ की भांति यहां भी रिकाॅर्ड के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल चलेगा। 

नगर पालिका परिषद के रिकाॅर्ड में पिछले दिनों लगी आग के मामले में अज्ञात के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और चैकीदार ईस्माइल को निलंबित करने से आगे कुछ भी नहीं बढ़ा है। मामला जबकि बहुत ही महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य, टैक्स जैसे मामलों का रिकाॅर्ड जलना बताया जा रहा है जबकि कुछ लोग यह भी कह रहे है कि राजकीय इंटर कालेज की जमीन से जुड़े दस्तावेज भी आग में खाक हो चुके हैं। यह लम्बे अर्से बाद यह पहला मौका है कि जब नगर पालिका के रिकाॅर्ड में आग लगी। इस संबंध में नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी यादव से पूछा गया तो उनका कहना था कि रिकाॅर्ड की सूची तैयार की जा रही है। हालांकि कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं जला है। ईओ यादव से जब पूछा गया कि जब अभी सूची बन रही है, तो वे कैसे कह सकते हैं, कि महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं जले ? इस पर वह निरोत्तर हो गए। उनका कहना था कि जो रिकाॅर्ड जला है, उसे चार-पांच वर्ष पूर्व ही जला देना चाहिए था। अब सवाल यह उठता है कि क्या ईओ ने इसकी पूर्व में किसी उच्च अधिकारी से अनुमति ली? अथवा पालिका बोर्ड की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित कराया गया। पिछले लम्बे पालिका इतिहास में पालिका रिकाॅर्ड को जलाने की कहीं भी कोई व्यवस्था रहीं, नहीं तो फिर ईओ का यह गैरजिम्मेदाराना बयान, क्या उनकी लापरवाही को उजागर नहीं करता। 

10 का बल्व 87 रुपए मजदूरी

मथुरा। शहर को रोशन करने के लिए नगर पालिका जहां दस रुपए का बल्व लगाती है, वहीं लगाने वाले को 87 रुपए मजदूरी के नाम पर अदा करती है। यह सब मामला घपलेबाजी का नहीं तो और क्या है? 

पालिकाध्यक्षा अपने घर का बल्व बदलवाने में इतनी मजदूरी खर्च करती है। पालिका रिकाॅर्ड के मुताबिक 1750 रुपए प्रतिदिन शहर के विभिन्न गली-मौहल्लों में बल्व बदलने वाले श्रर्मिकों को दिए जा रहे हैं, जो रिकाॅर्ड के मुताबिक एक दिन में 20 से अधिक बल्व नहीं बदलते। आंकड़ों के खेल में देखें तो 10 रुपए के बल्व पर 87 रुपए की मजदूरी वहन कर नही है। पालिका सभासद और पालिकाध्यक्ष इस घपलेबाजी में एकसाथ कदम ताल करते नजर आ रहे हैं। 

 


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