मथुरा 06 जुलाई। अघोषित कटौती ने शहर वासी बेहाल हो गए। सुबह 7 बजे से गुल हुई बत्ती दोपहर 2 बजे तक वापिस नहीं आ सकी। कटौती ने आम जन के साथ-साथ उद्योग धंधे व प्रतिष्ठानों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। बरसाती मौसम शुरू होते ही बिजली की लुका-छिपी का खेल तेज हो गया है। बुधवार को जहां बिजली की लुका-छिपी से लोग त्रस्त रहे, वहीं मंगलवार को भी यही हाल देखने को मिला। प्रातः 7 बजे के बाद ही पूरे शहर भर की बिजली काट दी गई। इसके चलते लोगों को खासी दिक्कत पेश आई। कामकाजी लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। 7 बजे से गायब हुई बिजली के दर्शन दोपहर 2 बजे बाद तक नहीं हो सके। हालांकि इस बीच चंद मिनटों के लिए दो-तीन बार बिजली अवश्य आई थी। मगर 7-8 घंटे की लगातार कटौती ने व्यवस्था चरमरा उठी। उद्योग धंधों पर कटौती का सर्वाधिक असर रहा। व्यापारी जनरेटर आदि के सहारे काम करने को विवश थे, वहीं अधिकतर कामगार हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे। शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी बुरे हैं, कोसीकलां, छाता, बरसाना, गोवर्धन, फरह, महावन व मांट आदि क्षेत्रों में बिजली कब आती है और कब चली जाती है? इसका कोई समय नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार सायं ढलते ही बत्ती गुल कर दी जाती है, जिससे गांव अंधेरे की चादर ओढ़ लेते हैं। बिजली विभाग ने शासन व प्रशासन के आदेशों को भी ताक पर रख दिया है। मथुरा जिला प्रशासन द्वारा ईद पर्व के मद्देनजर 4 जुलाई से 8 जुलाई तक पूरे शहर को कटौती मुक्त रखने के आदेश दिए थे। मगर शायद इन आदेशों को बिजली विभाग ने अनदेखा कर दिया है। आदेशों के बावजूद घंटों तक अबाध कटौती की जा रही है, जिससे सभी हलकान है।





