स्ट्राइक वन की रवाना हुई टीमों ने किया साहसिक और दुर्गम यात्राऐं पूर्ण
मध्यम तोपखाना लौटी ओम पर्वत और आदि कैलाश की यात्रा से
स्ट्राइक वन के जांबाजों की टीम लौटने के बाद
दुर्गम रास्तों से गुजरते टीम के सदस्य
मथुरा। मध्यम तोपखाना के एक साहसिक पद यात्रा अभियान का 25 सितम्बर 2015 को अलवर मे जनरल कमांडिग आॅफिसर स्ट्राईक वन लेफ्टिनेंट जनरल ए0बी0 शिवाने विशिष्ट सेवा मेडल द्वारा स्वागत किया गया। इस साहसिक अभियान में 12 सदस्यों को शामिल किया गया जिसे 17 अगस्त 2015 को मथुरा से रवाना किया गया था। यह अभियान 26 अगस्त 2015 को दार्चुला से आरम्भ हुआ। यह टीम दुर्गम पर्वतीय रास्तो से गुजरते हुये 07 सितम्बर 2015 को अपने पहले गंतव्य स्थान ओम पर्वत बेस कंैप पर पहंुची और 11 सितम्बर 2015 को अपने अगले स्थान आदि कैलाश पर जा पहंुची। यह अभियान उत्साह और जोश दर्शाता है जो स्ट्राईक 1 के सभी योद्धाओ के लिये एक मिसाल है।
यह साहसिक ट्रैक जो स्ट्राईक 1 की स्वर्ण जयंती के अवसर के शुरू की थी इसके सफल समापन पर जनरल कमांडिग आॅफिसर स्ट्राईक वन लेफ्टिनेंट जनरल ए0बी0 शिवाने द्वारा पूरी टीम की प्रशंसा की गई। इस टीम ने कठिन पर्वतीय क्षेत्र में लोगो के जीवन और उसमे पैदल चलने के अपने अनुभव को जनरल कमांडिग आॅफिसर के साथ सांझा किया। समारोह के दौरान इस टीम के द्वारा लिये गये भू चलचित्र और आश्चर्य चकित सुंदरता से भरी हुई तस्वीरों को भी दिखाया गया।
वहीं 21 इंजीनियर रेजीमेंट के 15 सदस्यो का दल हिमाचल प्रदेश व जम्मूू और कश्मीर के ऊंचे पहाडी में 237 किलोमीटर की ऊंची क्षेत्रो की पदयात्रा 17 दिन में समाप्त करके 23 सितम्बर 2015 को भटिंडा पहुंचा। कंमाडर सर्वदा अग्रणी ब्रिगेड ने अभियान दल का स्वागत किया और अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। यह अभियान भारतीय सेना की स्ट्राइक वन कोर की स्वर्ण जयंती मनाने के उपलक्ष्य में हिमाचल प्रदेश के उदयपुर से 21 अगस्त 2015 को शुरू हुई और इसने तीन ऊंचे पहाडी दर्रो तरसालामूला, शिंकुनला तथा फिरसेला को पार करते हुए इसे तीन भागो में पूरा किया। इस पदयात्रा के दौरान दल ने राज्यो के 19 गावो के स्थानिय लोगो के साथ बातचीत की और स्थानिय लोगो से बातचीत करते हुए उन्हे भारतीय सेना के बहुमुखी स्वरूप के बारे में बताया। इस अभियान का मुख्य उद्येश्य युवाओ को प्रेरित करना था। जिसके लिये दल ने यात्रा के दौरान हिमाचल प्रदेश के उच्च माध्यमिक विध्यालयों व काॅलेजो के 450 छात्रो को एक सिपाही के जीवन के बारे में जानकारी दी और उनको भारतीय सशस्त्र सेनाओ का हिस्सा बनने के लिये प्रेरित किया। इस दल ने सीमा सडक संगठन की कार्यशैली की भी जानकारी प्राप्त की जो कि देश के इन दूरस्थ भागो में जीवनरेखा का काम करता हंै। इस यात्रा की मुख्य चुनौतिया तेज ढलानो में चलना, बडे ग्लेशियर, ठंडा बर्फ सा पानी, शून्य से भी कम तापमान में शिविर लगाना था। इन चुनौतियो ने दल प्रकृती को नजदीक से समझने और इसके लिये सम्मान भी विकसित करना सिखाया। कंमाडर सर्वदा अग्रणी ब्रिगेड ने कहा कि दल के द्वारा जिस धैर्य, साहस और व्यवहार को प्रदर्शित किया गया वह भारतीय सेना के चरित्र को दर्शाता है।





