श्रीकृष्ण जन्म स्थान के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर बना ओवरब्रिज आवागमन खुलने के एक माह में ही ध्वस्त हुआ।
विना जांच पड़ताल के ही आवागमन के लिये खोल दिया
विद्युत कार्य की आड़ में सेतुनिगम जुटा मरम्मत कार्य में
मथुरा। विकास कार्यों के तहत लम्बे समय की सोच कर भविष्य की योजनाएं सरकार बनाती है। इन योजनाओं में सड़क, पुल, व सरकार द्वारा निर्माण कार्य कराये जाते हैं। लगभग पचास वर्षों की लम्बी अवधि के लिये पुलों का निर्माण कार्य किया जाता है लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम प्रदेश सरकार का एक ऐसा उपक्रम है जो अपने प्रदेश में ही नही देश के तमाम प्रान्तों में भी पुलों का निमार्ण करता है। जिसको अन्तराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणित भी किया गया है लेकिन कुछ नौसिखिये इन्जीनियरों के और प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल, गलत डिजायन और अनुभव हीन इन्जीनियरों के कारण कार्यदायी संस्था व सरकार की फजीहत हो ही जाती है।
नेशनल हाइवे-2 से श्री कुष्ण जन्म स्थान जाने के लिये बीच में रेलवे लाइन पड़ती है जिसको पार करके लोग आवागमन करते थे साथ ही तीर्थयात्रियों की कार बस इसी रेलवे लाइन को पार करके श्री कृष्ण जन्म स्थान तक आती थी। इस रेलवे फाटक संख्या 528 पर दिल्ली मुम्बई, दिल्ली चैन्नई समेत देश के तमाम हिस्सों को जोडने के लिये रेल गाडियों का आवागमन होता है। अति व्यस्त रेलवे ट्रेक के कारण इस रेलवे फाटक को पार करने के दौरान सैकड़ों लोगों ने अब तक अपने प्राणों की आहुतियां दी हैं। अति व्यस्त रेलवे ट्रेक के कारण यहां यात्रियों देशी-विदेशियों को लम्बे जाम के बाद जन्मस्थान तक आना पड़ता था। लम्बे इन्तजार के वाद स्थानीय लोगों के और क्षेत्रीय विधायक के प्रयास के वाद इस पुल का निमार्ण कार्य शुरू हो सका। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को इस ओवरब्रिज के निमार्ण की जिम्मेदारी दी गई।
लगभग चार वर्षों में बन कर तैयार हुआ यह ओवरब्रिज विधिवत लोकार्पण के विना ही आवागमन के लिये खोल दिया गया पिछले महीने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस पुल का लोकार्पण करना था व्यस्त कार्यक्रम के चलते इसका लोकार्पण अधर में लटक गया। कुछ समय वाद ही पुल का एक हिस्सा उपर से नीचे आ गिरा जिससे कोई हताहत तो नही हुआ लेकिन इस ओवरब्रिज के निमार्ण की कलई अवश्य खुल गई।
4 अप्रेल को तेज वर्षा आंधी तूफान के वाद गोविंद नगर रेलवे फाटक संख्या 528 पर वना ओवर ब्रिज का लेटंर गिर गया जिसमें कृष्ण जन्म भूमि को जाने वाली दो महिला श्रद्धालु व विजय शर्मा नामक युवक घायल होने से बाल बाल बच गये। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस ओवर ब्रिज निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है इसी कारण ऐसा हुआ है इस ओवर ब्रिज निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जाने की शिकायत पहले भी अधिकारियों से की जा चुकी हैं लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।
उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा बनाया गया उक्त ओवरब्रिज आवागमन के लिए विधिवत खोले जाने से पूर्व ही ध्वस्त होने लगा है और उसमें जगह-जगह पड़ चुकी दरारें यह बता रही हैं कि यह किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इस पर बेफिक्र होकर दौड़ रहे वाहन चालकों को इस बात की जानकारी तक नहीं है कि भ्रष्टाचार के गारे से बने करीब पचास वर्ष की मियाद वाले इस ओवरब्रिज ने तो 50 दिन में ही सेतु निगम की असलियत बता कर रख दी है।
ओवरब्रिज की सड़क का एक हिस्सा जहां टूटकर गिर गया वहीं कई स्थानों पर दरारें आ गईं। ऐसे में सेतु निगम के स्थानीय प्रोजेक्ट मैनेजर तथा अभियंताओं के माथे पर बल पड़ना स्वाभाविक था। करीव 38 करोड़ों की लागत से बने लगभग 900 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज की खामियां तथा अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए सेतु निगम के स्थानीय अधिकारियों ने आनन-फानन में ओवरब्रिज पर सावधान! विद्युत कार्य प्रगति पर है का स्टॉपर लगाकर आवागमन बंद कर दिया और जहां से ओवरब्रिज की सड़क ध्वस्त हुई थी उसकी मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया। उस हिस्से को मोटी पाॅलीथिन से ढ़क दिया गया और पाॅलीथिन के उपर कुछ विद्युत केबिलों को ड़ाल कर यह दिखाने का प्रयास किया गया कि यहां विद्युत कार्य किया जा रहा है और ठीक इसी स्थान के नीचे चार बड़ी बड़ी सेटरिंग को नट वोल्ट के सहारे जोड़ कर सड़क पर ड्रिल करके इन सेटरिंग को उपर की तरफ लगाया गया जिसमें सीमेन्ट कोंकरीट का घोल डाल कर उसके सेट होने तक ओवर ब्रिज पर पहरे के लिये। सेतु निगम के कर्मचारियों को लगा दिया गया। जो दिन रात उस हिस्से की देख रेख करते पाये गये।
मानक के अनुसार पचास वर्षों तक चलने वाला ओवरब्रिज मात्र 50 दिनों से पहले ही क्षतिग्रस्त हो जाने पर अन्य तकनीकी जानकारों का कहना है कि इसका एकमात्र कारण मानक के अनुरूप निर्माण सामग्री का इस्तेमाल न किया जाना और उसके अनुपात में भारी हेरफेर किया जाना ही हो सकता है। दूसरे किसी कारण से कोई ओवरब्रिज इतने कम समय में क्षतिग्रस्त हो ही नहीं सकता।
गौरतलब है कि देश के सर्वाधिक व्यस्त और सबसे अधिक तीव्र गति वाले रेल मार्ग पर बने गोविंद नगर ओवरब्रिज को अनौपचारिक तौर पर आवागमन के लिए खोल दिया गया। क्या इससे पहले इसकी क्वालिटी की जांच की गई। बिना जांच के ओवर ब्रिज को आमजन के लिये केसे खोल दिया गया यह भी जांच का विषय है।
जबकि यह ओवरब्रिज नेशनल हाईवे नंबर-2 को कृष्ण की पावन जन्मस्थली से जोड़ता है और कृष्ण जन्मस्थली के दर्शनार्थ प्रतिदिन हजारों की संख्या में देशी-विदेशी लोग यात्री बसों से अथवा निजी वाहनों से आते हैं अतः इस ओवरब्रिज के खुलते ही इस पर वाहनों का आवागमन शुरू हो गया।
इस पर बेफिक्र होकर दौड़ रहे वाहन चालकों को इस बात का इल्म तक नहीं हुआ कि भ्रष्टाचार के गारे से बने करीब 50 वर्ष की लाइफ वाले इस ओवरब्रिज ने तो 50 दिन में ही सेतु निगम की पोल खोल कर रख दी। बड़ी चालाकी के साथ टूटी हुई सड़क के ऊपर काले रंग की मोटी पॉलीथिन बिछा दी गई और उसके ऊपर बिजली के तारों के बंडल रख दिये गये ताकि किसी को शक न हो। पॉलीथिन के निकट कुछ इस अंदाज में त्रिपाल की तरह कपड़ा डालकर काम किया जाने लगा जैसे धूप से बचाव किया जा रहा हो।
दरअसल इस सब की आड़ में ओवरब्रिज के नीचे की ओर काफी बड़े हिस्से पर लोहे की शटरिंग लगाकर और उसे नटबोल्ट आदि से कसकर दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा था।
सेतु निगम के इस कारनामे की जानकारी होने पर मौके पर जाकर अधिकारियों द्वारा की जा रही लीपापोती के फोटोग्राफ्स लिये गये और पूरे मामले की जानकारी करने का प्रयास किया। ओवरब्रिज पर मरम्मत कार्य करा रहे सेतु निगम के कर्मचारी द्वारा सूचित किये जाने पर कोई वीरेन्द्र सिंह नामक अभियंता और उनके साथ आये किन्हीं सिंह साहब और शर्मा जी ने अधिकृत रूप से अपना वक्तव्य देने से बचते रहे और इतना जरूर स्वीकार किया कि बेमौसम हुई बारिश के कारण ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ है। हमसे कुछ गल्तियां हुई हैं हम उसे ठीक करने में लगे हैं। जल्द ही ठीक हो जायेगा। पूछे जाने पर कि 50 वर्ष की मियाद वाला ओवरब्रिज 50 दिन से पहले ही कैसे क्षतिग्रस्त हो सकता है जबकि उसके निर्माण में बारिश आदि के होने का ध्यान तो रखा गया होगा, वह तीनों कर्मचारी इसका कोई उत्तर नहीं दे सके। उनके द्वारा बताया गया कि आर. के. सिंह इस ओवरब्रिज के प्रोजेक्ट मैनेजर हैं जो आगरा बैठते हैं और यहां आते-जाते रहते हैं। प्रोजेक्ट मैनेजर आरके सिंह का न तो उन्होंने कोई कॉन्टेक्ट नंबर बताया और ना ही उनसे बात कराना जरूरी समझा। बरावर समझाने का प्रयास करते रहे कि यह ज्यादा बड़ा मामला नहीं है, आप इसे इतनी गंभीरता से न लें।
आवागमन के लिये खोल दिये जाने के एक माह के अंदर हुए ओवरब्रिज के इस हाल की पुनरावृत्ति आगे नहीं होगी, इस बात की गारंटी कोई नही ले सकता है और यह किसी बड़े हादसे का कारण नहीं बनेगा, यह भी कोई कह नही सकता, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इन शंकाओं के बारे में सेतु निगम के इन अधिकारी व कर्मचारियों के पास कहने को कुछ नहीं था।
सेतु निगम की यही टीम मथुरा में यमुना नदी पर बने पुराने पुल की मियाद खत्म हो जाने के कारण अब नये पुल का निर्माण कर रही है। यह पुल गोविंद नगर रेलवे क्रॉसिंग पर बने पुल से काफी लंबा बनना है और उससे कई गुना अधिक लागत से बनाया जा है।
क्षेत्रीय विधायक उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर से फोन पर सम्पर्क करने पर उन्होंने बताया कि उनके और सोनिया गांधी जी के प्रयास से इस ओवर ब्रिज का निमार्ण कार्य हो सका। यह ओवर ब्रिज प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार के विशेष सहयोग से बन सका है। निमार्ण कार्य में कुछ कमियां आई हैं उन्हे जल्द सुधारने के लिये कहा गया है और अधिकारियों से भी इस सम्बन्ध में वार्ता हो चकी है कि जो कमियां रह गई हैं उनको जल्द से जल्द ठीक किया जाय।
माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा और सपा मुखिया मुलायम सिंह के भाई शिवपाल सिंह यादव ही सेतु निगम के चेयरमैन हैं और वो भी अक्सर मथुरा आते रहते हैं। किंतु लाखों लोगों की आंखों में धूल झोंककर भ्रष्टाचार करने में माहिर सेतु निगम के अधिकारियों को उनकी आंखों में धूल झोंकते परेशानी क्यों होने लगी। अब देखना सिर्फ यह है कि सीमेंट, बजरी, लोहे और कंक्रीट के साथ भारी भ्रष्टाचार के गारे से श्रीकृष्ण जन्म स्थान केनिकट बना ओवरब्रिज मरम्मत के सहारे कितने दिन चलता है और कितने बड़े हादसे का गबाह बनता है।





