कार्तिक मास में देश-दुनिया से आए कृष्णभक्त कार्तिक नियम सेवा कर कमा रहे पुण्य लाभ

 हरिनाम संकीर्तन कर झूमते-गाते परिक्रमा कर रहे विदेशी भक्त

मथुरा। अपने आराध्य की कृपा पाने के लिए विदेशी भक्त भक्ति में तल्लीन होकर कार्तिक नियम सेवा करने में पीछे नहीं हैं। दुनिया के विभिन्न देशों से कृष्ण भक्ति के लिए यहां आए विदेशी भक्त ढोल-मृदंग और मजीरा लेकर सकीर्तन करते हुए वृंदावन की कुंज गलियों में हरिनाम संकीर्तन की अलख जगा रहे हैं। सुबह सूरज उगते ही चैतन्य महाप्रभु और श्रील प्रभुपाल के अनुयायी कार्तिक मास में नियम सेवा कर अपना जीवन धन्य करने में जुट जाते हैं। यमुना स्नान के साथ ही विदेशी भक्त नाचते-गाते वृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमा कर रहे हैं। 

कार्तिक मास को लेकर धार्मिक मान्यता है कि हिन्दू पंचाग के अनुसार आठवां महीना कार्तिक मास होता है और शरद पूर्णिमा से कार्तिक माह की शुरुआत हो जाती है। यह महीना तीर्थ और धार्मिक कार्य करने के लिए पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह में मनुष्य की आवश्यकताएं जैसे उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक उन्नति और देव कृपा का आध्यात्मिक समाधान सरलता से हो जाता है। इस माह में सूर्योदय से पूर्व यमुना स्नानकी पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व बताया गया है इसके साथ ही तुलसी और सालिग्राम जी की पूजा भी इस महीने में विशेष फलदायी होती है। कार्तिक मास के अलावा इसे दामोदर मास भी कहा जाता है इसलिए चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी दुनियाभर से इस माह विशेष पूजा-अर्चना और पुण्य लाभ कमा स्वंय का धन्य करने के लिए वृंदावन पहुॅचते हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश और दुनिया से अस माह हजारों की संख्या में कृष्ण भक्त वृंदावन की कुंज गलियों में हरिनाम संकीर्तन करने के साथ ही मंदिरों में होने वाले अनुष्ठानों में भी शामिल हो रहे हैं। 


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