कृषि मण्डी के नाम पर किसानों का उत्पीड़न

कोसीकलाँ। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि किसानों के रिहायशी मकान, गौत नौहरे आदि की जमीन को कृषि भूमि मानकर अर्जन करना चाहते है। उददेश्य यह है कि वह अनाज मण्डी बनाने को दर्शाया गया है लेकिन यहाँ पर टेलीफोन एक्सचेंज, गोदाम व सुपर बाजार बनाकर किसानो की जमीन को ऊँचे दामो में बेचना चाहते हैं। भूमि नगर पालिक क्षेत्र में थी, जबकि मुआवजा देहाती क्षेत्र को निर्धारित किया गया था। मुआवजा कम होने से असंतुष्ठ किसानो द्वारा मुआवजा न लेने पर भी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उच्च न्यालय के आदेशानुसार 12 वर्ष तक अर्जित भूमि का प्रयोग न होने पर अर्जन अवैध व अप्रभावी होता है लेकिन 40 बर्ष बाद भी जमीन का प्रयोग न होने पर अनाज मण्डी द्वारा उस पर अधिकार दिखाना चाहते हैं। भूमि अर्जन से प्रभावित किसानो को मण्डी की ओर से किसान परिवारो को नौकरी, आढत, व दुकान न देकर लाभ से वंचित रखना चाहते हैं एवं मण्डी की दुकानो की नीलामी को अभिलम्ब रोकने का निर्देश है ताकि कोई विस्फोटक स्थिति पैदा न हो। अन्यथा शासन प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। यह बात भगवान सिहं सागवान, तैहन्दर, किशन सिहं, ओेमवीर, वदन सिह, बृज किशोर शर्मा, अजय सिहं सांगवान, प्रहलाद शर्मा, महेन्द्र सिहं, विजय सिहं सांगवान, खेमा चैधरी, तेजपाल सिहं, गोविन्द शरण, तेजवीर, कृपाल सिहं, उत्तम चैधरी एवं वेदप्रकाश शर्मा ने कही।


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