गिरिराज तलहटी में श्रीमद भागवत कथा श्रवण से होते है वैतरणी पार- पुण्डरीक जी

 

 

7वीं श्रीमद भागवत कथा के 7वें दिन दिया श्रीमद भागवत कथा श्रवण का ज्ञान

-जतीपुरा में भागवत कथा का रसपान कराते पुण्डरीक जी महाराज 

-कथा श्रवणार्थ पाण्डाल में जुटे हजारों भक्तगण

गोवर्धन। गिरिराज धाम के जतीपुरा स्थित बिनानी भवन में चल रही अपनी 7वीं श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के 7वें दिन गुरूवार को भागवत भाष्कर मन्माध्व गौडे़श्वर वैष्णावाचार्य पुण्डरीक जी महाराज ने कहा कि मनुष्य का ग्रहस्थ आश्रम एक भट्टी है। इसमें प्रत्येक मनुष्य को तपना पडता है।

इस ग्रहस्थ आश्रम रूपी भट्टी में तपे बिना सच्ची भक्ति प्राप्त नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सहज रहना चाहिए और समस्याओं से लडऩा नहीं बल्कि उनमें सहज हो जाना चाहिए। सहजता में ही सफलता निहित है। उन्होंने कहा कि संसार की वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। उनका उपभोग अर्थात उन्हें भोगा नहीं जाता। संसार के प्राणी में वासना का वास होता है और इस वासना का अंत प्रभु की उपासना होता है, जबकि उपासना की प्रेरणा कोई सद्गुरु ही दे सकता है।

उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से प्राणी सद्मार्ग की ओर चलता है। भक्त के अंदर जब भावना जागृत होती है, तब प्रभु के आने में देरी नहीं होती। प्रभु तो भाव के भूखे हैं श्रद्घा भाव से समर्पित होकर उनकी उपासना करोगे तो वह अवश्य ही पा करेंगे। उन्होंने कहा कि भागवत का उद्देश्य लौकिक कामनाओं का अंत करना और प्राणी को प्रभु साधना में लगाना है। संत चलते फिरते तीर्थ होते हैं जो संसार के प्राणियों को दिशा देने व उन्हें सद्मार्ग दिखाने आते हैं। भागवत को जीवन में अपनाने व उसके अनुसार स्वयं को ढालने से ही प्राणी अपना कल्याण कर सकता है। अंत में श्रीमद् भागवत कथा जी की आरती उतारकर विश्राम दिया गया। इस मौके पर हजारों की संख्या में दशी विदेशी भक्त मौजूद थे। इस मौके पर हजारों की संख्या में दशी विदेशी भक्त मौजूद थे। इस मौके पर प्रसाद स्वरूप भक्तों को तुलसी के पौधे भक्तों को वितरित किये गये। 


Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login






Mediabharti